जानलेवा भी हो सकती है हड्डियों की कमजोरी, जानें ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में

हड्डियां कमजोर होना कई बार किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है और इसके बारे में हर किसी को पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। इस लेख में हम ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से इस समस्या के बारे में कुछ खास जानकारियां लेने वाले हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : June 8, 2026 10:49 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Kamal Bachani

हड्डियां हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं और इनका कमजोर होना मतलब एक तरह से पूरी शरीर का ही कमजोर पड़ जाना है। लेकिन आजकल लोगों में हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं आमतौर पर देखी जाने लगी हैं, हड्डियों में कमजोरी पैदा करने वाले कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं जिनमें कुछ सामान्य हैं तो कुछ असामान्य भी हैं। बढ़ती उम्र, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, धूप का पर्याप्त संपर्क न मिलना तथा कैल्शियम और विटामिन-D की कमी आदि कुछ प्रमुख कारण हैं जिनके कारण हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं। डॉ. कमल बचानी, सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं आर्थ्रोस्कोपिक सर्जन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के अनुसार चिंता की बात यह है कि ऑस्टियोपोरोसिस को "साइलेंट डिजीज" कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत

ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती संकेतों का कई बार पता नहीं चल पाता है और अक्सर पहला संकेत सीधे फ्रैक्चर के रूप में सामने आता है, जो गंभीर विकलांगता और कभी-कभी जानलेवा जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ शुरुआती संकेत इस तरह के होते हैं -

  • लगातार कमर या पीठ दर्द - बहुत से लोग पीठ या कमर के दर्द को केवल थकान, लंबे समय तक बैठने या उम्र बढ़ने का असर मान लेते हैं। लेकिन कई बार यह हड्डियों के कमजोर होने का शुरुआती संकेत हो सकता है। रीढ़ की हड्डियां कमजोर होने लगे तो उन पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे लगातार दर्द व जकड़न महसूस हो सकती है। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे और आराम के बावजूद ठीक न हो, तो डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी होती है।
  • मामूली चोट में भी फ्रैक्चर - यदि हल्की ठोकर, फिसलने या आमतौर पर गिर जाने के कारण भी हड्डी टूट जाए या फिर दरार (हेयरलाइन फ्रैक्चर) आ जाए तो यह कोई सामान्य संकेत नहीं होता है। मजबूत हड्डियां सामान्य झटकों को सहन कर लेती हैं। बार-बार फ्रैक्चर होना या मामूली चोट में हड्डी को नुकसान पहुंचना बोन डेंसिटी कम होने का संकेत हो सकता है।
  • लंबाई कम होना या शरीर का झुकना - उम्र के साथ कद में कमी या झुककर चलना कई लोग सामान्य मान लेते हैं, लेकिन यह रीढ़ की हड्डियों में कमजोरी का परिणाम भी हो सकता है। जब रीढ़ की छोटी-छोटी हड्डियां दबने लगती हैं, तो व्यक्ति की लंबाई धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके साथ कंधों का झुकना और आगे की ओर झुककर चलना भी इस समस्या का ही संकेत है।
  • दांत और मसूड़ों की बढ़ती समस्याएं - हड्डियों की कमजोरी का असर केवल हाथ-पैर या रीढ़ तक सीमित नहीं रहती बल्कि इससे आपके जबड़े की हड्डियां भी प्रभावित हो सकती हैं। यदि दांत हिलने लगें, मसूड़ों से जुड़ी समस्याएं होने लगें या फिर दांतों की पकड़ कमजोर हो जाए तो यह भी कमजोर हड्डियों या कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा

ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा वैसे तो 50 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र वाले लोगों को ज्यादा होता है, इसके अलावा मेनोपॉज के बाद की महिलाएं, धूम्रपान करने वाले लोग, लंबे समय से स्टेरॉय दवाएं ले रहे लोग या फिर जो लोग डाइट में कैल्शियम व विटामिन-डी कम लेते हैं उनमें भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरे ज्यादा हो सकता है। हड्डियों की कमजोरी होना कुछ मामलों में जेनेटिक कंडीशन भी हो सकती है। इसके डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर जैसी क्रोनिक बीमारियों से ग्रस्त लोगों में भी इस समस्या का खतरा ज्यादा हो सकता है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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