
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 14, 2026 3:27 PM IST
pancreas cancer ai detection (Image Credit: Google Gemini)
पैंक्रियाज का कैंसर दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर ही नहीं आते हैं, जिस कारण बीमारी का पता काफी देर से चलता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित कर लिया है, जो डॉक्टरी जांच से भी पहले पैंक्रियास कैंसर की पहचान कर सकता है। असल में 28 अप्रैल को जर्नल गट में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ। इसके अनुसार यह एआई टूल सीटी स्कैन में पैंक्रियाज की छोटी से छोटी गड़बड़ियों को पहचानने में सक्षम है, जो बाद में अक्सर ट्यूमर में बदल जाती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में कैंसर की शुरुआती जांच और इलाज में बड़े बदलाव लाएगी।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, यह नया एआई मॉडल विशेष रूप से पैंक्रियास की संरचना का गहराई से विश्लेषण करने के लिए ही तैयार किया गया है। हालांकि, सामान्य तौर पर अक्सर डॉक्टर सीटी स्कैन से कैंसर की जांच सिर्फ तभी कर पाते हैं, जब ट्यूमर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता और तब तक काफी देर हो चुकी होती है। मगर यह नया एआई सिस्टम होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी पकड़ सकता है, जिन्हें इंसानी आंखें आसानी से नहीं देख पातीं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस एआई मॉडल ने स्कैन में ऊतकों के आकार, बनावट और संरचना में बेहद हल्के परिवर्तनों का विश्लेषण किया है। वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए बताया कि यही परिवर्तन आगे चलकर कैंसर कोशिकाओं में बदलते हैं। ऐसे में इस तकनीक से भविष्य में हाई-रिस्क मरीजों की समय रहते पहचान करना काफी आसान हो सकता है।
यह अध्ययन 28 अप्रैल को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल गट में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने इसमें लगभग 2,000 पुराने सीटी स्कैन का विश्लेषण किया, जिन्हें पहले तो डॉक्टरों ने सामान्य घोषित किया था, लेकिन बाद में इन्हीं मरीजों में पैंक्रियाज का कैंसर विकसित हुआ। वैज्ञानिकों ने भी इस एआई मॉडल को इन स्कैन पर प्रशिक्षित किया गया, ताकि वह उन शुरुआती बदलावों की पहचान कर सके, जो भविष्य में ट्यूमर बनते हैं। अंत में वैज्ञानिकों ने भी दावा किया कि एआई कई मामलों में डॉक्टरों की तुलना में लगभग तीन साल पहले कैंसर के संकेत पहचानने में सफल रहा है।
जैसा कि बहुत से लोग जानते हैं कि पेनक्रिएटिक कैंसर के टेस्ट उसे आमतौर पर लास्ट स्टेज में पकड़ पाते हैं, जिसकी वजह से मरीजों की जीवित रहने की संभावना काफी कम हो जाती है और अधिकतर मामलों में मरीजों की मौत हो जाती है। ऐसे में यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में लग जाए, तो समय से सही कदम उठाकर सर्जरी और इलाज अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस नई एआई तकनीक को चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि के रुप में देखा जा रहा है। इस तकनीक की मदद से डॉक्टरों को भी अधिक सटीक जांच करने में मदद मिलेगी, जिससे कैंसर पीड़ित मरीज भी लंबी उम्र की कामना कर सकते हैं। इसके अलावा इससे अस्पतालों में स्क्रीनिंग प्रक्रिया तेज हो सकेगी और अधिक भरोसेमंद बन सकेगी, जिससे हजारों लोगों की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक गोयनका ने कहा कि उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों के भीतर इस मॉडल को नियमित रूप से क्लिनिक में लागू किया जा सकेगा और टीम वर्तमान में यह सत्यापित करने के लिए परीक्षण कर रही है कि यह पहचान रणनीति व्यवहार में कारगर है या नहीं। वह कहते हैं कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित तकनीकें मेडिकल क्षेत्र का अहम हिस्सा बन जाएंगी। यह मॉडल केवल पैंक्रियास के कैंसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य प्रकार के कैंसर और गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान में भी मदद कर सकता है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल पैंक्रियाज से स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अल्सर त्वचा की सतह पर होने वाला एक घाव होता है, जो दवाओं की मदद से अपने आप ठीक हो जाता है। जबकि कैंसर कोशिकाओं की असमान्य वृद्धि है, जिससे बनने वाला घाव अपने आप ठीक नहीं होता है।
बचपन में सबसे आम कैंसर ल्यूकेमिया (Leukemia - रक्त कैंसर) है, जो बच्चों में होने वाले सभी कैंसरों का लगभग 30% हिस्सा है। इसमें एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) सबसे अधिक पाया जाता है। इसके बाद दूसरे स्थान पर मस्तिष्क (Brain) और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के ट्यूमर होते हैं।
इसका उत्तर है नहीं । लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैंसर का पता लगाने, निदान करने और उपचार करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।
एक्स-रे, रेडिएशन थेरेपी और ब्रेन का सीटी स्कैन आदि ब्रेन कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह ब्रेन में कैंसर सेल्स को बढ़ावा देने का कारण बन सकते हैं।