
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Updated : February 5, 2026 12:23 PM IST
Medically Verified By: Dr. Nishant Singh
भारत में हाल ही में सामने आए निपाह वायरस (Nipah Virus) के मामलों ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि कई संक्रमित लोग अस्पताल के कर्मचारी रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सीधे मरीजों और समाज की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। जब डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ बीमार पड़ते हैं, तो अस्पताल की सेवाएं प्रभावित होती हैं और संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए हम आपको बताने जा रहे हैं कैसे इस वायरस से बचाव किया जा सकता है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल समेत कुछ इलाकों में निपाह वायरस के मामले सामने आए हैं। इनमें से कई मरीज अस्पताल स्टाफ थे। निपाह का खतरा देखते हुए करीब 100 लोगों को होम क्वारंटाइन में रखा गया है। इससे यह साबित होता है कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) बेहद जरूरी है। अगर मेडिकल स्टाफ सुरक्षित नहीं रहेगा, तो मरीजों की देखभाल प्रभावित होगी और ये वायरस पहले से भी ज्यादा तेजी से लोगों के बीच फैलेगा।
Nipah Virus
नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के सीनियर फिजिशियन डॉ. निशांत सिंह (Dr. Nishant Singh, Sr. Consultant- Physician, Yatharth Hospital Noida Extension) का कहना है कि निपाह वायरस (NiV) एक बेहद खतरनाक वायरस है, जो इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। यह एक ज़ूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इस वायरस का प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (Fruit Bats या Flying Foxes) होते हैं, जो Pteropus प्रजाति से संबंधित होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को हाई-रिस्क पैथोजन माना है। इस बीमारी के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन या पुख्ता इलाज मौजूद नहीं है।
निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। इसमें शामिल हैः
तेज बुखार
सिरदर्द
सांस लेने में दिक्कत
उल्टी और कमजोरी
दिमाग में सूजन (Encephalitis)
बेहोशी या कोमा
इस बीमारी में मृत्यु दर 40% से 70% तक हो सकती है, जो इसे बेहद घातक बनाती है।


डॉ. निशांत सिंह बताते हैं कि वर्तमान में निपाह वायरस से बचाव के लिए कोई वैक्सीन या सटीक इलाज मौजूद नहीं हैं। ऐसे में खुद को सतर्क रखकर ही निपाह से बचाव किया जा सकता है। निपाह वायरस से बचाव करने के लिए आप नीचे बताई गई चीजों को फॉलो करें।
Follow these essential precautions to prevent Nipah Virus infection. Stay alert, stay informed, and follow advisories issued by local health authorities.#NipahVirus#PublicHealth#HealthForAllpic.twitter.com/xvZNcHx63y
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) January 27, 2026
ये वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से फैलता है। इसलिए जिन क्षेत्रों में चमगादड़ों की संख्या ज्यादा होती है, वहां जोखिम बढ़ जाता है। डॉक्टर का कहना है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में निपाह वायरस के फैलने का खतरा ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची ताड़ी भी बड़ी मात्रा में पी जाती है। ऐसे में वहां पर वायरस तेजी से फैलकर लोगों को बीमार कर सकता है। इसके अलावा जिन लोगों की इम्यूनिटी पहले से कमजोर है उनमें भी निपाह वायरस होने का खतरा ज्यादा है।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. निशांत सिंह कहते हैं- हां निपाह वायरस एक जानलेवा वायरस है। यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से फैलता है और इंसानों में संक्रमित फल, दूषित भोजन या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से पहुंच सकता है।

निपाह वायरस संक्रमण की मृत्यु दर काफी अधिक होती है, जो लगभग 40% से 75% तक हो सकती है, यानी हर 10 में से 4 से 7 मरीजों की जान जाने का खतरा रहता है।
निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर पहचान, सावधानी और जागरूकता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर के अनुसार, जल्दी पहचान, सही आइसोलेशन, स्टाफ की सुरक्षा और स्पष्ट संचार से निपाह संक्रमण को रोका जा सकता है। अगर हम सभी सावधानी बरतें, तो इस खतरनाक वायरस से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।