
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 7, 2025 12:51 PM IST
Medically Verified By: Dr. Akshay Mehta
Jaundice in newborn babies- नवजात बच्चों में पीलिया या जॉन्डिस होना एक बहुत आम बात है, लेकिन इसे मामूली या कम गम्भीर नहीं समझना चाहिए। 9 महीने पूरे करने के बाद पैदा होने बच्चों (Full term babies) में से लगभग 60% बच्चों और समय से पहले पैदा होने वाले या प्रीमैच्योर बच्चों में लगभग 80% बच्चों में जॉन्डिस (Jaundice in premature babies) होता है। नवजात बच्चों में जॉन्डिस का कारण खून में बिलीरुबिन (Billirubin) नामक पदार्थ के असंतुलन के कारण होता है। अगर समय पर जॉन्डिस का इलाज न किया जाए तो यह दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता (Effects of jaundice on brain) है या बच्चे के विकास में रुकावट (Baby's growth) डाल सकता है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि समय रहते जॉन्डिस की पहचान हो सके और इसका इलाज किया जा सके।
नोएडा गौर सिटी में स्थित मदरहुड हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजी और पीडियाट्रिक्स डॉ. अक्षय मेहता (Dr. Akshay Mehta, Pediatrician, Senior Consultant, Neonatology, Motherhood hospital, Gaur City, Noida) कहते हैं कि, नवजात बच्चों में पीलिया से जुड़ी गलत बातें और मिथक (Myths related to jaundice in newborn babies) भी लोगों में फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि, “लोग सोचते हैं कि बच्चे को धूप में रखने से पीलिया ठीक हो जाता है। लेकिन, ऐसा नहीं है। धूप से सही तरह की ब्लू लाइट (Blue Light) नहीं मिल पाती और बच्चे के शरीर का टेम्परेचर बहुत अधिक बढ़ जाता है। इससे बच्चे को डिहाइड्रेशन (Dehydration in newborns) हो सकता है और उसकी कोमल स्किन को भी नुकसान पहुंच सकता है। अगर पीलिया बहुत ज्यादा है तो केवल धूप से यह ठीक नहीं होगा और बच्चे को सही इलाज मिलना जरूरी हो जाता है।

डॉ. अक्षय मेहता का कहना है कि, यह बात पूरी तरह से गलत है कि पीलिया अपने आप ठीक हो जाएगा। अगर पीलिया गम्भीर है तो डॉक्टर का इलाज जरूरी है। लापरवाही करने से बच्चे के दिमाग पर इसका असर हो सकता है। इसीलिए, बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
डॉ. अक्षय के अनुसार, आमतौर पर कहा जाता है कि पीलिया में त्वचा का रंग पीला पड़ काता है और केवल यही पीलिया का लक्षण है। लेकिन, पीलिया होने पर बच्चों की आंखों, मसूड़ों और पैरों में भी पीलिया के लक्षण दिखायी दे सकते हैं।
नवजात शिशुओं में जॉन्डिस के ट्रीटमेंट के दौरान फोटोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसे लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम हैं जैसे कि फोटोथेरेपी नुकसानदायक होती है। लेकिन, फोटोथेरेपी बहुत ही सेफ और असरदार इलाज है। फोटोथेरेपी में बच्चों को एक विशेष प्रकार की लाइट के नीचे रखा जाता है, जिससे शरीर में बिलीरुबिन का स्तर कम होता है। डॉ. अक्षय कहते हैं कि, पीलिया की समय पर पहचान और सही इलाज से ही बच्चे की जान बचायी जा सकती है और उसका भविष्य बेहतर बन सकता है।”
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
नहीं, पीलिया केवल धूप से यह ठीक नहीं हो सकता है। बच्चे को डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि समय पर बच्चे को सही इलाज मिल सके।
नवजात शिशुओं में पीलिया होने के बाद चेहरे की त्वचा पीली पड़ने लगती है, इसी तरह आंखों और पैरों में भी जॉन्डिस के लक्षण दिखायी देते हैं।