दुर्गा पूजा के लिए बंगाल सरकार ने दी खास गाइडलाइन्स, एंटी-नॉइस पॉल्यूशन नियमों का पालन करेगी हर पंडाल
Noise pollution दुर्गा पूजा के पंडालों को पश्चिम बंगाल सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि इस दौरान ध्वनि प्रदूशण को कम करने में मदद मिल सके। जानें ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर क्या असर होता है और इससे कैसे बचा जाए।
Written by Mukesh Sharma|Published : September 22, 2022 10:36 AM IST
Noise pollution effects: दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान पंश्चिम बंगाल सरकार ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही एक्शन में है। पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य की सभी दुर्गा पूजा समितियों को ध्वनि प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण रोधी उपाय अपनाने की सलाह दी है। वेस्ट बंगाल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव राजेश कुमार ने कहा कि “हमने सभी थानों से यह आग्रह किया कि दुर्गा पूजा के सभी आयोजक ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के नियमों का पालन करें। इस एप्लीकेशन लेटर में यह भी लिखा गया कि जो लोग इन नियमों का पालन करने में विफल होते हैं उन्हें इसके लिए अयोग्य कर दिया जाएगा” इसलिए दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों को ध्वनि प्रदूषण को कंट्रोल करने का खास ध्यान रखना होगा, ताकि लोगों को नोइस पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।
सेहत के लिए खतरनाक है ध्वनि प्रदूषण
नॉइस पॉल्यूशन का सेहत पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक ध्वनि के संपर्क में आना सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। ध्वनि प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कई अलग-अलग शारीरिक व मानसिक समस्याएं होने लगती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
ध्वनि प्रदूषण से मानसिक समस्याएं - हमारा दिमाग खतरे की निगरानी के लिए हमेशा ध्वनि की निगरानी करता है और यहां तक कि नींद के दौरान भी यह प्रक्रिया रुकती नहीं है। यही कारण है कि लगातार तेज ध्वनि मस्तिष्क को गंभीर रूप से प्रभावित कर देता है। लगातार ध्वनि में रहने वाले लोगों को अक्सर चिड़चिड़ापन, मानसिक थकान, क्रोध, चिंता, अवसाद व तनाव जैसी मानसिक परेशानियां महसूस होती रहती हैं।
ध्वनि प्रदूषण से शारीरिक समस्याएं - मानसिक स्वास्थ्य की तरह शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्वनि प्रदूषण से गहरा प्रभाव पड़ता है। बहुत ज्यादा शोर सीधा कानों को प्रभावित करता है और कुछ लोगों को बहरेपन की शिकायत हो जाती है। इसके अलावा नॉइस पॉल्यूशन से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और नींद संबंधी समस्याएं होने लगती हैं।
ध्वनि प्रदूषण को कैसे कम करें
हालांकि कुछ मामलों में ध्वनि प्रदूषण से बचना या उसे कम करना लगभग मुश्किल होता है, लेकिन अन्य स्थितियां ऐसी भी हैं, जिनमें ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है -
उपकरणों के नॉइस को कम करें - अगर आपके घर में कोई इलेक्ट्रिक उपकरण जैसे पंखा, ऐसी, हीटर या अन्य कोई भी उपकरण ज्यादा ध्वनि पैदा कर रहा है, तो उसे ठीक करा लें या उसकी जगह पर कम नॉइस वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें।
मीडिया उपकरणों के शोर को कम करें - अगर आपको टीवी, रेडियो, फोन या अन्य किसी म्यूजिक या मीडिया डिवाइस की ज्यादा आवाज करके यूज करना पसंद है, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। इसलिए इन उपकरणों की आवाज को जितना हो सके कम ही रखें।
मशीनरी को ठीक कराएं - अगर आपके घर पर कोई मशीन खराब है और इसलिए ज्यादा आवाज कर रही है, तो उसे जल्द से जल्द ठीक कराएं क्योंकि ज्यादा आवाज वाली मशीन का इस्तेमाल करने से आपकी और आपके परिवार के लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
ध्वनि प्रदूषण से कैसे बचें
कुछ प्रकार के नॉइस पॉल्यूशन ऐसे हैं, जिन्हें नियंत्रित करना आपके हाथ में नहीं होता है, लेकिन उससे बचने के कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं -
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ज्यादा ट्रैफिक के समय घर से न निकलें - अगर आपको बाहर किसी काम से जाना है, तो कोशिश करें कि आप उस समय न जाएं जिस समय ज्यादा ट्रैफिक होती है। उदाहरण के लिए सुबह और शाम के समय ट्रैफिक बहुत ज्यादा होती है और गाड़ियों के चलने व हॉर्न बजने की आवाज बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण पैदा करती हैं।
इयरप्लग का इस्तेमाल करें - अगर आपके घर के आस-पास कोई मशीन चल रही है और आपको उससे बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण महसूस हो रहा है, तो ऐसे में आप इयरप्लग या इयरमफ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनके इस्तेमाल के कानों को ध्वनि प्रदूषण से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
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