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भारत में गंभीर रूप से बढ़ रहा है मोटापा, बढ़ते वजन पर काबू नहीं किया तो हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापे को स्वास्थ्य के 10 मुख्य जोखिमों में से एक बताया है। यह स्थिति शहरी भारत की महिलाओं में आम है। 23 फीसदी से अधिक महिलाएं या तो ओबेसिटी की शिकार हैं या उनका वजन सामान्य से कम है।

ओबेसिटी यानी मोटापे की समस्या दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। आज यह विश्वस्तरीय संकट का रूप ले चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापे को स्वास्थ्य के 10 मुख्य जोखिमों में से एक बताया है। यह स्थिति शहरी भारत की महिलाओं में आम है। 23 फीसदी से अधिक महिलाएं या तो ओबेसिटी का शिकार हैं या उनका वजन सामान्य से कम है। यह दर पुरुषों (20 फीसदी) की तुलना में अधिक है। गतिहीन जीवनशैली आज इसका मुख्य कारण बन चुकी है, क्योंकि आजकल काम के दौरान लोगों को घंटो एक ही जगह पर बैठे रहना पड़ता है।

ओबेसिटी के बढ़ते खतरे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए नोएडा स्थित जेपी हाॅस्पिटल ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें आम जनता को मोटापे के कारण, रोकथाम तथा पोषण एवं व्यायाम की जरूरतों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों और डाॅक्टरों ने बताया कि रोकथाम उपचार से बेहतर है। उन्होंने यह भी बताया कि रोकथाम के लिए जागरूकता होना बेहद जरूरी है। मोटापा कम करना है, तो रोज करें ये दो योग मुद्रा

खतरनाक रूप से बढ़ रहा है मोटापा

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मोटापे के बारे में बात करते हुए जेपी हाॅस्पिटल  के डिपार्टमेन्ट ऑफ जीआई एंड हेपेटोपेन्क्रिएटोबाइलरी सर्जरी के डायरेक्टर डाॅ. राजेश कपूर ने कहा, ‘‘भारत में ओबेसिटी 21वीं सदी में महामारी का रूप ले चुकी है। देश की 5 फीसदी आबादी गंभीर मोटापे की शिकार हैं। भारत में मोटापे की समस्या आज चीन और यूएस के आंकड़ों को भी पार कर चुकी है। भारत मधुमेह की दृष्टि से दुनिया की राजधानी बन चुका है। मोटापे के बढ़ते मामलों के साथ आने वाले समय में हमारे देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या और बढ़ती चली जाएगी, जिससे स्वास्थ्यसेवा उद्योग पर बोझ बढ़ेगा।

बढ़ते मोटापे का मुख्य कारण

इसका कारण विभिन्न समुदायों में अलग-अलग है। मोटापे के सबसे मुख्य कारण हैं खाने-पीने की गलत आदतें, गतिहीन जीवनशैली, नींद की कमी और तनाव आदि है। शारीरिक व्यायाम की कमी और सुस्ती के चलते भारत में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

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क्या होता है शरीर पर मोटापे का असर

ओबेसिटी के कारण शरीर में कुछ हाॅर्मोन और अतिरिक्त वसा का निर्माण होने लगता है जो कई तरह की बीमारियों जैसे डायबिटीज मेलिटस, उच्च रक्तचाप, डिसलिपिडेमिया, ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया, प्राइमरी स्टर्लिटी आदि का कारण हो सकते हैं। इनसे दिल की बीमारियों (हार्ट अटैक, स्ट्रोक) और कई प्रकार के कैंसर (स्तन, अंडाश्य, गर्भाश्य, अग्नाश्य) तथा गुर्दा रोगों की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को मोटापे और इसके बुरे प्रभावों के बारे में जागरूक बनाना जरूरी है।

सर्जिकल प्रॉसेस से वजन कम करना

सर्जिकल प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डाॅ. कपूर ने कहा, ‘‘यह सर्जरी दो प्रकार की होती हैः रेस्ट्रिक्टिव, जिसमें पेट के आकार को कम किया जाता है ताकि आपका आहार कम हो जाए। रेस्ट्रिक्टिव ओर मैलएब्ज़ाब्र्टिव- इसमें पेट के आकार के साथ-साथ हम छोटी आंत एवं अन्य हिस्सों का आकार भी कम करते हैं ताकि शरीर के द्वारा भोजन के अवशोषण की मात्रा भी सीमित हो जाए। इससे न केवल वजन कम होता है बल्कि हाॅर्मोन्स में भी बदलाव आता है जिससे मरीज अपने वजन को सामान्य बनाए रख सकता है और अपने आप को बीमारियों से बचा सकता है। हालांकि सक्रिय जीवनशैली, खाने-पीने की सेहतमंद आदतों और नियमित व्यायाम जैसे योग, एरोबिक्स और तैराकी के द्वारा शुरुआती अवस्था में वजन कम करने में मदद मिलती है।’’

पोषक पदार्थों का करें सेवन

सेहतमंद आहार के महत्व पर बात करते हुए जेपी हाॅस्पिटल की बेरिएट्रिक काउन्सलर एवं न्यूट्रिशनिस्ट श्रुति शर्मा ने कहा, ‘‘कम कैलोरी एवं पोषक पदार्थों से युक्त आहार का सेवन करने से वजन घटाने में मदद मिलती है। सेहतमंद भारतीय आहार में दालें, अनाज, सब्जियां, फल, सेहतमंद वसाएं, डेयरी उत्पाद और मसाले शामिल हैं। किसी भी स्नैक्स का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि इसमें चीनी की मात्रा कम हो और पोषक पदार्थ अधिक मात्रा में हों। पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें तथा चीनी से युक्त पेय पदार्थों जैसे फलों के रस और साॅफ्ट ड्रिंक्स का सेवन सीमित मात्रा में करें।’’

स्रोत: प्रेस रिलीज

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