क्या आप जानते हैं अपने आप आदतों का बदलना भी पार्किंसंस डिजीज का शुरूआती लक्षण हो सकता है?
तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क से जुड़े कई ऐसे रोग होते हैं, जिनके शुरुआती लक्षणों की पहचान करने में लोग अक्सर गलती कर देते हैं और जब स्थिति गंभीर हो जाती है तब पता चल पाता है। पार्किंसंस डिजीज भी ऐसी ही एक समस्या है।
पार्किंसंस डिजीज एक ऐसी न्यूरोडीजेनरेटिव ब्रेन कंडीशन है, जिसके शुरुआती लक्षण मरीज की आदतों में कुछ मामूली बदलाव के रूप में विकसित हो सकते हैं। मरीज व उसका ध्यान रखने वाले अक्सर इन मामूली बदलावों की पहचान नहीं कर पाते हैं जैसे आवाज का धीमा पड़ जाना, चलने की गति में हल्की कमी आना या लिखावट में बेहद मामूली बदलाव आना। लोग इस तरह के बदलावों को आसानी से बुढ़ापे के लक्षण या महज थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कभी-कभी, आदतों में इस तरह के बदलाव पार्किंसंस रोग के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं, जिसके जरिए शरीर में पहले ही चेतावनी देता है। डॉ. गीता भट्ट, प्रोफेसर एवं हेड ऑफ डिपार्टमेंट, न्यूरोफिजियोथेरेपी, K J Somaiya College of Physiotherapy ने इस बारे में ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
सिर्फ हाथों-पैरों की कंपन ही नहीं
अक्सर पार्किंसन रोग को बस हाथों एवं पैरों में कंपन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके कई अन्य लक्षण भी हैं जो अक्सर जो आसानी से नजर नहीं आते हैं। जैसे -
- चलने-फिरने की रफ्तार का धीमा पड़ना
- कपड़े पहनने में दिक्कत होना
- चलने-फिरने दिक्कत होना
- शरीर के ऊपरी हिस्से में अकड़न महसूस होना
- चलते समय खुद असामान्य महसूस होना
इसके अलावा, चलते समय हाथों या शरीर के ऊपरी हिस्से में अकड़न महसूस होने से उसके हिलने-डुलने की गति कम हो सकती है, जिससे व्यक्ति का चलना थोड़ा असामान्य लगता है।
आवाज में बदलाव के लक्षण
आवाज में किसी तरह का बदलाव होना भी पार्किंसन डिजीज का शुरुआती लक्षण हो सकता है। बोलने का अंदाज बदल सकता है और आवाज में रूखापन आ सकता है। लिखावट भी धीरे-धीरे सिकुड़ी हुई और छोटी हो सकती है, और इस लक्षण को "माइक्रोग्राफिया" कहा जाता है। अक्सर लोग इन संकेतों की अनदेखी करते हैं, लेकिन ये इस रोग की पहचान के लिए बड़े संकेत होते हैं।
पार्किंसन डिजीज के अन्य लक्षण
अब उन लक्षणों की बात करते हैं जिनका संबंध शरीर के हिलने-डुलने से नहीं है, लेकिन वे उतने ही जरूरी हैं और अक्सर चलने-फिरने से जुड़ी समस्याओं के शुरू होने से भी पहले दिखाई दे सकते हैं जैसे
- इनमें नींद न आना
- सूंघने की शक्ति कम होना
- थकान रहना
- कब्ज की समस्या
- घबराहट रहना
- डिप्रेशन व अन्य मानसिक समस्याएं
दरअसल, ये लक्षण बेहद आम होते हैं, जिस कारण से लोग अक्सर इन्हें पार्किंसन डिजीज जैसी समस्या से जोड़ नहीं पाते हैं और इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है या फिर इसे किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी के तौर पर नहीं देखा जाता है और इनका इलाज अलग से किया जाता है।
पार्किंसन डिजीज और फिजियोथेरेपी
शुरुआत में ही फिजियोथेरेपी की मदद ली जाए तो पार्किंसन डिजीज की कंडीशन में काफी सुधार देखा जा सकता है। इस बीमारी की शुरुआत में ही लोगों के बैठने-उठने के तरीके, संतुलन और चलने-फिरने में हल्के बदलाव देखे जा सकते हैं। इसलिए शुरुआत में ही फिजियोथेरेपी की मदद लेने से शारीरिक ताकत बढ़ती है, चलने-फिरने की क्षमता बरकरार रहती है और गिरने का जोखिम कम होता है।
पैदल चलने के अलावा, संतुलन बनाने वाले व्यायाम, शारीरिक मजबूती बढ़ाने वाले व्यायाम और एरोबिक वर्कआउट जैसी आसान और सुनियोजित गतिविधियां फायदेमंद साबित हुई हैं। फिजियोथेरेपी शरीर के बैठने-उठने के तरीके को सुधारने और चलने-फिरने की ऐसी तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाता है, ताकि मरीज लंबे समय तक दूसरों पर निर्भर हुए बिना अपना काम कर सकें। कुछ मामलों में, किसी लय पर आधारित व्यायाम (जैसे किसी ताल के साथ चलना) चलने के तरीके को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
तो मुख्य संदेश बिल्कुल स्पष्ट है पार्किंसन रोग की शुरुआत अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे और चुपचाप होती है। आमतौर पर, परिवार के सदस्य ही सबसे पहले इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलावों पर गौर करते हैं। इन पर ध्यान देने और समय रहते डॉक्टर की सलाह लेने से, रोग का समय पर पता लगाया जा सकता है और सही देखभाल के साथ बेहतर इलाज मिल सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से इलाज में देरी हो सकती है। जबकि इनकी पहचान करने से रोग को ठीक करने में काफी मदद मिल सकती है।Dr. Geeta Bhatt, Professor and Head of Department, Department of Neurophysiotherapy, K J Somaiya College of Physiotherapy
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल पार्किंसन रोग से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।