ऑस्टियोपोरोसिस: कारण, लक्षण, निदान, इलाज और बचाव

osteoporosis causes symptoms treatment and diet in hindi

हड्डियों का कमजोर होना ऑस्टियोपोरोसिस कहलाता है। इस स्थिति में बोन मास डेंसिटी  कम हो जाती है, जिससे हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। बीएमडी लॉस के पहले लेवल को 'ऑस्टियोपेनिया' के रूप में जाना जाता है। यदि समय पर इसका निदान करके इलाज ना शुरू किया जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या है ऑस्टियोपोरोसिस? (what Is Osteoporosis?)

हड्डियों का कमजोर होना ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) कहलाता है। इस स्थिति में बोन मास डेंसिटी (BMD) कम हो जाती है, जिससे हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। बीएमडी लॉस के पहले लेवल को 'ऑस्टियोपेनिया' (osteopenia) के रूप में जाना जाता है। यदि समय पर इसका निदान करके इलाज ना शुरू किया जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। वैसे तो ऑस्टियोपोरोसिस 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक होता है, लेकिन अब यह पुरुषों के साथ ही कम उम्र के लोगों को भी होने लगा है। ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ कैल्शियम की कमी के कारण ही नहीं होता है। महिलाओं में, एस्ट्रोजन बीएमडी लेवल को बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। रजोनिवृत्ति (Post-menopausal) के बाद शरीर में एस्ट्रोजन लेवल कम होने से बीएमडी में तेजी से गिरावट आती है। बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान की आदतें, अनुवांशिकता के साथ ही एक्सरसाइज में कमी ऑस्टियोपोरोसिस होने के मुख्य कारक हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण (causes Of Osteoporosis)

सामान्य हड्डी प्रोटीन, कोलेजन और कैल्शियम से बनी होती है। जब हड्डियां अपनी डेंसिटी खोने लगती हैं और अस्वाभाविक रूप से कमजोर, छेददार (Porous) हो जाती हैं, तो वे अधिक आसानी से संकुचित होती हैं, जिससे उनमें दरार पड़ने (जैसे हिप फ्रैक्चर) या स्पाइनल फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। बीएमडी में कई लेवल पर नुकसान होना शुरू होता है। बीएमडी में नुकसान होने के पहले स्तर को 'ऑस्टियोपेनिया' के रूप में जाना जाता है। इसका इलाज ना करवाया जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर सबसे ज्यादा फ्रैक्चर होने की संभावना पसलियों (Ribs) और कलाइयों में (Wrists) होता है।

ऑस्टियोपोरोसिस होने के मुख्य जोखिम (risk Factors Of Osteoporosis)

ऑस्टियोपोरोसिस को 'भंगुर हड्डियों' (brittle bones) के रूप में भी जाना जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस रोग अब कम उम्र के लोगों में भी आम होता जा रहा है। खराब जीवनशैली, देर तक बैठे रहना, अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स, तनाव आदि इसके रिस्क फैक्टर हैं। अन्य रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं-


  • फिजिकल इनएक्टिविटी

  • कैल्शियम की कमी

  • विटामिन डी की कमी

  • स्मोकिंग करना

  • अधिक शराब का सेवन

  • वजन कम होना

  • रूमेटाइड अर्थराइटिस

  • दवाओं का सेवन (जैसे हेपरिन, प्रेडनिसोन)

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण (symptoms Of Osteoporosis)

ऑस्टियोपोरोसिस को 'साइलेंट किलर' भी कहते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब शुरुआती लेवल पर हड्डियों को नुकसान होना शुरू होता है, तो कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं। आमतौर पर, इस क्लिनिकल ​​स्थिति की तरफ तब तक किसी का ध्यान नहीं जाता है, जब तक कि कोई व्यक्ति फ्रैक्चर से पीड़ित नहीं होता। लेकिन, कुछ दुर्लभ मामलों में इसके लक्षण नजर आ सकते हैं, जो इस प्रकार हैं-

पीठ दर्द (Back pain): ऑस्टियोपोरोसिस में पीठ दर्द आमतौर पर रीढ़ (Spine) के फ्रैक्चर के कारण होता है। इसमें काफी तेज दर्द होता है। इसका कारण यह है कि पीठ के टूटे हुए वर्टेब्रा (Vertebrae) रीढ़ की हड्डी (Spinal cord) से फैली नसों को रेडियल तरीके से चुभते हैं।

बोन फ्रैक्चर (Bone fracture): ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाली सबसे कॉमन लक्षणों में से एक है बोन फ्रैक्चर। इसमें हड्डियां इतनी कमजोर या भुरभुरी हो जाती हैं कि फ्रैक्चर होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है।

झुका हुआ पोस्चर (Stooped posture): कुछ मामलों में, ऑस्टियोपोरोसिस से रीढ़ की हड्डी में हुए फ्रैक्चर के कारण पीठ का ऊपरी हिस्सा आगे की तरफ झुक जाता है, जिससे लंबाई कम लगने लगती है।

ऑस्टियोपोरोसिस का निदान (diagnosis Of Osteoporosis)

ऑस्टियोपोरोसिस का निदान DEXA स्कैन के जरिए किया जाता है। इसे सबसे बेहतरीन टेस्ट कहा जाता है। एक बार डेक्सा टेस्ट में ऑस्टियोपोरोसिस होने का पता लगाता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज (treatment Of Osteoporosis)

1. ऑस्टियोपोरोसिस होने पर फ्रैक्चर हुई हड्डियों का इलाज किया जाता है। इस फ्रैक्चर को ठीक करने में काफी समय लगता है। फ्रैक्चर ठीक होने के बाद भी, उस भाग की हड्डियों को मजबूती देने में लंबा वक्त लग जाता है, ताकि शरीर के वजन और रोजमर्रा की गतिविधियों को आपकी हड्डियां सपोर्ट कर सकें।

