रेटिना विशेषज्ञ ने बताया कैसे रात में फोन चलाना बन जाता है काला मोतियाबिंद और विजन लॉस का कारण
Night-time Mobile Usage Hidden Danger for Eye Health : देर रात तक मोबाइल चलाने से रेटिना पर ज्यादा दवाब पड़ता है इससे विजन से जुड़ी बीमारी हो सकती है।
Night-time Mobile Usage Hidden Danger for Eye Health : रेटिना विशेषज्ञ ने बताया कैसे रात में फोन चलाना बन जाता है काला मोतिया और विजन लॉस का कारण सर्दी या किसी भी मौसम में आपको चादर के अंदर घुसकर देर रात तक मोबाइल चलाना पसंद है, तो ये आपकी आंखों की सेहत के लिए घातक साबित होता है। नई दिल्ली के लाजपत नगर स्थित विजन आई क्लिनिक के सीनियर मोतियाबिंद और रेटिना सर्जन डॉ. पवन गुप्ता का कहना है कि देर रात तक फोन चलाने से काला मोतिया जैसी घातक बीमारी हो सकती है।
जो लोग लंबे समय तक देर रात तक मोबाइल चलाते हैं उनकी आंखों की रोशनी कम उम्र में ही जा सकती है। इसके कारण आंखों से देखना बिल्कुल बंद हो जाता है। WHO (World Health Organization) के अनुसार, दुनिया में अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण काला मोतिया है।
रात को देर तक फोन चलाने से आंखों पर क्या असर पड़ता है?
डॉ. पवन गुप्ता बताते हैं कि रात में मोबाइल चलाना आंखों के लिए दिन की तुलना में कई गुना ज्यादा नुकसानदायक होता है।
- अंधेरे में स्क्रीन की तेज रोशनी- अंधेरे में मोबाइल से निकलने वाली रोशनी को देखने से आंखों पर ज्यादा दवाब पड़ता है।
- ब्लू लाइट का ज्यादा प्रभाव- मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट को देखने से आंखों जलन और धुंधलापन की समस्या होती है। कुछ मामलों में ब्लू लाइट रेटिना तक पहुंचकर आंखों की कोशिकाओं तक को नुकसान पहुंचा सकती है।
- नींद की कमी- देर रात तक मोबाइल देखने से रात को सोते समय नींद पूरी नहीं होती हैं। नींद की कमी के कारण आंखों की परेशानी होना आम है।
रात को फोन चलाने का काला मोतिया से क्या कनेक्शन है?- Connection Between Phone and Glaucoma
डॉक्टर का कहना है कि रात में लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल से आंखों से जुड़ी कई दिक्कतें हो सकती हैं। बहुत से लोग आंखों में खिंचाव, आंखों में भारीपन, ज्यादा पानी आना, लालिमा और जलन की शिकायत करते हैं। छोटी स्क्रीन पर लगातार फोकस करने से पलकें झपकाने की दर कम हो जाती है, जिससे आंखों में सूखापन की समस्या होती है। विभिन्न प्रकार की रिसर्च से पता चलता है कि 20 से 40 मिनट तक लगातार फोन देखने से आंखों के अंदर का तरल दबाव (IOP) अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। काला मोतिया मुख्य रूप से इसी दबाव के बढ़ने और ऑप्टिक नर्व (आंख की नस) के क्षतिग्रस्त होने से होता है।
स्क्रीन देखते समय हमारी पलकें झपकाने की दर 66% तक कम हो जाती है। इससे आंखों में सूखापन (Dryness) आता है। आंखों में सूखापन और तनाव लंबे समय में आंखों की सेहत को बिगाड़ते हैं और ग्लूकोमा के मरीजों के लिए स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। जो लोग पहले से ही हाई रिस्क में हैं उन्हें रात को स्क्रीन देखने से काला मोतिया का खतरा ज्यादा रहता है।
मोबाइल चलाने से विजन लॉस कैसे होता है?
- रात में फोन देखने से आंखों पर स्ट्रेस ज्यादा बढ़ता है।
- मोबाइल की ब्लू लाइट से रेटिना और नसों को नुकसान होता है।
- छोटे-छोटे अक्षर को पढ़ने से दवाब ज्यादा बनता है।
- अंधेरे में मोबाइल चलाने से Optic Nerve कमजोर होती है।
- कुछ मामलों में रात को मोबाइल चलाने से स्थायी अंधापन भी देखा जाता है।
निष्कर्ष
रात को देर तक फोन चलाना सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आंखों की रोशनी छीन लेने वाला खतरा बन सकता है। ब्लू लाइट, नींद की कमी, बढ़ता Eye Pressure और Optic Nerve डैमेज ये सभी मिलकर काले मोतिये और स्थायी विज़ लॉस की नींव रखते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो रात को मोबाइल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।