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महिलाओं की फर्टिलिटी को कमजोर करती है शरीर में छिपी ये 1 बीमारी, जानें कैसे करें बचाव

PCOS एक ऐसी समस्या है, जो महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कैसे ये महिलाओं की प्रजनन क्षमता को कमजोर करती है ।

महिलाओं का जीवन आसान नहीं है क्योंकि उन्हें जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना ही पड़ता है, जिसमें से एक पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (PCOS) भी है। ये ओवरी यानी कि अंडाशय और हार्मोन की गतिविधियों से जुड़ी एक आम समस्या है, जो किसी भी महिला के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। PCOS एक ऐसी समस्या है, जो महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कैसे ये महिलाओं की प्रजनन क्षमता को कमजोर करती है और आप कैसे इस समस्या से बचाव कर सकती हैं।

महिलाओं की फर्टिलिटी हो जाती है कमजोर

एक्सपर्ट बताते हैं कि महिलाओं की ओवरी हर महीने अंडों और हार्मोन्स रिलीज करती हैं, जो फर्टिलिटी, मासिक धर्म जैसे हार्मोन को कंट्रोल करने का काम करते हैं। पीसीओएस इन्हीं सब चीजों का एक हिस्सा है, जो कि एक मेटाबॉलिक विकार है। इस स्थिति में अधिक मात्रा में हार्मोन रिलीज होना शुरू हो जाते हैं, जिससे महिलाओं की ओव्यूलेशन में बदलाव होना शुरू हो जाता है। इस स्थिति में होता ये है कि अंडाशय में बहुत सारे सिस्ट बनने लगते हैं और ये स्थिति एक अन्य समस्या पीसीओडी से भी ज्यादा खतरनाक और गंभीर हो जाती है।

बिना डॉक्टरी सलाह के समाधान मुश्किल

पीसीओएस (Polycystic Ovarian Syndrome) एक गंभीर स्थिति है, जिसमें बिना डॉक्टरी सलाह के आप राहत नहीं पा सकती हैं। भले ही ये एक मेटाबॉलिक विकार है, जिसके मामले कम ही सामने आते हैं। बता दें कि ये प्रकार का अंतःस्रावी तंत्र विकार है यानी के एंडोक्राइन सिस्टम डिसऑर्डर। कभी-कभी ये स्थिति हार्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance) का कारण बनती है।

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गर्भपात का बढ़ जाता है खतरा

पीसीओएस गर्भवति होने की चाह रखने वाली महिलाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है क्योंकि PCOS से गुजर रही महिलाओं को हार्मोनल असंतुलन के कारण गर्भवती होने में दिक्कत होती है। इस स्थिति में उनकी ओवरी रोज अंडो को रिलीज करने में सफल नहीं हो पाती है। इस स्थिति में बहुत सी महिलाओं को गर्भपात का जोखिम भी रहता है।

​कैसे बचें इस स्थिति को

पीसीओएस में अंडाशय और हार्मोन दोनों ही शामिल होते हैं लेकिन पीसीओएस, पीसीओडी की तुलना में ज्यादा घातक साबित होती है हालांकि समय पर निदान हो जाए तो इलाज के जरिए महिलाओं की फर्टिलिटी को बचाया जा सकता है।

1-हेल्दी डाइट और फिटनेस रूटीन से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

2-ये दोनों ही चीजें पीसीओएस और पीसीओडी से होने वाले हार्मोनल असंतुलन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

3- लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से मिलें और इस समस्या का समाधान करें।

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