2. दवाओं के जरिए हड्डियों में हुई नुकसान को दूर किया जाता है। हड्डियों की ताकत बढ़ाई जाती है। मेनोपॉज के बाद हार्मोन (एस्ट्रोजन) रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) का उपयोग हाल के दिनों में काफी प्रचलित था, लेकिन इस थेरेपी के कुछ नुकसान नजर आने के बाद इसका उपयोग धीरे-धीरे कम कर दिया गया है।

3. दो सर्जिकल विकल्प वर्टेब्रोप्लास्टी (vertebroplasty) और काइफोप्लास्टी (kyphoplasty) हैं, जो रीढ़ की हड्डी के दबाव के कारण होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं। ये सर्जरी 'बोन सीमेंट' का उपयोग करती हैं, जो क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डियों (Vertebrae) में इंजेक्ट किया जाता है, ताकि उन्हें अधिक घना और मजबूत बनाया जा सके।

ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के उपाय (prevention Of Osteoporosis)

ऑस्टियोपोरोसिस को स्वाभाविक रूप से रोकने के तरीके के बारे में नीचे कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं, जिसे अपनाकर काफी हद तक आप हड्डी के इस रोग से बचे रह सकते हैं-


  • प्रतिदिन एक्सरसाइज करें।

  • कैल्शियम का सेवन अधिक करें।

  • विटामिन डी के लिए धूप सेकें।

  • विटामिन के की कमी ना होने दें।

  • मोटापा कम करें।

  • प्लांट एस्ट्रोजेन्स का चुनाव करें।

  • स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन छोड़ दें।

  • तनाव दूर करें।

  • ऑयल मसाज करें।

  • अपनी डायट में तिल शामिल करें।

  • रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं।

ऑस्टियोपोरोसिस में क्या खाएं (osteoporosis Diet)

इलाज के साथ-साथ हेल्दी डायट आपकी हड्डियों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। अपनी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए आपको अपनी डेली डायट में कुछ आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करना होगा। इसके लिए कैल्शियम और विटामिन डी सबसे जरूरी है। शरीर को हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है और कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है। हेल्दी बोन के लिए पोषक तत्वों में प्रोटीन, मैग्नीशियम, विटामिन के और जिंक शामिल करें। आपको अपनी डायट में क्या शामिल करना चाहिए, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। एक अच्छा डायटिशियन आपके लिए एक हेल्दी मील या डायट प्लान तैयार कर सकता है।

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आप अपने स्पाइन को स्वस्थ रखने के लिए अपने आहार में पोषक तत्वों को अवश्य ही शामिल करें। धूम्रपान न करें क्योंकि धूम्रपान से शरीर में कुछ ऐसे रसायन प्रवेश करते हैं जो कि स्पाइन तक जाने वाले रक्तप्रवाह को बाधित करते हैं।

शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी, करना पड़ सकता है गंभीर बीमारियों का सामना

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शरीर के लिए बेहद आवश्यक विटामिन डी और कैल्शियम, एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं यानी शरीर में यदि विटामिन डी की कमी हो जाए तो कैल्शियम की पूर्ति होना भी मुश्किल होता है।

जानें, अर्थराइटिस और आॅस्टियोपोरोसिस बीमारी में क्या अंतर है, हड्डियों के रोग से यूं बचें

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आमतौर पर 50-60 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। अधिकतर लोगों को इसके कारण जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस और आॅस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ऑस्टियोपोरोसिस से महिलाओं को होता है ज्यादा खतरा, जानें बचाव के 5 आसान उपाय

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ज्यादातर महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या मेनोपॉज के बाद ही होती है। आंकड़ों की माने तो विश्वभर में 3 में से एक महिला की 50 के बाद हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस से बढ़ जाता है स्तन कैंसर खतरा, जोर से छींकने भर से भी टूट जाती हैं हड्डियां

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आर्थोपेडिक्स डॉक्टरों का मानना है कि ऑस्टियोपोसिस के कारण हड्डी टूटने की संभावना 50 फीसदी लोगों में होती है।

भारत में लोगों को 1000 की जगह मिलता है 429 मिलीग्राम कैल्शियम

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बुजुर्गो में प्रति वर्ष लगभग 1 प्रतिशत की दर से हड्डियों की क्षति होती रहती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 15 ग्राम कैल्शियम कम हो जाता है।

Menopause की समस्या से निपटने के लिए रहें तैयार, हो सकती हैं हड्डियां कमजोर

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करीब 4 फीसदी महिलाओं को मेनोपॉज 29 से 34 साल की उम्र में हो जाता है। वहीं जीवनशैली में बदलाव के कारण 35 से 39 साल के बीच की महिलाओं का आंकड़ा 8 फीसदी है।

Osteoporosis: ऑस्टियोपोरोसिस में न करें इन 5 आहारों का सेवन photosPhotos

Osteoporosis: ऑस्टियोपोरोसिस में न करें इन 5 आहारों का सेवन

ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हड्डियों से जड़ी एक बीमारी है। इस रोग के होने पर हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्‍चर होने की संभावना बढ़ जाती है।

ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी कहीं आपकी हड्डियां कमजोर तो नहीं, जानें लक्षण, कारण और बचाव photosPhotos

ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी कहीं आपकी हड्डियां कमजोर तो नहीं, जानें लक्षण, कारण और बचाव

ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की ऐसी बीमारी है जो हड्डियों को कमजोर कर देती है. अगर खान-पान और एक्सरसाइज पर ध्यान दिया जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा जा सकता है. जो लोग ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार होते हैं उनकी हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि सामान्य कार्य करते हुए भी हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा रहता है.

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