सिर्फ फेफड़े और दिल ही नहीं बल्कि स्किन भी खतरे में, Pathologist ने बताया कौनसे टेस्ट कराते रहना चाहिए

Air Pollution Effects on The Skin: बढ़ता एयर पॉल्यूशन आपकी हेल्थ को नुकसान पहुंचात है यह तो सबको पता है, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि यह आपकी स्किन को भी नुकसान पहुंचा रहा होता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : January 29, 2026 5:24 PM IST

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Medically Verified By: Tanish Mandal

How Does Air Pollution Affect Your Skin Health: बढ़ता पॉल्यूशन भारत में अब एक बड़ा हेल्थ कन्सर्न बनता जा रहा है, अब धीरे-धीरे सबको समझ आ रहा है कि इतनी ज्यादा खराब हवा आपके शरीर के अंदर जाकर क्या-क्या नुकसान पहुंचा सकती है। अब तक लोगों को यही पता था कि वायु प्रदूषण हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन अब धीरे-धीरे समझ में आ रहा है कि वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को नहीं बल्कि इसके साथ-साथ हमारे दिल, दिमाग और यहां तक कि हमारी स्किन को भी नुकसान पहुंचा रहा है। सरल शब्दों में कहें तो अगर आप दिल्ली जैसे किसी प्रदूषित शहर में रहते हैं, तो आपके फेफड़े, दिल और दिमाग ही नहीं बल्कि आपकी स्किन भी खराब हो रही है और स्किन से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। इसलिए समय पर कुछ जरूरी जांचें करवा लेने से शरीर में हो रहे शुरुआती नुकसान का पता चल सकता है और बिना देर किए इलाज शुरू किया जा सकता है।

प्रदूषण के कण डैमेज कर रहे स्किन

प्रदूषित हवा में मौजूद बहुत छोटे कण, जैसे धूल, धुआं और रासायनिक प्रदूषक, हमारे शरीर के अंदर जा सकते हैं। ये कण फेफड़ों, दिल और यहां तक कि त्वचा को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इनके संपर्क में आने से खांसी, सांस फूलना, थकान, त्वचा में जलन और समय से पहले बुढ़ापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इलाज से बेहतर बचाव को माना जाता है और इसलिए समय-समय पर डॉक्टर सेकुछ जरूरी जांच करवाते रहें ताकि ऐसी बीमारियो का खतरा काफी हद तक कम हो जाए।

स्वास्थ्य को वायु प्रदूषण का असर

जैसे ही सांस लेते समय वायु प्रदूषण के हानिकारक कण सांस की नलियों के माध्यम से शरीर के अंदर जाते हैं, वैसे-वैसे सांस की नलियों के अंदरूनी हिस्से में जलन होने लगती है। ये कण धीरे-धीरे जाकर फेफड़ों के अंदर जमा होने लगते हैं, जिससे सांस लेने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। ये कण अंदर जमा हो जाते हैं, जिससे श्वसन तंत्र से जुड़ी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और निमोनिया समेत अन्य कई प्रकार के संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। हवा में मौजूद बहुत छोटे कण खून में मिल सकते हैं, जिससे शरीर में सूजन होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।

स्किन को बना रहा बूढ़ा

एयर पॉल्यूशन आपकी स्किन को भी धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रहा होता है, जिससे आपकी स्किन बूढ़ी दिखने लगती है और उसमें रूखापन, लाल चकत्ते पड़ना और सेंसिटिविटी बढ़ना आदि समस्याएं होने लगती हैं। यह सब ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स के कारण होता है। इसलिए जरूरी है कि हम समय रहते जांचें करवाएं और अपनी सेहत का ध्यान रखें। ये जांचें डॉक्टर द्वारा वायु प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को समय पर पकड़ने के लिए बताई जाती हैं।

कौन से टेस्ट कराना सबसे जरूरी

लंग फंक्शन टेस्ट (Lung Function Test) - इस टेस्ट की मदद से पता लगाया जाता है कि आपके फेफड़े कितने अच्छे से काम कर पा रहे हैं या फिर उन्हें किस तरह की परेशानी हो रही है। इससे सांस लेने की क्षमता में कमी या अस्थमा या COPD जैसी क्रॉनिक लंग डिजीज के शुरुआती लक्षण पता चल सकते हैं।

इंफ्लेमेशन मार्कर (Inflammation Markers) - यह शरीर के अंदर किसी हिस्से में सूजन या लालिमा का पता लगाने वाले टेस्ट हैं, जिनमें से खून टेस्ट जैसे सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP Blood) और एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट (ESR) शरीर में सूजन का पता लगाते हैं। अगर इन टेस्ट के रिजल्ट में इनका लेवल ज्यादा मिलता है, तो इसका मतलब है कि शरीर के अंदर सूजन व लालिमा बढ़ी हुई है जो प्रदूषण के कारण भी हो सकती है।

कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) - यह आमतौर पर सबसे ज्यादा किया जाने वाले ब्लड टेस्ट होता है, जिसकी मदद से खून के स्वास्थ्य की जांच की जाती है जैसे रेड सेल्स, व्हाइट सेल्स और प्लेटलेट आदि। खून में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में बदलाव दिखाती है, जिससे यह पता चलता है कि शरीर में संक्रमण या सूजन है या नहीं।

स्किन टेस्ट (Skin Test) - त्वचा में होने वाली प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए कुछ स्किन टेस्ट भी किए जा सकते हैं। त्वचा विशेषज्ञ द्वारा की गई जांच से यह जाना जा सकता है कि पर्यावरणीय कारणों से त्वचा को कितना नुकसान हुआ है।

हालांकि, यह सच है कि जो लोग प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उनके लिए नियमित रूप से फेफड़ों की जांच और खून की जांच करवाना बहुत जरूरी है, ताकि फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं जैसी किसी भी बीमारी को समय पर संभाला जा सके। इसके अलावा, मास्क पहनना और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना जैसे बचाव के उपाय प्रदूषित माहौल में होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं और आपके फेफड़ों, दिल और त्वचा को स्वस्थ रख सकते हैं। इसलिए अपनी सेहत को हल्के में न लें और हमेशा सतर्क रहें।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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