
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Updated : May 25, 2026 7:34 PM IST
thyroid real story (image-AI)
क्या हो अगर आपको अचानक से थायराइड हो जाए? थायराइड भले ही सुनने में आम लगता है, लेकिन यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है और आपके जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर देता है। अगर हाइपोथायराइडिज्म की बात करें, तो इसकी वजह से लोगों का वजन तेजी से बढ़ जाता है। थायराइड रोगियों को नेचुरली कंसीव करने में भी काफी मुश्किल होती है। लेकिन, अगर सही लाइफस्टाइल और रूटीन को फॉलो किया जाए तो थायराइड रोगी भी एक सामान्य जिंदगी जी सकते हैं और नेचुरली कंसीव भी कर सकते हैं। इसका एक उदाहरण है- 32 वर्षीय नित्या शर्मा, जिन्हें साल 2018 से थायराइड रोग है। लेकिन, थायराइड की वजह से उनके जीवन पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा। इसका सबसे मुख्य कारण है, नित्या का हेल्दी रूटीन फॉलो करना। नित्या ने अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव किए, जिनकी वजह से उन्हें थायराइड से होने वाली समस्याओं से ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ा। आइए, विश्व थायराइड दिवस (हर साल 25 मई को मनाया जाता है) के मौके पर जानते हैं नित्या शर्मा की कहानी-
नित्या बताती हैं, "मुझे शुरुआत में हाथ-पैरों में तेज दर्द होता था। लेकिन, मैंने इस संकेत को सामान्य समझा। जब मेरे हाथ और पैरों पर सूजन दिखाई देने लगी, तो मैं तुरंत डॉक्टर से मिली। मेरे बाल भी तेजी से झड़ रहे थे, इसलिए डॉक्टर से मुझे थायराइड का टेस्ट कराने की सलाह दी। जब टेस्ट कराया गया, तो हाइपोथायराइडिज्म का निदान हुआ। जब टेस्ट में थायराइड निकला, तो मैं काफी घबरा गई थी। तब डॉक्टर ने बोला कि अगर हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट को फॉलो किया जाए, तो थायराइड को बढ़ने से रोका जा सकता है। तब से मैंने रोज एक्सरसाइज करना और डाइट पर भी ध्यान देना शुरू किया। इससे थायराइड कंट्रोल में बना रहा, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान मेरा थायराइड लेवल काफी बढ़ गया था।"
thyroid real story (image-AI)
कई महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान ही थायराइड विकसित होता है, जिसका मां और बच्चे की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है। लेकिन, अगर किसी महिला को पहले से थायराइड है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान इसका स्तर बढ़ सकता है। नित्या बताती हैं, "मेरा थायराइड का स्तर ज्यादा बढ़ा हुआ नहीं रहता था, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड का स्तर काफी बढ़ गया। पहली प्रेग्नेंसी में मेरा थायराइड का स्तर 24 mIU/Lपहुंच गया था, जबकि दूसरी प्रेग्नेंसी में थायराइड की रेंज 72 mIU/L पहुंच गया था। इस दौरान मैं 125mg की दवा लेती थी।"
नित्या आगे बताती हैं, "कई महिलाओं को थायराइड की वजह से कंसीव करने में मुश्किल होती है। मैंने आसानी से कंसीव कर लिया था, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान मेरा थायराइड स्तर काफी बढ़ गया था, इसकी वजह से मुझे कई दिक्कतों से जूझना पड़ा था। प्रेग्नेंसी के दौरान मुझे वजन में भी बदलाव देखने को मिलेगा।"
हाइपोथायराइडिज्म की वजह से नित्या को कई दिक्कतें हुई थीं। जैसे-
हाइपोथायराइडिज्म में वजन तेजी से बढ़ता है, लेकिन नित्या का वजन कंट्रोल में रहता है। इसके लिए वह काफी मेहनत करती हैं। नित्या बताती हैं, "शुरुआत में हाइपोथायराइडिज्म की वजह से मेरा भी वजन थोड़ा बढ़ गया था। लेकिन अपने वजन को कंट्रोल में रखने के लिए मैंने काफी मेहनत की और अपनी पूरी लाइफस्टाइल ही बदल दी। मैंने फिट, हेल्दी रहने और वजन को कंट्रोल में रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करना शुरू किया। मैं रोज सुबह रनिंग भी करती हूं। जब से मुझे थायराइड हुआ है, मैं रोज सुबह आधे घंटे रनिंग करती हूं और शाम को एक्सरसाइज रूटीन को फॉलो करती हूं। इससे मैं काफी एक्टिव महसूस करती हूं।"
नित्या शर्मा का कहना है कि सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहना सही नहीं है। लाइफस्टाइल, वर्कआउट और डाइट रूटीन में भी बदलाव करना बहुत जरूरी होता है।
नित्या बताती हैं, "पहले मैं कभी-कभार बाहर का खाना खा लेती थी। लेकिन, जब से थायराइड हुआ है मैं बाहर का खाना बिल्कुल नहीं खाती हूं। मैं घर का बना खाना ही पसंद करती हूं। मैंने अपनी डाइट में मल्टीग्रेन आटा शामिल किया है, जिससे थायराइड कंट्रोल में आए और इससे होने वाली समस्याओं से बचाव हो सके। मेरा मानना है कि अगर आप हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल को फॉलो करेंगे, तो वजन और थायराइड को कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है।"
अगर आपके मन में थायराइड से जुड़े सवाल हैं, तो उनमें से कुछ के जवाब यहां जानें-
बिना वजह वजन बढ़ना, थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, स्किन ड्राई होना और पीरियड्स अनियमित होना आदि हाइपोथायराइडिज्म के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें और थायराइड की जांच जरूर कराएं।
hypothyroidism (image-AI)
हाइपोथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें थायराइड ग्रंथि प्राप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है। इन हार्मोन की कमी से शरीर में मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया धीमी हो जाती है और एनर्जी का स्तर काफी गिर जाता है।
हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं हो पाता है। ऐसा ऑटोइम्यून बीमारियां, आयोडीन की कमी, पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्याओं आदि की वजह से होता है।
Disclaimer: नित्या शर्मा की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा है, खासकर थायराइड रोगियों के लिए जो इस बीमारी से डर जाते हैं। थायराइड रोगी भी अपना वजन कंट्रोल में रख सकते हैं और एक अच्छा जीवन जी सकते हैं।