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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने हाल ही में जिक्र किया है कि संगठन कोविड वेरिएंट ओमिक्रोन के सब वेरिएंट का पता लगा रहा है, जिसमें बीए.1, बीए.1.1, बीए.2 और बीए.3 शामिल है। वैश्विक स्वास्थ्य इकाई दुनिया भर से असल डेटा जुटा रही है फिर चाहे वो एक्सपेरिमेंट के रूप में ही क्यों न किया गया हो। ऐसा कहा जा रहा है कि ये ओमिक्रोन सबवेरिएंट्स कुछ हालात में जरूरत से ज्यादा गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। आइए जानते हैं कितना घातक हो सकता है ओमिक्रोन का सब वेरिएंट बीए.3 और क्या वाकई में है ये अधिक संक्रामक।
हम सभी जानते हैं कि कोविड के इस नए वेरिएंट ओमिक्रोन के दो सबसे प्रभावी सब वेरिएंट हमारे सामने हैं, जो कि बीए.1 और बीए.2 शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इन दो सब वेरिएंट्स के अलावा वह बीए.3 नाम के सब वेरिएंट का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इससे होने वाली गंभीर बीमारी से जुड़े असल आंकड़ों का पता लगाया जा सके।
डब्लूएचओ की शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ मारिया वेन केरखोव का कहना है कि ओमिक्रोन अभी भी वेरिएंट ऑफ कंसर्न बना हुआ है और डब्लूएचओ ओमिक्रोन के दूसरे सब वेरिएंट का पता लगाने की कोशिश में जुटा हुआ है। दुनियाभर में अभी तक बीए.1, बीए.1.1 और बीए.2 जैसे सबसे प्रभावी वेरिएंट हैं लेकिन बीए.3 और दूसरे सब वेरिएंट का खतरा अभी तक टला नहीं है।
बोत्सवाना में नवंबर 2021 में ओमिक्रोन के सामने आने के बाद डब्लूएचओ ने इसे पांचवा वेरिएंट ऑफ कंसर्नकरार दिया था। संस्थान ने पाया था कि ओमिक्रोन कोविड का अभी तक का सबसे ज्यादा बार म्यूटेशन होने वाला वेरिएंट है, जो 8 जनवरी तक करीब 150 से ज्यादा देशों में फैल चुका था। ओमिक्रोम के तीन सब वेरिएंट हैं बीए.1, बीए.2 और बीए.3 है। अध्ययन में पाया गया कि बीए.1 और बीए.2 के स्पाइक प्रोटीन दोनों अलग-अलग हैं लेकिन बीए.3 के स्पाइक प्रोटीन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, बीए.3 में बीए.1 और बीए.2 स्पाइक प्रोटीन के म्यूटेशन का मिश्रण है।
अध्ययन में पाया गया है कि बीए.3 के स्पाइक प्रोटीन में करीब 33 म्यूटेशन हैं, जबकि बीए.1 में 31 म्यूटेशन देखे गए हैं। अध्ययन में ये पाया गया है कि बीए.3 में दूसरे वेरिएंट के मुकाबले सबसे कम मामले सामने आए हैं। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि बीए.3 सब वेरिएंट उतनी तेजी से नहीं फैलता है और बीए.1 से 6 म्यूटेशन कम और बीए.2 से 2 म्यूटेशन कम होने के कारण इसके मामले काफी कम सामने आ रहे हैं।
ये तीनों वेरिएंट एक ही समय पर पाए गए हैं और उन्हीं जगह से जैसे बीए.1 बोत्सवाना से, बीए.2 दक्षिण अफ्रीका से और बीए.3 दक्षिणी पश्चिमी अफ्रीका से। अध्ययन के मुताबिक, ये कहना गलत नहीं होगा कि ये वेरिएंट एक के बाद एक सामने आ रहे हैं और इनके फैलने की संभावना भी समान ही है।