
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Updated : May 3, 2026 11:09 AM IST
Image credits by: asthma- ai generated
आज के समय में अस्थमा कोई ऐसी बीमारी नहीं रही जो बहुत ही कम लोगों को हो, बल्कि यह आज बहुत ही सामान्य और लाइफस्टाइल के साथ बढ़ती बीमारी बन गई है। आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें अस्थमा के बारे में सही व पूरी जानकारी नहीं है, यही कारण है कि लोगों को जागरूक बनाने के लिए हर साल 5 मई को वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया जाता है। और इसलिए हम भी आपको एक स्टडी के माध्यम के इस विषय पर विस्तार से बताने वाले हैं।
एक स्टडी में बताया गया है कि मोटापा और इंसुलिन रेसिस्टेंस न सिर्फ मेटाबॉलिज्म हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि यह अस्थमा होने के खतरे को भी बढ़ता है। सरल शब्दों में कहें तो बढ़ा हुआ वजन और इंसुलिन का सही से काम न करना , ये दोनों अस्थमा होने के चांसेस को बढ़ा देते हैं। लेकिन कैसे? आइए इसे विस्तार से जानें।
मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस से अस्थमा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मोटापा, अस्थमा के खतरे से जुड़ा होता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति में मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस, दोनों मिल जाए तो अस्थमा का खतरा ज्यादा हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, जिन मोटे लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस का स्तर ज्यादा था, उनमें अस्थमा का जोखिम ज्यादा रहता है।
दरअसल, इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से शरीर में सूजन बढ़ जाती है। इससे वायुमार्ग ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं और सांस की नलियों में सूजन बढ़ जाती है। इससे अस्थमा रोग विकसित हो सकते हैं और इसके लक्षण बिगड़ सकते हैं।
जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन का सही तरीके से जवाब नहीं देती है, तो उसी स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। यह अक्सर वजन बढ़ने, पेट पर चर्बी जमा होने और डायबिटीज से जुड़ी होती है।
रिसर्च के अनुसार, मोटापा बच्चों और वयस्कों, दोनों में गंभीर अस्थमा का खतरा बढ़ा सकता है। मोटापा अस्थमा फेनोटाइप का एक कारण बन सकता है। मोटापे की वजह से स्टेरॉइड दवाइयों का असर कम होता है और वायुमार्ग में सूजन हो सकती है। अगर सही डाइट और फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दिया जाए, तो मोटापा और अस्थमा के जोखिम को कम किया जा सकता है।
अस्थमा सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की मेटाबॉलिक हेल्थ से भी जुड़ा हो सकता है। एक रिसर्च में सामने आया है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से अस्थमा रोगियों में फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से घट सकती है। इतना ही नहीं, दवाइयों का असर भी कम हो सकता है। यह रिसर्च 307 अस्थमा मरीजों पर की गई, जिसमें लगभग 46 फीसदी लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन अस्थमा मरीजों में इंसुलिन रेजिस्टेंस है, उनमें फेफड़ों की क्षमता तेजी से कम हो रही है और दवाइयां भी कम असर कर रही थी। यानी इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर अस्थमा की बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
डिस्क्लेमर- जिन लोगों को पहले से अस्थमा की बीमारी हो, साथ ही ब्लड शुगर या उनका वजन ज्यादा हो, तो लाइफस्टाइल में सुधार करना चाहिए। नियमित दवाइयां लें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार चेकअप कराएं और किसी भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल मदद लें।
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