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टीबी की बीमारी के लक्षण क्या हैं, डॉक्टर से जानिए टीबी के इलाज के तरीके

टीबी एक तेजी से फैलने वाली बीमारी है जिसके लक्षणों को नजरअंदाज करने से यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। डॉक्टर से समझिए कि टीबी से बचाव के उपाय क्या हैं।

टीबी की बीमारी के लक्षण क्या हैं, डॉक्टर से जानिए टीबी के इलाज के तरीके

Written by Sadhna Tiwari |Updated : March 21, 2025 12:39 PM IST

टीबी सबसे घातक और संक्रामक बीमारियों में से एक है। विशेषकर भारत में टीबी मरीजों की संख्या (TB Patiets in India) चिंताजनक स्तर से बढती जा रही हैं। इसीलिए इस बिमारी का समय रहते निदान होना काफी जरूरी हैं। जल्दी निदान नही हुआ तो टीबी के मरीज के लिए मृत्यू का भी खतरा (Risk of death in TB) बढ़ सकता है। ऐसे में मरीज की जान बचाने और टीबी के जल्द निदान के लिए नियमित जांच करना काफी महत्त्वपूर्ण हैं। टीबी एक प्रकार का बैक्टेरियल इंफेक्शन है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (mycobacterium tuberculosis) के कारण होता है। यह बैक्टेरिया धीरे-धीरे फेफड़ों को कमजोर करता है और यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा के माध्यम से फैल भी जाता है। टीबी की बीमारी में सबसे पहले और आमतौर पर देखे जाने वाले लक्षण (Signs and symptoms of TB in initial stages) हैं-

  • लगातार खांसी आना (Persistent coughing)
  • बार-बार बुखार होना (Fever)
  • रात के समय पसीना आना (Night time sweating)
  • अचानक से वजन कम होना (Sudden weight loss)
  • बहुत अधिक थकान (Extreme fatigue and tiredness)

टीबी की बीमारी के कारण क्या हैं?- Causes of TB or Tuberculosis

आमतौर पर टीबी की बीमारी कमजोर इम्यून पॉवर (Low immune power), कुपोषण (Malnutrition or nutritional deficiencies) और संक्रमित व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क जैसे कारणों से फैलता (Ways TB spreads) है। इसी तरह अगर टीबी का उपचार जल्द ना शुरू किया जाए तो इससे फेफड़ों को फेफड़ों को नुकसान (TB can damage lungs) हो सकता है और टीबी गंभीर हो सकती है।

एक्सपर्ट के अनुसार, टीबी से पीड़ित बहुत से लोग उपचार के बाद (TB ke upchar ke baad) काफी अच्छी जिंदगी जीते हैं और उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ (quality of life after treatment of TB) में भी सुधार होता है। हालांकि, टीबी फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचाकर उन्हें डैमेज कर सकता है। टीबी एक जीवाणु रोग है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है जिससे फेफड़े छोटे हो सकते हैं और धीमे वायु प्रवाह के साथ वायुमार्ग के सिकुड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। टीबी के उपचार के बाद, टीबी से ठीक हुए लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, जो उनकी दैनिक दिनचर्या में बाधा डाल सकती है और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। टीबी वायुमार्ग को स्थायी रूप से चौड़ा भी कर देता है, जिससे श्वसन मार्ग में संक्रमण का खतरा (Risk of infection respiratory tract) बढ़ जाता है। इसलिए मरीजों के लिए नियमित जांच करना जरूरी हैं। इसके अलावा नियमित टीके लगवाना या वैक्सीनेशन (Vaccination for TB) भी जरूरी है। विशेषकर ऐसे लोग जिन्हें  निमोनिया का खतरा अधिक होता (People with high risk of Pneumonia) है उन्हें वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए।

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वैक्सीनेशन के साथ-साथ टीबी के प्रसार को रोकने के उपाय क्या हैं?- How to control Spread of TB or tuberculosis

टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान और ट्रीटमेंट के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जो टीबी को फैलने से रोकने के लिहाज से (Precautions for TB patients to control spread of TB post treatment) बहुत महत्वपूर्ण हैं-

  • हाथों की साफ-सफाईका ध्यान रखें (Follow hand hygiene and cleanliness)
  •  मास्क पहनकर ही अन्य लोगों से मिलें (Use mask)
  • सोशल डिस्टेंसिंग (Social distancing) का पालन करें और अ्न्य लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखना
  • बीमार लोगों के आसपास न जाएं
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचें
  • पौष्टिक आहार लेें (Eat healthy diet)
  • नियमित व्यायाम करें (Exercise daily)
  • वेट मैनेजमेंट के लिए मोटापा कम करें और आदर्श वजन मेंटेन करने के प्रयास करें (maintain healthy weight)
  • दवाएं समय पर लें
  • अपने फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें (take good care of your lungs)

टीबी की बीमारी का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है?- Diagnosis of TB

दिल्ली स्थित अपोलो डायग्नोस्टिक झोनल टेक्निकल चीफ और कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट डॉ. तनिश मंडल ( Tanish Mandal, Zonal Technical Chief (North India) & Laboratory Head) ने बताया कि , "टीबी का जल्दी पता चले तो मरीज की जान बचाई जा सकती हैं, क्योंकि इससे तुरंत इलाज शुरू किया जा सकता हैं और संक्रमण को बढ़ने से भी रोका जा सकता है। वहीं, पीसीआर-आधारित परीक्षणों जैसे  एडवांस मॉलेक्यूलर डायग्नोसिस की मदद से कुछ ही घंटों में सटीक परिणाम देकर टीबी का पता लगाने जैसे क्रांतिकारी बदलाव आ चुके हैं। इससे अधिक से अधिक लोगों की जान बचाने की उम्मीद भी जगी है। इसी तरह ये परीक्षण कम बैक्टीरिया लोड की भी पहचान कर सकते हैं।

इसी तरह समय रहते निदान से टीबी से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन्स के रिस्क (Complications related to TB) को भी कम किया जा सकता है। इससे फेफड़ों को होने वाले गम्भीर नुकसान, एम्पाइमा और न्यूमोथोरैक्स जैसी स्थितियों से बचा जा सकता है।  टीबी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए नियमित जांच आवश्यक है। इसके अलावा, समय पर निदान और उपचार से इलाज में खर्च, अस्पताल में रहने की अवधि और बीमारी से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है। इस तरह मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होता है। जबकि, सही निदान और उपचार से बीमारी को खत्म भी किया जा सकता हैं।"

टीबी के डायग्नोसिस के मेथड्स क्या हैं?-Diagnosis of TB

डॉ. मंडल ने कहा कि , "मॉलेक्युलर टेस्टिंग से आनुवंशिक कारकों (Genetics related risk factors of TB) की पहचान करके दवा प्रतिरोधी टीबी का पता लगाने में मदद मिलेगी जो पहली पंक्ति की दवाओं के लिए प्रतिरोध प्रदान करते हैं। वहीं, कई सप्ताह का समय लेने वाले पुराने और पारंपरिक तरीकों के विपरीत मॉलिक्युलर टेस्टिंग से फास्ट रिजल्ट में प्राप्त हो सकते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि विशेषज्ञ जल्द ही उचित उपचार शुरू कर सकें। मेडिसिन्स रेजिस्टेंस की प्रारंभिक पहचान से मरीजों को सही उपचार पाने और  ठीक होने की दर में भी सुधार आने और टीबी को फैलने से रोकने में भी मदद मिलेगी। चूंकि टीबी एक खतरा बना हुआ है, इसलिए नियमित टीबी स्क्रीनिंग में मॉलेक्यूलर डायग्नोस्टिक इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में एक गेम-चेंजर है।"

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Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशन उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।