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Written By: Editorial Team | Updated : December 14, 2017 1:42 PM IST
Use aloe vera to treat canker sores. © Shutterstock
अगर आपके मुंह में छाले आ जाएं तो आपके लिए पानी का एक छोटा-सा घूंट पीना भी मुश्किल हो सकता है। ये छाले अक्सर शरीर की गर्मी बढ़ने की वजह से होते हैं और ये घाव या नासूर के रुप में दिखायी पड़ सकता है। इन्हें कैंकर सोर (canker sores) कहा जाता है। ये छाले एक पीले, सफेद घाव जो गोल या अंडाकार हो सकते हैं और इनके किनारों पर लाल सीमा बनी होती है। ये छाले आपके गाल के अंदर, या जीभ या मसूड़ों के आसपास हो सकते हैं। तनाव के अलावा, एसिडिक फल, ब्रेसेज़ और डेन्चर की वजह से आपके मुंह में इतनी परेशानी हो सकती है और ये घाव उभर सकते हैं। जहां कुछ दिनों में ये घाव खुद-ब-खुद ठीक हो जाते हैं, वहीं आप इन घरेलू तरीकों से उनकी तकलीफ को बर्दाश्त करने की हद तक कम कर सकते हैं।
• दर्दवाली जगह पर एक गीला टी बैग रखने से कुछ राहत मिल सकती है। दरअसल चाय में मौजूद टैनिक एसिड (tannic acid) से सूजन कम हो जाती है और चाय भी मुंह में एसिड को बेअसर कर सकती है।
• एक मिनट के लिए दर्दवाली जगह पर अलम या फिटकिरी रखें। इससे सूजन को कम किया जा सकता है और वह हिस्सा सुख सकता है। अलम अपने राहत दिलानेवाले और खून का पतला बनानेवाले गुणों के लिए मशहूर है।
• नमक पानी के साथ मुंह धोना भी दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। खारा पानी दर्द और सूजन को कम कर सकता है और गले में तेजी से राहत दिलाता है।
• तुलसी की पत्तियां घावों पर प्रभावी होने के लिए जानी जाती हैं। ये पत्ते न केवल अल्सर से तुरंत राहत दिलाते करते हैं। बल्कि उन्हें दोबारा उभरने से भी रोकते हैं। घावों से छुटकारा पाने के लिए, दिन भर में हर 4 घंटों के बाद 4-5 तुलसी की पत्तियों को चबाना चाहिए।
• एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक और विरोधी भड़काऊ एजेंट होने के नाते, हल्दी इन घावों से राहत पाने का एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय है। हल्दी पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और जल्दी राहत पाने के लिए घावों पर इसे लगाएं।
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अनुवादक: Sadhana Tiwari.
चित्रस्रोत:Shutterstock Images.
संदर्भ: [1] MacDonald, J. (2002). Canker sore remedies: CMAJ: Canadian Medical Association Journal, 166(7), 884.
[2] Preeti, L., Magesh, K., Rajkumar, K., & Karthik, R. (2011). Recurrent aphthous stomatitis. Journal of Oral and Maxillofacial Pathology : JOMFP, 15(3), 252–256. https://doi.org/10.4103/0973-029X.86669.