कम उम्र में भी बढ़ रहे ब्रेन स्ट्रोक के मामले, एक्सपर्ट्स ने बताया बचपन से ही ब्रेन हेल्थ का ध्यान देना क्यों जरूरी

Risk of Brain Stroke in Young Age: बढ़ती उम्र के साथ-साथ ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ना आम बात है, लेकिन कम उम्र मं भी इन बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, इस बारे में हम एक्सपर्ट्स से कुछ खास जानकारियां लेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : January 30, 2026 3:45 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Aparna Gupta

Brain Stroke in Young Age in Hindi: ब्रेन स्ट्रोक को आम मेडिकल भाषा में कई बार ब्रेन अटैक भी कहा जाता है, जो कि एक इमरजेंसी कंडीशन है और यह तब होती है जब ब्रेन के किसी हिस्से में ब्लड फ्लो ब्लॉक हो जाता है या फिर किसी कारण से ब्लड वेसल यानी रक्त वाहिका फट जाती है। कई दशकों से स्ट्रोक को बढ़ती उम्र और बुज़ुर्गों से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है। आज भी आम लोगों में यह धारणा बरकरार है कि यह समस्या केवल 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। लेकिन यह पूरा सच नहीं है। आज भारत समेत दुनिया भर में 20, 30 और 40 की उम्र के युवाओं में भी स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह इस बात की गंभीर चेतावनी है कि स्ट्रोक अब उम्र की सीमा में बंधा नहीं रहा है और आप भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। डॉ. अपर्णा गुप्ता, एसोसिएट डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के अनुसार बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और मेटाबॉलिक बीमारियां दिमागी स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं।

युवाओं में क्यों बढ़ा खतरा

स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग तक खून की सप्लाई अचानक से रुक जाती है या दिमाग में किसी भी कारण से रक्तस्राव होने लगता है। इसे दो प्रकारों में बांटा जाता है - पहला इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke) , जिसमें किसी रक्त वाहिका में खून का थक्का जम जाता है। दूसरा है हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke), जिसमें दिमाग में ब्लीडिंग यानी रक्तस्राव होने लगता है। डॉ. अपर्णा बताती हैं कि दिमाग की कोशिकाएं ऑक्सीजन की कमी को सहन नहीं कर पाती और कुछ ही मिनटों में ये डैमेज होने लगती हैं। उम्र अब भी स्ट्रोक का एक जोखिम कारक है, लेकिन समय के बदलने के साथ ही युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापा जैसे कारण स्ट्रोक को न्योता दे रहे हैं।

लाइफस्टाइल डिजीज भी कारण

आज के समय में कम उम्र में ही स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के पीछे का एक बड़ा कारण जीवन-शैली और उससे जुड़ी बीमारियां भी हैं, जैसे कि लंबे समय तक बैठे रहना, ज्यादा देर स्क्रीन देखना, शारीरिक गतिविधियां न करना और नींद कमी रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर डालती है। वहीं इसके अलावा धूम्रपान, वेपिंग, शराब का सेवन और नशीले पदार्थों की गिरफ्त में रहना नसों को नुकसान पहुंचाता है। इससे खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं लगातार तनाव में रहना और मानसिक दबाव हार्मोनल असंतुलन का कारण बनते हैं, जिससे स्ट्रोक का जोखिम कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामले लगातार बढ़ने के पीछे की प्रमुख वजह है इसकी जानकारी और जागरूकता की कमी। सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधलापन, हाथ-पैर में सुन्नता या अचानक कमजोरी महसूस होने को अक्सर थकान या तनाव के लक्षण मान अनदेखा कर दिया जाता है। खासतौर पर ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक या “मिनी स्ट्रोक” बेहद खतरनाक होते हैं। ये कुछ समय के लिए आते हैं और खुद ब खुद ठीक हो जाते हैं। मगर सबसे जरूरी बात यह आने वाले बड़े स्ट्रोक की चेतावनी देते हैं। इसलिए समय रहते पहचान और इलाज न होने पर स्थिति जानलेवा हो भी सकती है।

बचाव के उपाय

डॉ. अपर्णा के अनुसार कम उम्र में स्ट्रोक आना सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से भी आप पर गहरा डालता है। यह स्थिति अपने साथ लंबे समय तक की विकलांगता, आर्थिक दबाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रिकवरी में महीनों या सालों लग सकते हैं। वहीं कई बार तो पूरी तरह सामान्य जीवन में वापस लौट पाना भी संभव नहीं हो पाता है।

इसलिए स्ट्रोक से बचाव के लिए कम उम्र से ही दिमाग की सेहत को प्राथमिकता दें। नियमित हेल्थ चेकअप, ब्लड प्रेशर और शुगर की निगरानी करवाएं। आप संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, तनाव नियंत्रण का प्रयास करें और नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं। साथ ही साथ स्ट्रोक के लक्षण, जैसे चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने में दिक्कत जैसे संकेतों को पहचान कर तुरंत अस्पताल पहुंचना जीवन और दिमाग दोनों को बचा सकता है। साथ ही आपको यह भी समझना होगा कि स्ट्रोक अब सिर्फ एक बुढ़ापे में होने वाली बीमारी नहीं बल्कि कम उम्र में ही जीवन को बर्बाद कर देने वाली बीमारी भी हो सकती है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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