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Written By: Editorial Team | Published : August 6, 2018 4:39 PM IST
हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो गर्भवती महिलाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित होती हैं, उनके पेट में पल रहे बच्चे में जन्म के बाद ऑटिज्म से ग्रस्त होने का खतरा अधिक रहता है। यह अध्ययन ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज में की गई। इस अध्ययन के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम उच्च टेस्टोस्टेरोन की वजह से होने वाला एक विकार है, जिसके परिणामस्वरूप समय से पहले युवावस्था, अनियमित माहवारी और शरीर पर अतिरिक्त बाल होने लगते हैं।
यह स्टडी 'ट्रांसलेशनल साइक्रियाट्री' में प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पीसीओएस से पीड़ित लगभग 8,588 महिलाओं के आंकड़ों की जांच की।
इससे पहले हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ऑटिस्टिक बच्चों में टेस्टोस्टेरोन समेत 'सेक्स स्टीरॉयड' हार्मोन के स्तर बढ़ जाते हैं, जो बच्चे के शरीर और मस्तिष्क को समय से पहले ही युवावस्था की ओर जाने लगते हैं। हार्मोन के बढ़ते स्तर पर बहस करते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि इसका एक कारण जन्म देने वाली मां का विकार हो सकता है।
निष्कर्ष बताते हैं कि अगर मां में सामान्य से अधिक टेस्टोस्टेरोन होता है, जैसा कि पीसीओएस वाली महिलाओं के मामले में देखा जाता है, तो कुछ हार्मोन गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा को पार कर जाते हैं, जिससे भ्रूण का इस हार्मोन से अधिक संपर्क हो जाता है और बच्चे के मस्तिष्क का विकास बदल जाता है।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से एड्रियाना चेरस्कोव का कहना है कि यह निष्कर्ष उस सिद्धांत को और मजबूत करता है, जिसमें बताया गया है कि ऑटिज्म न केवल जीनों के कारण होता है, बल्कि इसका टेस्टोस्टेरोन जैसे जन्मपूर्व सेक्स हार्मोन भी कारण हो सकते हैं।
चित्रस्रोत-Shutterstock.
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