हड्डियों का कमजोर होना ऑस्टियोपोरोसिस कहलाता है। इस स्थिति में बोन मास डेंसिटी कम हो जाती है, जिससे हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। बीएमडी लॉस के पहले लेवल को 'ऑस्टियोपेनिया' के रूप में जाना जाता है। यदि समय पर इसका निदान करके इलाज ना शुरू किया जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
हड्डियों का कमजोर होना ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) कहलाता है। इस स्थिति में बोन मास डेंसिटी (BMD) कम हो जाती है, जिससे हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। बीएमडी लॉस के पहले लेवल को 'ऑस्टियोपेनिया' (osteopenia) के रूप में जाना जाता है। यदि समय पर इसका निदान करके इलाज ना शुरू किया जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। वैसे तो ऑस्टियोपोरोसिस 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक होता है, लेकिन अब यह पुरुषों के साथ ही कम उम्र के लोगों को भी होने लगा है। ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ कैल्शियम की कमी के कारण ही नहीं होता है। महिलाओं में, एस्ट्रोजन बीएमडी लेवल को बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। रजोनिवृत्ति (Post-menopausal) के बाद शरीर में एस्ट्रोजन लेवल कम होने से बीएमडी में तेजी से गिरावट आती है। बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान की आदतें, अनुवांशिकता के साथ ही एक्सरसाइज में कमी ऑस्टियोपोरोसिस होने के मुख्य कारक हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण (causes Of Osteoporosis)
सामान्य हड्डी प्रोटीन, कोलेजन और कैल्शियम से बनी होती है। जब हड्डियां अपनी डेंसिटी खोने लगती हैं और अस्वाभाविक रूप से कमजोर, छेददार (Porous) हो जाती हैं, तो वे अधिक आसानी से संकुचित होती हैं, जिससे उनमें दरार पड़ने (जैसे हिप फ्रैक्चर) या स्पाइनल फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। बीएमडी में कई लेवल पर नुकसान होना शुरू होता है। बीएमडी में नुकसान होने के पहले स्तर को 'ऑस्टियोपेनिया' के रूप में जाना जाता है। इसका इलाज ना करवाया जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर सबसे ज्यादा फ्रैक्चर होने की संभावना पसलियों (Ribs) और कलाइयों में (Wrists) होता है।
ऑस्टियोपोरोसिस होने के मुख्य जोखिम (risk Factors Of Osteoporosis)
ऑस्टियोपोरोसिस को 'भंगुर हड्डियों' (brittle bones) के रूप में भी जाना जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस रोग अब कम उम्र के लोगों में भी आम होता जा रहा है। खराब जीवनशैली, देर तक बैठे रहना, अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स, तनाव आदि इसके रिस्क फैक्टर हैं। अन्य रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं-
फिजिकल इनएक्टिविटी
कैल्शियम की कमी
विटामिन डी की कमी
स्मोकिंग करना
अधिक शराब का सेवन
वजन कम होना
रूमेटाइड अर्थराइटिस
दवाओं का सेवन (जैसे हेपरिन, प्रेडनिसोन)
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण (symptoms Of Osteoporosis)
ऑस्टियोपोरोसिस को 'साइलेंट किलर' भी कहते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब शुरुआती लेवल पर हड्डियों को नुकसान होना शुरू होता है, तो कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं। आमतौर पर, इस क्लिनिकल स्थिति की तरफ तब तक किसी का ध्यान नहीं जाता है, जब तक कि कोई व्यक्ति फ्रैक्चर से पीड़ित नहीं होता। लेकिन, कुछ दुर्लभ मामलों में इसके लक्षण नजर आ सकते हैं, जो इस प्रकार हैं-
पीठ दर्द (Back pain): ऑस्टियोपोरोसिस में पीठ दर्द आमतौर पर रीढ़ (Spine) के फ्रैक्चर के कारण होता है। इसमें काफी तेज दर्द होता है। इसका कारण यह है कि पीठ के टूटे हुए वर्टेब्रा (Vertebrae) रीढ़ की हड्डी (Spinal cord) से फैली नसों को रेडियल तरीके से चुभते हैं।
बोन फ्रैक्चर (Bone fracture): ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाली सबसे कॉमन लक्षणों में से एक है बोन फ्रैक्चर। इसमें हड्डियां इतनी कमजोर या भुरभुरी हो जाती हैं कि फ्रैक्चर होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है।
