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Written By: Anshumala | Updated : August 13, 2021 2:03 AM IST
Image credits by: कब और किन अंगों को कर सकते हैं दान?
Organ Donation Day 2021 in Hindi: 'ऑर्गन डोनेशन डे 2021' प्रत्येक वर्ष 13 अगस्त को पूरी दुनिया में सेलिब्रेट किया जाता है। अंग दान के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ही 'विश्व अंग दान दिवस' मनाया जाता है। यह दिन अंग दान के स्वैच्छिक कार्य के महत्व पर जोर देता है। अंग दान के जरिए दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। अंग दान किसी जीवित दाता (Living Donor) या किसी ऐसे दाता (Donor) से हो सकता है, जिसकी ब्रेन डेथ हो चुकी हो। ब्रेन डेथ तब होता है, जब सड़क दुर्घटना में सिर में चोट लग जाए या फिर मस्तिष्क में गंभीर रूप से चोट लगने के कारण रक्त वाहिका से बहुत ज्यादा रक्तस्राव हो। इस स्थिति में मस्तिष्क को अपरिवर्तनीय और स्थायी क्षति होती है, जो ब्रेन डेथ (Brain death) का कारण बनता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मस्तिष्क पूरे शरीर के लिए नियंत्रण केंद्र के रूप में काम करता है। ऐसे में अगर मस्तिष्क अपना काम करना बंद कर दे, तो पूरा शरीर काम करना बंद कर देगा। हालांकि, कुछ मेडिकल टेस्ट के जरिए ब्रेन डेथ का निदान किया जा सकता है। उसके बाद कानूनी रूप से ये घोषणा करनी होती है कि मरीज का मस्तिष्क पहले ही मर चुका है, जिसके बाद प्रत्यारोपण (transplantation) की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की जरूरत होती है। 'ऑर्गन डोनेशन डे 2021' पर अंग दान करने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं फोर्टिस हॉस्पिटल (नोएडा) के एडिशनल डायरेक्टर, हेपेटोलॉजी डॉ. मुकुल रस्तोगी....
अंग दान करने का मतलब है कि आप किसी जरूरतमंद को एक नई जिंदगी दे रहे हैं। कोई भी अपनी धर्म, जाति, उम्र के बावजूद अंग दान करने के लिए वॉलंटियर बन सकता है। अंग दान करते समय इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि डोनर किसी भी क्रोनिक डिजीज जैसे कैंसर, एचआईवी, फेफड़े या फिर हार्ट डिजीज से ग्रस्त ना हो। 18 वर्ष की उम्र के बाद कोई भी अंग डोनेट करने के लिए साइन कर सकता है। जीवित दाता (Living Donors) अपने कुछ अंगों (organs) और ऊतकों (Tissues) को दान कर सकते हैं जैसे कि किडनी या फिर लिवर, अग्न्याशय (pancreas), फेफड़े या फिर आंतों का हिस्सा, लेकिन अधिकांश दान डोनर की मृत्यु के बाद ही होता है।
आमतौर पर, जिन अंगों को प्रत्यारोपित (transplanted) किया जा सकता है, वे हैं- किडनी, हार्ट, लिवर, अग्न्याशय, आंत, फेफड़े, हड्डियां, अस्थि मज्जा, त्वचा और कॉर्निया। ऐसा अनुमान है कि अंगों की अनुपलब्धता के कारण लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में अपनी जान गंवा देते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी लोग अपने अंग दान करने में हिचकिचाते हैं और इसलिए ट्रांसप्लांट की संख्या और उपलब्ध अंगों के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है। यह पूरी प्रक्रिया डोनर की निश्चित चिकित्सा स्थिति पर निर्भर करती है। आंकड़ों के अनुसार, एक अंग दाता जिसके अंग अच्छी तरह से काम कर रहे हों, वे अपने जीवनकाल में 8 से अधिक लोगों को अंग दान करके उनकी जान बचाने की क्षमता रखता है।
कोरोनावायरस महामारी ने सभी देशों में अंग दान और ट्रांसप्लांटेशन को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। यूके, फ्रांस और यूएस में ट्रांसप्लांट एक्टिविटी में 50% से अधिक की कमी आई है। इसका मुख्या कारण है अंगों, मेडिकल टीम्स और मरीजों के ट्रांसपोर्टेशन में बाधा आने के साथ ही ट्रांसप्लांट सुविधाओं को कोविड हॉस्पिटल में बदलने में समस्या डॉक्टर्स और रोगियों दोनों के लिए एक चिंता का विषय बन गया है। चूंकि, सभी हॉस्पिटल्स में कोरोना के मरीज हैं। ऐसे में ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद कोविड-19 इंफेक्शन होने के डर से मरीज ट्रांसप्लांटेशन कराने से हिचक रहे हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि डायलिसिस यूनिट, आईसीयू, सीसीयू जैसे स्ट्रैटेजिक एरिया में हॉस्पिटल में कोरोना महामारी के दौरान ट्रांसप्लांट डाटा प्रदर्शित करके रोगियों के बीच कोरोना काल में ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं की सुरक्षा के बारे में जागरूकता पैदा की जाए।
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