Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
Cervical Pain Symptoms in Hindi: आज के समय में हार्ट अटैक और लकवे जैसी जानलेवा और जीवन को पूरी तरह खराब कर देने वाली बीमारियों ने लोगों को डराया हुआ है। इस कारण से शरीर के एक हिस्से में दर्द होना या एक हिस्सा सुन्न होने लगना आदि लक्षणों को देखते ही लोग डर जाते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि हम सर्वाइकल को कोई आम या कम खतरनाक बीमारी बता रहे हैं, लेकिन हम बस यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि हार्ट अटैक और लकवा जैसी बीमारियों की तुलना में सर्वाइकल जैसी कंडीशन से निपटना ज्यादा आसान है। सर्वाइकल का कोई जड़ से इलाज तो नहीं है, लेकिन अगर समय रहते इसका पता लगाया जाए और खास बातों का ध्यान रखा जाए तो इसके कारण होने वाला डैमेज वहीं रुक जाता है और दर्द, सूजन व सुन्न होने जैसी लक्षण धीरे-धीरे गायब या कम हो जाते हैं। लेकिन, इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि अगर लंबे समय तक सर्वाइकल को इग्नोर किया जा रहा है, तो यह कहीं ज्यादा गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
सर्वाइकल के दौरान गर्दन के आसपास की रीढ़ की हड्डी का कोई हिस्सा कमजोर पड़ जाता है। रीढ़ की हड्डी में मौजूद डिस्क होती हैं, जिनके बीच से ही तंत्रिकाएं निकली होती हैं। जब कमजोरी, हर्निया या किसी चोट के कारण ये डिस्क के बीच की जगह कम हो जाती है, तो इनके बीच से निकली तंत्रिकाएं दब जाती हैं और जो नस दबती है शरीर का वही हिंस्सा प्रभावित हो जाता है।
(और पढ़ें - सर्वाइकल दर्द को कैसे ठीक करें)
शरीर के जिस हिस्से में जा रही नस दब जाती है, वहीं हिस्सा प्रभावित हो जाता है। ऐसे में कई बार वह हिस्सा सुन्न होने लगता है और वहां पर दर्द भी होना लगता है। कई बार एक हिस्सा सुन्न होने के कारण लोगों को लकवा या हार्ट अटैक (अगर बाईं तरफ का हिस्सा सुन्न हुआ है) का डर लगने लगता है, जबकी कई बार सर्वाइकल के कारण ही ऐसा हो रहा होता है।
सर्वाइकल के कारण शरीर का कोई दूसरा हिस्सा सुन्न हो सकता है या उसमें दर्द हो सकता है, लेकिन मुख्य दिक्कत को गर्दन के आसपास की रीढ़ में होती है। इसलिए सर्वाइकल के मरीजों में अक्सर गर्दन में दर्द या अकड़न जैसी समस्याएं रहती हैं। यहां तक कि कई बार उन्हें गर्दन में दर्द के साथ-साथ सिर दर्द जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं।
सर्वाइकल के मरीजों में अक्सर देखा गया है कि उन्हें अक्सर कई बार शरीर का संतुलन बनाने में भी परेशानी होने लगती है। शरीर का संतुलन न बन पाने के कारण उन्हें अक्सर बार-बार चक्कर आना या सिर घूमने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए जिन लोगों को अक्सर चक्कर आते हैं या सिर घूमने जैसी समस्याएं होती हैं तो एक बार डॉक्टर से इस बारे में डिस्कस कर लेनी चाहिए।
सर्वाइकल की जांच अगर समय पर की जाए और उसका ट्रीटमेंट शुरु हो जाए तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है और मरीज को कोई ज्यादा परेशानी होने से बचाया जा सकता है। लेकिन अगर समय रहते इसका ध्यान न दिया जाए और इलाज शुरू न किया जाए तो कई बार नर्व पूरी तरह से डैमेज हो जाती है, जिससे शरीर में परमानेंट डैमेज हो जाता है। ऐसे में कई बार कोई हिस्सा काम करना पूरी तरह से बंद कर देना, यूरिन कंट्रोल न कर पाना या शरीर का बैलेंस खराब हो जाना आदि समस्याें परमानेंटली हो जाती हैं।
इसके साथ-साथ अगर सर्वाइकल के लिए उचित देखभाल नहीं की जा रही है जैसे ट्रीटमेंट या थेरेपी आदि या फिर पूरी तरह से परहेज नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे में एक से ज्यादा तंत्रिकाएं भी डैमेज हो सकती हैं जिससे और ज्यादा नुकसान बढ़ सकता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।