
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : September 10, 2020 2:59 PM IST
जब पीसीओएस के लक्षणों की बात होती हैं, तो पीरियड्स का अनियमित होना, पिम्पल्स और शरीर के बालों का विकास जैसे लक्षण मन में आते हैं। हालांकि, ये लक्षण काफी आम हैं, लेकिन कई महिलाओं को इनकी जानकारी नहीं है। डॉ. सबहत रसूल, गायनकोलॉजिस्ट, ग्यानैकवर्ल्ड, मुंबई की मदद से हम यहां पीसीओएस के 4 असामान्य लक्षण के बारे में लिख रहे हैं, जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए!
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), महिलाओं को होने वाली एक आम बीमारी है। इस रोग में महिलाओं के अंडाशय में पर सिस्ट बनने लगती हैं। इस रोग के होने के पीछे हॉर्मोनल असंतुलन और खराब खानपान व लाइफस्टाइल है। पीसीओएस होने पर महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है। आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में 10 से 12 प्रतिशत महिलाएं इस रोग से जूझ रही हैं। वैसे तो पीसीओएस का पूरा उपचार उपलब्ध है लेकिन यदि किसी रोग को घरेलू तरीकों से सही किया जा सकता है तो क्या हर्ज है? आज हम PCOS Awareness Month के मौके पर आपको कुछ ऐसे नुस्खे बता रहे हैं जो पीसीओएस के इलाज में कारगार हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये-
अलसी के बीज फाइबर, लिगानान, ओमेगा-6 और ओमेगा-3 फैटी एसिड का सीधा स्त्रोत है। एक ऐसा प्रोटीन जो हमारे शरीर में उपलब्ध टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को कम करता है। अलसी के बीज शरीर के ग्लूकोज और इंसुलिन का उपयोग करने में मदद करते हैं जो पीसीओएस के साइड इफेक्ट को कम करते हैं। आज चाहे तो अलसी के बीजों को पानी में कुछ देर तक भिगाने के बाद भी ले सकते हैं और इसका पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। आप इसे सिंपल पीने वाले पानी के साथ भी ले सकते हैं।
शहद हमारे शरीर को कई तरह के लाभ देता हैं पीसीओएस होने की स्थिति में भी शहद के सेवन से पीसीओएस को कंट्रोल किया जा सकता है। नींबू और गुनगुने पानी के साथ शहद की एक चम्मच मिलाएं और इसे सुबह खाली पेट पी लें। यह पीसीओएस की स्थिति में सुधार करने के साथ ही वजन कम करने में भी मदद करती है। कभी भी शहद को गर्म कर सेवन करने की भूल न करें।
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में, अग्न्याशय द्वारा स्रावित इंसुलिन ऊतकों द्वारा कुशलता से उपयोग नहीं किया जाता है और इससे मोटापा और अतिरिक्त टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन होता है। मेथी के पत्तों या बीजों का सेवन करने से इंसुलिन का स्तर सामान्य बनाए रखने में मदद मिलेगी। स्त्री रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि मेथी शरीर में ग्लूकोज को सहन करनी की क्षमता को बढ़ाती है, जो वजन घटाने में मदद करती है। इसके सेवन के लिए मेथी के बीजों को रात भर भिगो दें और सुबह खाली पेट या लंच और डिनर से पांच मिनट पहले इन्हें खाएं। आप पके हुए मेथी के पत्तों का भी सेवन कर सकते हैं। पीसीओएस को कंट्रोल करने में मेथी के दाने बहुत फायदेमंद हैं।
डायबिटीज रोगियों के लिए दालचीनी का सेवन किसी वरदान से कम नहीं है। यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। सिर्फ यही नहीं दालचीनी का सेवन पीसीओएस को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है। दालचीनी का सेवन दही और मिल्कशेक के साथ कर सकते हैं। दालचीनी को केक और मफिन्स में डालकर भी लिया जा सकता है। चूंकि इसमें नमात्र कैलोरी होती है, इसलिए आपको अपने वजन के बारे में भी सोचने की जरूरत नहीं है।
ओबेसिटी और पीसीओएस में सीधा संबंध हैं। यदि वजन ज्यादा हो तब भी पीसीओएस होने का खतरा रहता है। और पीसीओएस होने पर शरीर में हार्मोन गड़बड़ हो जाते हैं जो आपको ओबेसिटी का शिकार बना सकता है। ऐसी स्थिति आपको गठिया और दिल की बीमारियों की ओर भी धकेल सकती है।