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Bar Bar mirgi Aana: मनुष्य का दिमाग का कई अलग-अलग जटिल संरचनाओं से मिलकर बना होता है और जिनमें तंत्रिकाएं, कोशिकाएं और न्यूरॉन्स आदि शामिल है। इन संरचनाओं में से किसी में भी किसी भी तरह की कोई समस्या आने पर दिमाग के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है और स्थितियों के कारण मिर्गी के दौरे आने लगते हैं। मिर्गी एक ऐसी बीमारी है, जिसका जड़ से कोई इलाज नहीं है। हालांकि, अगर किसी अन्य दिमागी समस्या के कारण दौरे पड़ रहे हैं, तो उस स्थिति का इलाज करके इसे ठीक किया जा सकता है। इसके अलावा मिर्गी के अन्य मामले जिनका जड़ से कोई इलाज नहीं होता है उन्हें दवाओं की मदद से कंट्रोल करके रखा जा सकता है।
आमतौर पर अगर मिर्गी का कोई मरीज समय-समय पर डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएं ले रहा है, तो मिर्गी के दौरे होने से रोका जा सकता है। लेकिन कुछ मरीजों के साथ ऐसा भी होता देखा गया है कि वे समय पर दवाएं ले रहे हैं, अन्य सभी बातों का ध्यान रख रहे हैं और जरूर परहेज भी रख रहे हैं और फिर भी उन्हें मिर्गी के दौरे होने लगते हैं।
डॉ. आत्मा राम बंसल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज, मेदांता गुरुग्राम ने बताया कि दुनियाभर में हर 3 मिर्गी के मरीजों में 1 मरीज ऐसा भी होता है, जिसे दवाएं लेने के बाद भी मिर्गी के दौरे आ जाते हैं। इस स्थिति को ड्रग रेसिस्टेंट एपिलेप्सी कहा जाता है, जो दवाओं के भी नहीं रुक पाती है।
डॉक्टर बंसल ने बताया कि मिर्गी के कारण का पता लगाना जरूरी है और आगे उन्होंने बताया कि दवाओं के बाद भी होने वाली मिर्गी की समस्या यानी ड्रग रेसिस्टेंट एपिलेप्सी सिर्फ एक बीमारी नहीं है, बल्कि मरीज के मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार पड़ रहा एक बोझ है, जो उसे अंदर ही अंदर कमजोर कर रहा होता है। ऐसे में मरीज को दवाएं लेने के बाद भी अकेले रहने में डर लगता है कि कहीं उसको मिर्गी का दौरा न आ जाए।
साथ ही मिर्गी की यह समस्या जो दवाओं से भी कंट्रोल नहीं हो पाती है वह मरीज के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्य प्रक्रिया को भी नुकसान पहुंचाती है। क्योंकि मरीज की कार्य क्षमता प्रभावित हो जाती है और मरीज ठीक से फोकस नहीं कर पाता है और निर्णय लेने में भी कठिनाई महसूस करता है।
(और पढ़ें - मिर्गी के घरेलू उपाय)
डॉ. बंसल ने कहा कि अगर दवाएं ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं और समय-समय पर दवाएं लेने के बाद भी मिर्गी के दौरे आ रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब आपको हार मान लेनी चाहिए। बल्कि इसके अन्य भी इलाज हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं -
सर्जरी - जब दवाओं की मदद से मिर्गी कंट्रोल नहीं हो पाती है, तो उसके बाद अन्य इलाज तरीके अपनाए जाते हैं, जिसमें सर्जरी भी एक है। एडवांस टेक्नोलॉजी की इमेजिंग मशीनों की मदद से मरीज की ब्रेन सर्जरी की जाती है और ब्रेन के उस हिस्से की रिपेयर किया जाता है या निकाल दिया जाता है, जहां से मिर्गी के दौरे शुरू हो रहे हैं। ब्रेन का कौन सा हिस्सा प्रभावित है, इसके आधार पर सर्जरी की तकनीक भी अलग-अलग हो सकती हैं जिनमें लेजर सर्जरी और थर्मल सर्जरी आदि शामिल हैं।
नर्व स्टीमुलेशन - अगर किसी तंत्रिका में खराबी के कारण बार-बार मिर्गी के दौरे आ रहे हैं, तो ऐसे में नर्व स्टीमुलेशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी मदद से प्रभावित तंत्रिका को कंट्रोल किया जाता है। नर्व स्टीमुलेशन थेरेपी आमतौर पर दो प्रकार की होती हैं वेगन नर्व स्टीमुलेशन और रिस्पोंस्टीमुलेटर।
डाइट व लाइफस्टाइल - मिर्गी के बार-बार दौरे पड़ने के पीछे कई बार खराब जीवनशैली या फिर अनहेल्दी डाइट भी हो सकते हैं। इसलिए इनकी पहचान होना भी बहुत जरूरी है। डॉक्टर ट्रीटमेंट के दौरान मरीज की डाइट में कुछ जरूरी बदलाव करा सकते हैं और साथ ही उसे लाइफस्टाइल में कुछ सुधार लगाने के लिए अच्छे सुझाव भी दे सकते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।