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दिमाग की खराब कोशिकाओं को फिर से ठीक कर सकती है नई थेरेपी, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद

तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कुछ बीमारियों को दवाओं की मदद से सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन बीमारी के दौरान हुए सेल्स डैमेज ठीक करना संभव नहीं है। रिसर्चर नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद कर सकती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 29, 2026 10:56 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Jagriti Yadav

खराब जीवनशैली और काम के बढ़ते स्ट्रेस के कारण आजकल न्यूरोलॉजिकल समस्याएं दुनिया के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। स्ट्रोक, अल्जाइमर, पार्किंसन डिजीज और मिर्गी जैसी समस्याओं के मामले दुनियाभर में बढ़ते जा रहे हैं। डॉ. जागृति यादव, मेडिकल डायरेक्टर, लैब ऑपरेशन्स, क्रायोवीवा लाइफ साइंसेज के अनुसार ये बीमारियां सिर्फ मरीज की सेहत ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, कामकाज और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं। हालांकि, यह भी सच है कि मेडिकल साइंस आज के समय में बहुत एडवांस हो चुका है और न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स के ट्रीटमेंट में भी कई नए आविष्कार किए जा चुके हैं। इस लेख में हम एक्सपर्ट से ऐसी ही न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स और उनके ट्रीटमेंट के बारे में जानेंगे।

क्या होता है न्यूरोलॉजिकल सिस्टम

हमारा तंत्रिका तंत्र हमारे शरीर का एक नेटवर्क सिस्टम होता है, जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं से मिलकर बना होता है। इस नेटवर्क सिस्टम का मुख्य काम सिग्नल पहुंचाना और भेजना होता है। अगर सरल उदाहरण के रूप में इसे समझें तो हमारे शरीर में कहीं पर चोट लगना, ठंडा या गर्म महसूस होना या किसी भी तरह का स्पर्श का सिग्नल इसी तंत्रिका तंत्र की मदद से हमारे दिमाग तक जाता है और दिमाग फिर उस हिस्से को उसका सिग्नल भेजता है और हमें दर्द, गर्म या ठंडा महसूस होता है।

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लेकिन इसका काम सिर्फ यहीं तक नहीं बल्कि शरीर के हर सिग्नल को भेजने और प्राप्त करना का काम इसका होता है, जिसमें सुनना, सूंघना, स्वाद महसूस करना और देखना भी शामिल है। यहां तक कि किसी बात को याद करना, याद रखना, निर्णय लेना और भावनाएं महसूस करने में भी तंत्रिका तंत्र एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अब न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स के बारे में जानें

जब किसी कारण से तंत्रिका तंत्र ठीक से काम करना बंद कर देता है, तो न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं व बीमारियां पैदा होने लगती हैं जिनमें प्रमुख रूप से स्ट्रोक, अल्जाइमर, मिर्गी के दौरे और माइग्रेन आदि शामिल है। तंत्रिका तंत्र कमजोर होने के लक्षण कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें शुरुआत में अक्सर सामान्य समस्याएं मान लिया जाता है जैसे बार-बार भूलना, चक्कर आना या शरीर का कोई छोटा हिस्सा हल्का सुन्न हो जाना। इस तरह के लक्षणों को गलती से भी इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक इन्हें इग्नोर करना किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है।

तंत्रिका रोगों का इलाज

पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं की जांच और इलाज में काफी प्रगति हुई है। आधुनिक स्कैनिंग मशीनों से लेकर बेहतर दवाओं और सर्जिकल प्रोसीजर हर चीज पहले से ज्यादा एडवांस हो चुकी है। हालांकि, मेडिकल साइंस के सामने एक चुनौती आज भी है कि अगर किसी न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स ब्रेन की सेल्स डैमेज हो जाएं तो वह डैमेज लगभग परमानेंट हो जाता है और शरीर उन्हें आसानी से पहले जैसा नहीं बना पाता है। यही वजह है कि कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में मरीज पूरी तरह रिकवर हीं हो पाता है और बीमारी ठीक होने के बाद भी उस डैमेज का प्रभाव बना रहता है और ऐसे में रीजेनरेटिव मेडिसिन एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है।

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रीजेनरेटिव मेडिसिन के बारे में समझें

तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं के इलाज में रीजेनरेटिव मेडिसिन आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य सिर्फ बीमारी लक्षणों को कंट्रोल करना व उसे बढ़ने से रोकना नहीं होता बल्कि शरीर के डैमेज हुए टिश्यू और सेल्स को रिपेयर करने की संभावनाओं पर काम करना है। आसान शब्दों में कहें तो यह शरीर की नेचुरल हीलिंग स्ट्रेन्थ को बेहतर बनाने की कोशिश है, ताकि खराब हो चुके हिस्से दोबारा बेहतर तरीके से काम कर सकें।

डिसक्लेमर: तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं काफी गंभीर हो सकती हैं, जिनका समय रहते इलाज करना बेहद जरूरी है। इस लेख का उद्देश्य केवल तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं और उनके इलाज के बारे में जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।