धूम्रपान न करने वाले लोगों को भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर, ये हैं 5 मुख्य कारण और बचाव के उपाय

Lung Cancer: जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। जी हां, धूम्रपान के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं, जो फेफड़ों के कारण को विकसित कर सकते हैं।

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Written By: Anju Rawat | Published : December 23, 2025 4:01 PM IST

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Medically Verified By: Dr Shubham Sharma

Lung Cancer Causes in Hindi:फेफड़ों का कैंसर क्या होता है? फेफड़ों का कैंसर कैसे फैलता है? आपको बता दें कि फेफड़ों का कैंसर तब होता है, जब फेफड़ों की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव होता है। जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बनाती हैं। अक्सर कहा जाता है कि फेफड़ों का कैंसर धूम्रपान करने वाले लोगों को होता है। यह सच्चाई भी है, धूम्रपान करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम ज्यादा रहता है। लेकिन, जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। जी हां, धूम्रपान के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं, जो फेफड़ों के कारण को विकसित कर सकते हैं। आइए, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट-पल्मोनोलॉजी डॉ. शुभम शर्मा से जानते हैं कि धूम्रपान न करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा क्यों बना रहता है?

बढ़ता वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बढ़ता वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है। यानी अगर आप धूम्रपान नहीं करते, लेकिन वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं तो फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा बना रहता है। दरअसल, वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण जब सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं, तो धीरे-धीरे फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। यह समस्या कुछ साल बाद कैंसर का रूप ले सकती है। वायु प्रदूषण के जरिए होने वाला फेफड़ों का कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है।

पैसिव स्मोकिंग

अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, लेकिन जो लोग सिगरेट पी रहे हैं आप उनके साथ खड़े रहते हैं, तो इससे भी फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। पैसिव स्मोकिंग भी धूम्रपान का एक अहम कारण हो सकता है। पैसिव स्मोकिंग से आने वाले धुएं को भी उतना ही हानिकारक माना जाता है, जितना खुद धूम्रपान करना। यानी पैसिव स्मोकिंग भी फेफड़ों के कैंसर को विकसित करने का कारण बन सकता है।

सीओपीडी

पिछले कुछ वर्षों में सीओपीडी के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। दरअसल, प्रदूषण और धुएं के संपर्क में रहने से सीओपीडी रोग विकसित होता है। जब सीओपीडी का समय पर इलाज नहीं मिलता है तो यह स्थिति कैंसर का रूप ले सकती है। इसलिए अगर आपको लगातार खांसी, सांस फूलने और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं महसूस हो तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें।

कमजोर इम्यून सिस्टम

कमजोर इम्यून सिस्टम भी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है। अगर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है, तो यह फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है। इसके अलावा, नींद की कमी, तनाव और फिजिकल एक्टिविटी कम करना भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। जब इम्युनिटी कमजोर होती है, तो शरीर कैंसर पैदा कर सकते हैं। इस स्थिति में सेल्स, कैंसर से लड़ नहीं पाती हैं।

फेफड़ों के कैंसर से बचाव कैसे करें?

  • फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए आपको प्रदूषण में निकलने से पहले मास्क जरूर लगाना चाहिए।
  • घर में सही वेंटिलेशन रखें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
  • पैसिव स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखें। इससे फेफड़ों को हेल्दी बनाए रखा जा सकता है।

फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ धूम्रपान से जुड़ी बीमारी नहीं रही है। अब बदलते पर्यावरण और जीवनशैली के बीच नॉन स्मोकर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है। अगर आपको कोई लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और इलाज शुरू करवाएं।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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