भारत में 31% लोगों को है हाई BP, हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा सकती है यह कंडीशन, जानें क्या है एक्सपर्ट की सलाह

वॉकहार्ट हॉस्पिटल द्वारा किए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण से यह सामने आया कि अधिकांश प्रतिभागी नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच नहीं करते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 30, 2024 12:45 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Anup Taksande

वर्ल्ड हार्ट डे दिवस के अवसर पर किए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया, जिसमें चिंताजनक परिणाम सामने आए। इस सर्वे में पाया गया कि बहुत से लोग नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल का लेवल और शरीर में लिक्विड का स्तर चेक नहीं करते हैं। इसी तरह लोग अपनी शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान नहीं देते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं में बढ़ते दिल के दौरे और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के मामलों को देखते हुए, इन  स्वास्थ्य मापदंडों की नियमित निगरानी करना और 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित कार्डियक स्क्रीनिंग हृदय संबंधी समस्याओं को रोकने में मदद कर सकती है और जोखिम को काफी कम कर सकती है।

वॉकहार्ट अस्पताल, मीरा रोड द्वारा किए गए इस ऑनलाइन सर्वेक्षण में 547 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें 20 से 75 वर्ष की आयु के पुरुष और महिलाएं शामिल थे। सर्वे मे पाया गया कि,

  • 152 लोगों में से 100 ने शायद ही कभी अपना ब्लड प्रेशर चेक किया, जबकि 52 लोग इसे नियमित रूप से मापते थे।
  • 103 लोगों में से 64 ने अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर की जांच नहीं की, जबकि 39 लोग इसे नियमित रूप से ट्रैक करते थे।
  • 115 प्रतिभागियों में से 66 लोग हफ्ते में एक बार से भी कम एक्सरसाइज करते थे, जबकि 49 लोग सप्ताह में तीन से अधिक बार कसरत करते थे।
  •  177 लोगों में से 90 लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते थे और दिन में 8 गिलास से कम पानी पीते थे, जबकि 87 लोग 8 गिलास से अधिक पानी पीते थे।

यह सर्वे हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल चेक करने की जरूरत को स्पष्ट करता है।

हाई ब्लड प्रेशर बन सकता है हार्ट अटैक का कारण

डॉ. अनुप आर. ताकसांडे (वॉकहार्ट अस्पताल, मीरा रोड के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट) ने कहा,  "हाइपरटेंशन एक साइलेंट किलर है और लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर दिल का दौरा, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज का कारण बन सकता है। हाई ब्लड प्रेशर से नसों के अंदर  तनाव बनता है। इससे एंडोथेलियम (रक्त वाहिकाओं के अंदर की परत) को नुकसान पहुंचाता है, जिससे धमनियों में चोट लगने और प्लाक बनने का खतरा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, यदि 100 लोगों में से 30 को हाइपरटेंशन का पता चलता है, तो उनमें से केवल 30% लोग ही नियमित दवा लेते हैं और अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं। इसका मतलब है कि 100 में से केवल 3 लोग ही ब्लड प्रेशर को ठीक से नियंत्रित कर पाते हैं।”

 कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है हार्ट डिजिजेज का रिस्क

डॉ. अनुप ताकसांडे ने आगे कहा, "धमनियों में उच्च कोलेस्ट्रॉल प्लाक जमा करता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। जिन लोगों के परिवार में हाइपरटेंशन और कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए और आवश्यक उपाय करने चाहिए। ब्लड प्रेशर चेकअप, कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट और 30 वर्ष की आयु के बाद हर साल कार्डियक स्क्रीनिंग आवश्यक है। पर्याप्त पानी पीना और सप्ताह में पाँच बार 45 मिनट के लिए व्यायाम करना भी हृदय के लिए फायदेमंद होगा।”

बीपी लेवल अंडर कंट्रोल रखना क्यों है फायदेमंद

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी पहली रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत की आधी हाइपरटेंसिव आबादी अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर लेती है, तो 2040 तक भारत में 4.6 मिलियन मौतों को रोका जा सकता है। यह रिपोर्ट बताती है कि देश की 31 प्रतिशत आबादी यानी 188.3 मिलियन लोग वर्तमान में इस स्थिति से जूझ रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर (140/90 mmHg या अधिक) से स्ट्रोक, दिल का दौरा,हार्ट फेलियर, किडनी को डैमेज पहुंचने जैसी कई हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं, लेकिन इसे रोका जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, केवल 37 प्रतिशत भारतीयों में हाइपरटेंशन का निदान किया जाता है और केवल 30 प्रतिशत का इलाज होता है। वर्तमान में, भारत में केवल 15 प्रतिशत हाइपरटेंशन के मरीज़ों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश में हृदय संबंधी बीमारियों, जैसे दिल का दौरा, से होने वाली सभी मौतों में से आधी (52 प्रतिशत) मौतें उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के कारण होती हैं।

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