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Written By: Anshumala | Updated : November 16, 2018 5:21 PM IST
Being Overweight Can Increase Your Child's Risk Of Getting Diabetes © Shutterstock
बच्चों में बढ़ता मोटापा आज चिंता का विषय बन चुका है, जो कई बीमारियों का कारण बन रहा है। पिछले साल किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दिल्ली में लगभग 35 फीसदी किशोरों का वजन सामान्य से अधिक है या वे मोटापे से ग्रस्त हैं। किशोरों के लिए ये आंकड़े अच्छे नहीं हैं। मोटापे का एक घातक परिणाम डायबिटीज के रूप में सामने आता है। आज कई कारणों से बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं जैसे लगातार टीवी देखना, इंटरनेट, गेमिंग डिवाइसेज पर समय बिताना, खेलकूद की कमी, जंक फूड का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली। आजकल बच्चे खेल-कूद की बजाय इंडोर गतिविधियों में ज्यादा समय बिताते हैं। मोटापे के परिणाम घातक बीमारियों के रूप में सामने आते हैं जैसे डायबिटीज, प्री-डायबिटिक लक्षण, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां आदि। डायबिटीज का बुरा असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है। मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिला के बच्चों में ऑटिज्म का खतरा
नवजात शिशु भी होते हैं प्रभावित
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजी डॉ. एस. के. वांगनू कहते हैं कि डायबिटीज का एक पहलू यह भी है कि यह नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है और ज्यादातर लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। नियोनेटल डायबिटीज बच्चों में छह माह की उम्र से पहले भी हो सकता है। अपोलो शुगर क्लिनिक में 2 महीने के बच्चे में हाई ब्लड शुगर का मामला सामने आया। इस बच्चे के परिवार में डायबिटीज का इतिहास नहीं था। इलाज के लिए बच्चे को इंसुलिन थेरेपी पर रखा गया। इसी बीच नियोनेटल डायबिटीज की जांच के लिए बच्चे और उसके माता-पिता के सैम्पल लिए गए जो पॉजिटिव पाए गए। हमने उसे इंसुलिन से हटा कर ओरल एंटीडायबिटिक दवाएं शुरू की।
प्रेगनेंसी में ग्लूटेन युक्त डायट लेने से, बच्चे में हो सकता है टाइप-1 डायबिटीज का खतरा
एक अनुमान के अनुसार, अकेले दिल्ली में 32 लाख बच्चे डायबिटीज से पीड़ित हैं। अधिकतर मामलों में ये बच्चे मोटापे का शिकार होते हैं या इनका वजन सामान्य से अधिक होता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार, बच्चों में मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है लेकिन समय पर निदान के द्वारा रोग के लक्षणों को नियंत्रण में रखा जा सकता है और प्री-डायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से रोका जा सकता है।
नियोनेटल डायबिटीज बच्चों में छह माह की उम्र से पहले भी हो सकता है।© Shutterstock
सेहतमंद जीवनशैली से पाएं काबू
- डॉ. एस. के. वांगनू कहते हैं कि डायबिटीज का मुख्य कारण अनहेल्दी लाइफस्टाइल है, लेकिन अच्छी आदतों द्वारा इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। सबसे पहले अपने वजन पर नियंत्रण रखें। ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने के लिए बीएमआई सही होना बहुत जरूरी है। इसके लिए कार्बोहाइड्रेट का सेवन सीमित मात्रा में करें। फाइबर और प्रोटीन से युक्त आहार लें। हरी सब्जियों, फलों, फलियों और साबुत अनाज का सेवन करें। नियमित करेंगे ये 5 आसन, तो डायबिटीज रहेगा कंट्रोल में
- परिवार में डायबिटीज का इतिहास है तो आपको नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए। अपने ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लीसराइड पर नियंत्रण रखें। डायबिटीज दिल की बीमारियों का कारण भी बन सकता है इसलिए ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है।
- डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए व्यायाम बहुत अधिक महत्वपूर्ण होता है। इससे न केवल ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रोल और ट्राई ग्लीसराइड नियंत्रण में रहते हैं, बल्कि आप रोजमर्रा के तनाव पर भी काबू पा सकते हैं। सप्ताह में कम से कम पांच दिन 45 मिनट के लिए व्यायाम करें। इससे आपको अच्छी नींद आएगी। नींद पूरी न होने पर भी आप बेवजह खाते हैं और इससे आपका वजन बढ़ता है।