जानें, नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के कारण, लक्षण और बचाव
बेशक, आप एल्कोहल का सेवन नहीं करते हों, फिर भी मोटापा, डायबिटीज और बेतरतीब जीवनशैली नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर का कारण बन सकते हैं।
लिवर शरीर का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसके आसपास फैट जमा होता रहता है। जब इसकी कोशिकाओं में बहुत अधिक फैट जमा हो जाता है तो फैटी लिवर की समस्या हो जाती है। इससे लिवर में सूजन और सिकुड़न की समस्या होने लगती है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि फैटी लिवर मुख्य रूप से एल्कोहल के अधिक सेवन से होता है लेकिन जो लोग शराब का सेवन नहीं करते, उन्हें भी फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। खान-पान की गलत आदतों, अनियमित जीवनशैली, वजन बढ़ने के कारण भी फैटी लिवर से ग्रस्त हो सकते हैं।
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दो तरह का होता है फैटी लिवर
फैटी लिवर दो तरह का होता है। एल्कोहलिक फैटी लिवर और नॉन एल्कोहलिक लिवर। एल्कोहलिक फैटी लिवर में एल्कोहल के अधिक सेवन के कारण लिवर में सूजन आ जाती है। इससे लिवर में फैट जमने लगता है। नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर में अन्य कारणों से लिवर के आस-पास फैट जमा होने लगता है। ये दोनों ही समस्याएं खतरनाक हो सकती हैं।
नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर के कारण
बेतरतीब लाइफ स्टाइल के कारण आज लोग ओवरवेट, मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्या के शिकार हो रहे हैं। ये तीनों कारक फैटी लिवर के होने के लिए जिम्मेदार हैं। बेशक, आप अल्कोहल का सेवन नहीं करते हों, फिर भी मोटापा, डायबिटीज और बेतरतीब जीवनशैली नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर के कारण बन सकते हैं। अल्कोहल नहीं लेने के बावजूद भी यदि आपको इन तीनों में से कोई भी समस्या है तो आपको फैटी लिवर होने की पूरी संभावना है। इलाज करवाने में देर हुई तो ये सिरोसिस लिवर में बदल सकता है। इसमें लिवर क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट करने की आवश्यकता पड़ती है। बेहतर होगा कि आप अपनी लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार करें।
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नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर के लक्षण
थकान
दाईं तरफ पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
वजन कम होना
मुख्य कारण
मोटापा।
हाइपरलीपिडीमा या फिर खून में हाई लेवल का फैट होना।
मधुमेह।
अनुवांशिक कारण।
किसी विशेष दवाई का साइड इफेक्ट।
फैटी लिवर के अन्य दो प्रकार
नॉन-एल्कोहलिक स्टेटोहेपटाइटिस (Steatohepatitis)
नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डीजिज-सिरोयोसिस
फैटी लिवर से बचाव
उचित समय पर डॉक्टर को दिखाएं और इलाज शुरू करवाएं।
लाइफ-स्टाइल में बदलाव करें।
नियमित व्यायाम और प्राणायाम आदि करें।
हेल्दी खाना खाएं।