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कुत्तों को नाक और मुंह के कैंसर का खतरा 4 गुना ज्यादा! आपके पास भी है कुत्ता तो हो जाइए सावधान

CTVT आमतौर पर कुत्तों के गुप्तांगों को प्रभावित करता है और ये ज्यादातर संबंध बनाने से फैलता है। लेकिन कभी-कभार ये कैंसर नाक, मुंह और स्किन जैसे हिस्सों को भी प्रभावित करता है।

कुत्तों को नाक और मुंह के कैंसर का खतरा 4 गुना ज्यादा! आपके पास भी है कुत्ता तो हो जाइए सावधान
कुत्तों को नाक और मुंह के कैंसर का खतरा 4 गुना ज्यादा! आपके पास भी है कुत्ता तो हो जाइए सावधान

Written by Jitendra Gupta |Published : July 5, 2022 11:04 AM IST

कैनाइन ट्रांसमिसिबल वेनेरियल ट्यूमर (CTVT), जिसे आप ट्रांसमिसिबल वेनेरियल ट्यूमर (TVT) और स्टिकर सार्कोमा के नाम से भी जानते हैं एक प्रकार का संक्रामक कैंसर है, जो कुत्तों को प्रभावित करता है। ये कैंसर कोशिकाएं एक जानवर से दूसरे जानवर में शारीरिक रूप से संपर्क में आने पर फैलती हैं। CTVT आमतौर पर कुत्तों के गुप्तांगों को प्रभावित करता है और ये ज्यादातर संबंध बनाने से फैलता है। लेकिन कभी-कभार ये कैंसर नाक, मुंह और स्किन जैसे हिस्सों को भी प्रभावित करता है।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने किया अध्ययन

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के पशु चिकित्सा विभाग द्वारा की गई इस स्टडी में ये बताया गया है कि प्रभावित जानवर के सिर्फ सूंघने और चाटने भर से ही ये कैंसर फैल सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस कैंसर का खतरा मेल डॉग्स में 4 से 5 गुना तक ज्यादा होता है। शोध के मुताबिक, दरअसल ऐसा तब होता है जब मेल डॉग्स, फीमेल डॉग्स के गुप्तांग को सूंघते हैं।

ज्यादातर मेल डॉग्स को होता है ये कैंसर

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के करीब दो हजार ऐसे मामलों की समीक्षा की और पाया कि सिर्फ 32 मामलों में ही CTVT ट्यूमर ने नाक और मुंह को प्रभावित किया था और इनमें से 27 मामले मेल डॉग्स के ही थे।

कैंसर के कारण

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के पशु चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर और इस अध्ययन की मुख्य लेखक डॉ. एंड्रिया स्टैकोवा का कहना है कि हमने पाया कि कैनाइन ट्रांसमिसिबल कैंसर के कारण मुंह और नाक के ट्यूमर की सबसे ज्यादा दर मेल डॉग्स में ही पाई गई है।

उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मेल डॉग्स, फीमेल डॉग्स को गुप्तांगों को सूंघते हैं, जबकि दूसरी तरफ से ऐसा कम ही होता है। यही कारण है कि ज्यादातर मेल डॉग्स को मुंह और नाक का कैंसर होता है।

इस बीमारी का निदान आसान

डॉ. एंड्रिया का कहना है कि कैनाइन ट्रांसमिसिबल कैंसर का निदानऔर इसका उपचार बहुत ही आसान है लेकिन दिक्कत ये है कि यहां ब्रिटेन में जानवर पालने वाले लोगों को इस बीमारी के लक्षणों का पता ही नहीं है क्योंकि यहां ऐसे मामले कम ही सामने आते हैं।

ठीक हो सकते हैं ज्यादातर कुत्ते

शोधकर्ता के मुताबिक, हमारा मानना है कि कैनाइन ट्रांसमिसिबल ट्यूमर का निदान बहुत ही जरूरी है ताकि कुत्तों में होने वाली इस बीमारी को रोका जा सके। उपचार बहुत ही प्रभावी है और विंक्रीस्टिन कीमोथेरेपी की मदद से ज्यादातर कुत्ते ठीक हो सकते हैं।

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इस रिसर्च को केनल क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट के वैल्कम एंड इंटरनेंशनल कैनाइन हेल्थ पोस्टग्रैजुएट स्टूडेंट इंस्पिरेशन अवार्ड द्वारा मदद की गई थी।

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