झुका हुआ पोस्चर (Stooped posture): कुछ मामलों में, ऑस्टियोपोरोसिस से रीढ़ की हड्डी में हुए फ्रैक्चर के कारण पीठ का ऊपरी हिस्सा आगे की तरफ झुक जाता है, जिससे लंबाई कम लगने लगती है।
ऑस्टियोपोरोसिस का निदान (diagnosis Of Osteoporosis)
ऑस्टियोपोरोसिस का निदान DEXA स्कैन के जरिए किया जाता है। इसे सबसे बेहतरीन टेस्ट कहा जाता है। एक बार डेक्सा टेस्ट में ऑस्टियोपोरोसिस होने का पता लगाता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज (treatment Of Osteoporosis)
1. ऑस्टियोपोरोसिस होने पर फ्रैक्चर हुई हड्डियों का इलाज किया जाता है। इस फ्रैक्चर को ठीक करने में काफी समय लगता है। फ्रैक्चर ठीक होने के बाद भी, उस भाग की हड्डियों को मजबूती देने में लंबा वक्त लग जाता है, ताकि शरीर के वजन और रोजमर्रा की गतिविधियों को आपकी हड्डियां सपोर्ट कर सकें।
2. दवाओं के जरिए हड्डियों में हुई नुकसान को दूर किया जाता है। हड्डियों की ताकत बढ़ाई जाती है। मेनोपॉज के बाद हार्मोन (एस्ट्रोजन) रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) का उपयोग हाल के दिनों में काफी प्रचलित था, लेकिन इस थेरेपी के कुछ नुकसान नजर आने के बाद इसका उपयोग धीरे-धीरे कम कर दिया गया है।
3. दो सर्जिकल विकल्प वर्टेब्रोप्लास्टी (vertebroplasty) और काइफोप्लास्टी (kyphoplasty) हैं, जो रीढ़ की हड्डी के दबाव के कारण होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं। ये सर्जरी 'बोन सीमेंट' का उपयोग करती हैं, जो क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डियों (Vertebrae) में इंजेक्ट किया जाता है, ताकि उन्हें अधिक घना और मजबूत बनाया जा सके।
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के उपाय (prevention Of Osteoporosis)
ऑस्टियोपोरोसिस को स्वाभाविक रूप से रोकने के तरीके के बारे में नीचे कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं, जिसे अपनाकर काफी हद तक आप हड्डी के इस रोग से बचे रह सकते हैं-
प्रतिदिन एक्सरसाइज करें।
कैल्शियम का सेवन अधिक करें।
विटामिन डी के लिए धूप सेकें।
विटामिन के की कमी ना होने दें।
मोटापा कम करें।
प्लांट एस्ट्रोजेन्स का चुनाव करें।
स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन छोड़ दें।
तनाव दूर करें।
ऑयल मसाज करें।
अपनी डायट में तिल शामिल करें।
रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं।
ऑस्टियोपोरोसिस में क्या खाएं (osteoporosis Diet)
इलाज के साथ-साथ हेल्दी डायट आपकी हड्डियों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। अपनी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए आपको अपनी डेली डायट में कुछ आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करना होगा। इसके लिए कैल्शियम और विटामिन डी सबसे जरूरी है। शरीर को हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है और कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है। हेल्दी बोन के लिए पोषक तत्वों में प्रोटीन, मैग्नीशियम, विटामिन के और जिंक शामिल करें। आपको अपनी डायट में क्या शामिल करना चाहिए, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। एक अच्छा डायटिशियन आपके लिए एक हेल्दी मील या डायट प्लान तैयार कर सकता है।
More From ऑस्टियोपोरोसिस: कारण, लक्षण, निदान, इलाज और बचाव
Vitamin d and Calcium for Strong Bone: बुढ़ापे में पैरों में दर्द होना सबसे आम परेशानियों में से एक है, लेकिन अब यह परेशानी कम उम्र में भी होने लगी है। ऐसा हड्डियों के कमजोर होने के कारण होता है।
World Osteoporosis Day 2022: ऑस्टियोपोरोसिस को नियंत्रित रखने व हड्डियों को मजबूत करने के लिए जहां उन खाद्य पदार्थों की पहचान जरूरी है जो हड्डियों के लिए फायदेमंद हैं; वहीं यह भी आवश्यक है कि उन पदार्थों से बचा जाए जो हड्डियों के लिए नुकसानदायक हैं।
आज (20 अक्टूबर) 'वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे 2021' है। वयस्कों के साथ आज बच्चों में भी हड्डियों की ये समस्या हो रही है। अपोलो हॉस्पिटल्स (नई दिल्ली) के सीनियर कन्सलटेन्ट आर्थोपेडिक्स, जॉइन्ट रिप्लेसमेंट एंड स्पाइन डॉ. यश गुलाटी बता रहे हैं बच्चों में ऑस्टियोपोरोसिस होने के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में विस्तार से....
ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हड्डियों से जड़ी एक बीमारी है। इस रोग के होने पर हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है।
ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हड्डियों से जड़ी एक बीमारी है। इस रोग के होने पर हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि आपको भी हर दिन एल्कोहल के सेवन की लत लगी हुई है, तो साइंस के अनुसार, इसके शरीर पर होने वाले इन 5 बड़े नुकसानों (Side Effects of Alchohol) को भी जरूर जान लें....
ज्यादातर लोग जैतून के तेल (Olive oil) का इस्तेमाल सलाद, सब्जी के साथ ही बालों व त्वचा को हेल्दी रखने के लिए करते हैं। लेकिन जैतून के फल खासकर काले जैतून (Black olive) के सेवन से आप कई गंभीर रोगों से बचे रह सकते हैं।
मनुष्य के संपूर्ण स्वास्थ्य में हड्डियों के बेहतर स्वास्थ्य की प्रमुख भूमिका होती है, लेकिन हड्डियों से संबंधित रोग चिंता का विषय बने हुए हैं। इन्हीं में से एक है ऑस्टियोपोरोसिस। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 50 वर्ष या इससे अधिक उम्र के हर तीन में से एक स्त्री व हर पांच में से एक पुरुष ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर से ग्रसित होंगे। जानें कैसे कम किया जा सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा।
एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) के कारण प्रत्येक वर्ष 89 लाख से अधिक फ्रैक्चर होते हैं। 20 अक्टूबर को पूरी दुनिया में ओस्टियोपोरोसिस के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 'वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे 2020' मनाया जाता है। जानें, इस बीमारी के लक्षण, कारण...
अगर आप हर दिन योग का अभ्यास करते हैं तो आपको अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। यहां तक कि विज्ञान भी इस दावे का समर्थन करता है कि हर दिन योग का अभ्यास करने से फ्रैक्चर को रोकने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। लेख में जानें ऐसे 4 योगासन के बारे में जो आपको हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
जो लोग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हैं उन्हें फ्रैक्चर का अनुभव होने का खतरा बढ़ जाता है। अफसोस की बात है कि ऑस्टियोपोरोसिस का कोई इलाज नहीं है। लेकिन, संतुलित डाइट लेकर और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर आप इस रोग के खतरे को कम कर अपनी हड्डियों को मजबूत कर सकते हैं। यहां, हम आपको कुछ आवश्यक पोषक तत्वों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें डाइट में शामिल करने से हड्डियों को टूटने से बचाया जा सकता है और नई हड्डी के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
हड्डियों के कमजोर होने का मुख्य कारण कैल्शियम और विटामिन डी की कमी को माना जाता है. 30 साल की उम्र के बाद बोन डेनसिटी अर्थात हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है. उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टोपोरियोसिस का खतरा भी बढ़ता जाता है. ऑस्टोपोरियोसिस की वजह से हड्डियां टूटती हैं. हड्डियों को टूटने से बचाने के लिए नियमित तौर एक्सरसाइज या व्यायाम करना चाहिए और कैल्शियम व विटामिन डी वाले फूड का सेवन करना चाहिए.
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की ऐसी बीमारी है जो हड्डियों को कमजोर कर देती है. अगर खान-पान और एक्सरसाइज पर ध्यान दिया जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा जा सकता है. जो लोग ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार होते हैं उनकी हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि सामान्य कार्य करते हुए भी हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा रहता है.
''वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे'' (World Osteoporosis Day 2019) प्रत्येक वर्ष 20 अक्टूबर को ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम, निदान और उपचार के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
एक अनुमान के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस दुनिया भर में 20 करोड़ महिलाओं को प्रभावित करता है, जिनमें लगभग 10 में से एक महिला की उम्र 60 साल, पांच में से एक महिला की उम्र 70 साल, पांच में से दो महिला की उम्र 80 साल और दो तिहाई महिलाएं 90 साल की होती हैं। ''वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे'' पर जानें क्या है ऑस्टियोपोरोसिस, इसके लक्षण और कारण...
आप अपने स्पाइन को स्वस्थ रखने के लिए अपने आहार में पोषक तत्वों को अवश्य ही शामिल करें। धूम्रपान न करें क्योंकि धूम्रपान से शरीर में कुछ ऐसे रसायन प्रवेश करते हैं जो कि स्पाइन तक जाने वाले रक्तप्रवाह को बाधित करते हैं।
शरीर के लिए बेहद आवश्यक विटामिन डी और कैल्शियम, एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं यानी शरीर में यदि विटामिन डी की कमी हो जाए तो कैल्शियम की पूर्ति होना भी मुश्किल होता है।
आमतौर पर 50-60 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। अधिकतर लोगों को इसके कारण जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस और आॅस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ज्यादातर महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या मेनोपॉज के बाद ही होती है। आंकड़ों की माने तो विश्वभर में 3 में से एक महिला की 50 के बाद हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.