
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : April 22, 2026 2:25 PM IST
Fatty Liver
आज के समय में फैटी लिवर की समस्या सिर्फ शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रहती। बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने कभी भी शराब को हाथ तक नहीं लगाया है। शराब न पीने के बावजूद फैटी लिवर होने की स्थिति को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा होने लगती है, जो धीरे-धीरे लिवर में सूजन और नुकसान का कारण बनती है। जयपुर स्थिति नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. राहुल राय का कहना है कि नॉन फैटी लिवर की समस्या अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर हो सकते हैं। आइए डॉक्टर से इस विषय के बारे में विस्तार से समझते हैं-
डॉक्टर कहते हैं कि आजकल लोगों का लाइफस्टाइल काफी ज्यादा खराब हो गया है, जो इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण बनती है।
डॉक्टर का कहना है कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है या जिनकी जीवनशैली निष्क्रिय यानि स्थिर रहती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। डायबिटीज से पीड़ित लोग, थायराइड की समस्यावाले व्यक्ति और पीसीओएस से जूझ रही महिलाएं भी उच्च जोखिम में रहती हैं। इतना ही नहीं, बच्चों और टीनएज में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ती दिखती है, खासकर जब उनकी डाइट में प्रोसेस्ड फूड और शुगर की मात्रा अधिक होती है।
फैटी लिवर के शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते, यही कारण है कि यह अक्सर जांच के दौरान ही पता चलता है। लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है, कुछ संकेत सामने आते हैं, जैसे-
हालांकि ये लक्षण सिर्फ कुछ ही फैटी लिवर के मरीजों में आते हैं, वो भी कई सालों बाद। ज्यादातर लोगों में फैटी लिवर कुछ नुक्सान नहीं करता है। थकान महसूस होना, असामान्य बदलाव इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो कुछ लोगों में यह समस्या नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर में सूजन और डैमेज शुरू हो जाता है। आगे चलकर यह फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियों का रूप ले सकती है। कुछ मामलों में लीवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
इस स्थिति को काफी हद तक जीवनशैली में सुधार करके नियंत्रित किया जा सकता है।
फैटी लिवर अब केवल शराब से जुड़ी बीमारी नहीं रहती, बल्कि यह जीवनशैली से जुड़ी एक आम समस्या बन चुकी है। सही समय पर जागरूकता और छोटे-छोटे बदलाव इस बीमारी को बढ़ने से रोकने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
फैटी लीवर का पहला चरण 'ग्रेड 1 फैटी लीवर' (Grade 1 Fatty Liver) या स्टीटोहेपेटाइटिस (Steatosis) है। इसमें लीवर की कोशिकाओं में वसा (fat) की सामान्य से अधिक मात्रा (5% से 10% तक) जमा हो जाती है, जो अक्सर बिना किसी लक्षण के होता है और इसे जीवनशैली में बदलाव (जैसे वजन कम करना, पौष्टिक आहार) से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
फैटी लीवर (Fatty Liver) के कारण लीवर में अतिरिक्त वसा जमा होने से सूजन, लीवर कोशिकाओं को नुकसान और फाइब्रोसिस (स्कारिंग) हो सकती है, जो समय के साथ सिरोसिस (Cirrhosis), लीवर फेलियर और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
फैटी लिवर को ठीक करने का सबसे तेज़ और प्रभावी तरीका जीवनशैली में तत्काल बदलाव है: 5-10% वजन कम करना, चीनी और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह बंद करना, और रोजाना 30-45 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए।
लिवर खराब होने पर आंखों और त्वचा पर पीलापन नजर आ सकता है। भूख और वजन कम हो सकता है।
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