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Written By: Pallavi Kumari | Published : May 17, 2022 11:09 AM IST
Hormonal factors contribute to the rising incidence of ovarian cancer as well. Similarly, early onset of menstruation or late onset of menopause can also increase the risk of ovarian cancer due to prolonged exposure to estrogen and other hormones. Toxins may also contribute to the development of ovarian cancer. Studies have suggested that prolonged exposure to talcum powder, asbestos, and certain pesticides may increase the risk of ovarian cancer.
ओवेरियन कैंसर (Ovarian cancer in hindi) आज के समय में लगभग हर साल 60 से 65 हजार महिलाओं को हो रहा है। ये महिलाओं में होने वाला सबसे तीसरा सबसे कॉमन कैंसर है। लेकिन अधिकतर महिलाओं में इसे लेकर जानकारी का अभाव होता है, जिसकी वजह से ये बीमारी शुरुआती फेज में पता नहीं चल पाती है और आगे चल कर ये कई बार लाइलाज और जानलेवा बन जाता है। ऐसे में जरूरी ये है कि आप ओवेरियन कैंसर के बारे में सब कुछ जानें। इसलिए हमने डॉ. निरंजन नाइक (Dr. Niranjan Naik), वरिष्ठ सलाहकार, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस ला फेम, नई दिल्ली से बात की जिन्होंने इस बीमारी के बारे में हमें विस्तार से समझाया।
ओवेरियन कैंसरमहिलाओं में अंडाशय (Ovary) से शुरू होता है और डीएनए म्यूजेशन के कारण कैंसर के रूप में बदलता है। दरअसल, अंडाशय का काम एग्स प्रड्यूस करने के साथ हार्मोन प्रड्यूस करने का होता है। जैसे कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन। कुछ स्थितियों में जब शरीर के डीएनए में बदलाव शुरू हो जाता है तो सेल्स में असामान्य म्यूटेशन होता है तो ये ओवेरियन कैंसर का कारण बन सकता है। हालांकि, इसके पीचे कई और कारण भी हो सकते हैं।
-उम्र बढ़ना जैसे कि 45 के बाद या 60 के बाद महिलाओं में इस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
- अगर कैंसर का कोई फैमिली हिस्ट्री हो तो भी लोगों में ये कैंसर तेजी से फैल सकता है। जैसे कि ब्रेस्ट, बच्चेदानी का कैंसर, थायराइड कैंसर, बड़ी आंत का कैंसर
-लिंफ सिंड्रोम
-म्यूटेशन के कारण
-मोटापा जैसे कि अगर किसी की हाइट वेट के हिसाब से मोटापा ज्यादा है तो यह भी ओवेरियन कैंसर का कारण बन सकता है।
-हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने की वजह से इसका रिस्क बढ़ सकता है
- एंड्रियोमेट्रियोसिस के कारण
-पीरियड्स जल्दी शुरू होना या बंद होने की वजह से
-लेट प्रेग्नेंसी के कारण
इसके अलावा कुछ महिलाओं को लगता है पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) वाली महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। जब कि कुछ स्टडी ये बताती है कि पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस होने पर प्रोटेक्टिव तरीके से काम करता है और ऐसी महिलाओं को ओवेरियन कैंसर नहीं होता है।
ओवरियन कैंसर के लक्षणों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। ताकि आप शुरुआत में ही इन्हें पहचान कर जल्द से जल्द अपना इलाज शुरू करवा सकें। जैसे कि
-पेट फूलना और एसिडिटी
-खाने के तुरंत बाद पेट भरा हुआ महसूस करना और ज्यादा खाना ना खा पाना
-लोअर और प्लेविक एरिया में समस्या
-थकावट
-कब्ज की समस्या
-पेट खराब होना
- बार-बार पेशाब लगना
- वजन कम होना
ओवरियन कैंसर के ये लक्षण अगर आपको लंबे समय के लिए नजर आते हैं तो, अपने डॉक्टर के पास जाएं और अपना चेकअप करवाएं। उसके बाद डॉक्टर सीए-125 टेस्ट (ca 125 treatment in hindi) के लिए बताते हैं। साथ ही कई बार पेट का अल्ट्रासांउड, सीटी स्कैन, एमआरआई करते हैं और उसके बाद कैंसर किस स्टेज पर है उस हिसाब से इलाज करते हैं। ज्यादाकर मामलों में सर्जरी जिसमें कि अंडाश्य (ओवरी) निकाल दी जाती है और फिर किमोथेरपी देते हैं।
-रेगुलर चेकअप करवाएं
-कैंसर स्क्रीनिंग करवाएं
-फैमिली हिस्ट्री का खास ध्यान रखें और अगर है तो जेनेटिक टेस्ट करवा सकते हैं जो कि कैंसर, खासकर कि सेल म्यूटेशन होने के खतरा बताता है।
-वजन कंट्रोल करें और हेल्दी वेट रखें।
इस सब के अलावा जैसे कि ये लक्षण शरीर में नजर आने लगे तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। उसके अलावा फिजिकल फिटनेस और संतुलित डाइट जैसे कि प्रोटीन और कार्ब्स के सेवन का ख्याल रखें। साथ ही हमें सकारात्मक सोच रखें।