National Doctor's Day 2020: कोविड-19 मरीजों की सेवा में समर्पित डॉक्टर्स कैसे रखते हैं खुद को सेफ, जानें डॉक्टर की जुबानी

भारत में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' (National Doctor's Day 2020) सेलिब्रेट किया जाता है। कोविड-19 महामारी के दौर में डॉक्टर्स की अहमियत क्या है, यह पूरा विश्व देख-समझ रहा है। जहां आम लोग अपने घरों में सेफ हैं, वहीं हेल्थ केयर वर्कर्स रात-दिन बिना अपनी जान की परवाह किए हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि किस तरह एक डॉक्टर अपनी और अपने परिवार को सुरक्षित रखता है.....

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Written By: Anshumala | Updated : June 29, 2020 2:17 PM IST

National Doctor's Day 2020: भारत में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' (National Doctor's Day 2020) सेलिब्रेट किया जाता है। भारत के प्रसिद्ध एवं महान चिकित्सक और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. बिधान चंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) को सम्मान और श्रद्धांजलि देने के लिए उनके जन्म के उपलक्ष्य (1 जुलाई 1882) और पुण्यतिथि (1 जुलाई 1962) पर मनाया जाता है। चिकित्सा जगत में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। भारत में 'नेशनल डॉक्टर्स डे' (National Doctor's Day 2020) की शुरुआत वर्ष 1991 में की गई थी।

जैसा कि हम सभी जानते हैं समाज में चिकित्सकों (Doctors) को भगवान का दर्जा दिया गया है। इनका महत्व हर एक बीमार व्यक्ति बखूबी जानता है। आज पूरा विश्व कोरोना महामारी (Covid-19 pandemic) से जूझ रहा है और तमाम डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बिना रात-दिन हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन हेल्थ केयर वर्कर्स के कारण ही कोरोना से पीड़ित लोग ठीक होकर अपने घर लौट पा रहे हैं।

डॉक्टर्स के लिए सोशल डिस्टेंसिंग कहां?

एक तरफ हर कोई कोरोनावायरस से खुद को बचाए रखने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहा है, अपने-अपने घरों में बंद है, तो वहीं तमाम डॉक्टर्स अपना अधिक वक्त हॉस्पिटल में बिता रहे हैं। उस हॉस्पिटल में, जहां कोरोनावायरस से संक्रमित होने का सबसे अधिक खतरा रहता है। कोरोना पीड़ितों का इलाज करते समय हॉस्पिटल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बार-बार मन में यही सवाल उठता है कि आखिर किस तरह से हेल्थ केयर वर्कर्स  हॉस्पिटल से लेकर घर तक अपनी सेहत के साथ ही अपने परिवार को कोविड-19 से सुरक्षित रखते हैं? इस पर हमें विस्तार से बताया यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर, स्ट्रैटजी एंड कोविड-19 मैनेजमेंट डॉ. आर के मनी ने....

हॉस्पिटल में कितने सुरक्षित हेल्थ केयर वर्कर्स?

आज कोरोना देश में काफी तेजी से फैल रहा है। बाहर तो कोरोना का खतरा है ही, लेकिन सबसे ज्यादा खतरा हॉस्पिटल के अंदर होता है। खासकर, हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए जो कोविड-19 मरीजों का रात-दिन इलाज कर रहे हैं। हॉस्पिटल का वातावरण ऐसा होता है, जहां कोरोना से संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में डॉक्टर्स के लिए मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं। कोरोना पेशेंट का इलाज करते हुए खुद को सुरक्षित रखना कठिन होता है।

जब हम हॉस्पिटल में कोरोना के मरीजों के इलाज और देखभाल की बात करते हैं, तो उसमें सिर्फ डॉक्टर्स ही शामिल नहीं होते हैं। एक बहुत बड़ी टीम होती है, जिसमें डॉक्टर्स के अलावा नर्स, असिस्टेंट, थेरेपिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, वॉर्ड ब्वॉय आदि होते हैं। ये सभी रिस्क में होते हैं। कोविड-19 एक संक्रामक डिजीज है। जब कोई कोविड पेशेंट खांसता, छींकता है, तो वातावरण में वायरस संक्रमित ड्रॉपलेट्स कई घंटों तक मौजूद रहते हैं, जिससे एक स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। (National Doctor's Day 2020 in Hindi)

हाई रिस्क जोन में होते हैं हेल्थ केयर वर्कर्स

जो भी हेल्थ केयर वर्कर्स कोविड वार्ड में ड्यूटी करते हैं, उन्हें कोरोना मरीजों के साथ दिन भर कई एक्टिविटीज करनी होती हैं। इलाज के दौरान कई प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। कोविड वार्ड हाई रिस्क जोन होता है, जहां एरोसोल (Aerosol) ड्रॉपलेट्स मौजूद होते हैं। कोविड मरीजों को ऑक्सीजन लगाना, नॉनइन्वेसिव वेंटिलेशन या एनआईवी प्रोसीजर (Noninvasive ventilation) करना, इन्क्यूबेटिंग, दवाई देना जैसी तमाम कई प्रक्रियाओं के दौरान हेल्थ केयर वर्कर्स को मरीजों के नाक, मुंह, चेहरे, शरीर को छूना होता है।

उनके आस-पास मौजूद हर चीज जैसे बेड, मैट्रेस, मशीन, मॉनीटर, वेटिंलेटर आदि में ड्रॉपलेट्स मौजूद होते हैं। वहां के वातावरण में एरोसोल (Aerosol) ड्रॉपलेट्स जेनरेट होते हैं, जो हमारे लिए बेहद ही खतरनाक हो सकते हैं। जब एक हेल्थ केयर वर्कर रिस्क जोन में होता है, तो उसके आसपास मौजूद अन्य लोग, नॉन-कोविड मरीज, दूसरे कुलीग भी रिस्क में होते हैं। ऐसे में हमारी एक छोटी सी लापरवाही दूसरों के लिए  जोखिम बढ़ सकता है।

डॉक्टर किस तरह से खुद को करते हैं प्रोटेक्ट

1 जैसा कि कोविड-19 के फैलने का मुख्य जरिया है (Covid-19 Mode of transmission) एरोसोल, डायरेक्ट ड्रॉपलेट्स, मरीजों के कॉन्टैक्ट में आना। ऐसे में डॉक्टर्स के लिए सबसे जरूरी है एयर-वे प्रोटेक्शन को अपनाना, इसलिए एक डॉक्टर और वहां मौजूद सभी हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए एन-95 मास्क पहनना बहुत जरूरी है। एन-95 एक बेहतरीन मास्क माना गया है, क्योंकि ये वायरस को 95 प्रतिशत तक फिल्टर कर देता है। साथ ही एसएचपी 3 मास्क 97 प्रतिशत वायरस को फिल्टर करता है, इसलिए इसका भी हम इस्मेताल करते हैं। यह हाई लेवल रेस्पिरेटर या मास्क होता है।

2 आंखों के जरिए भी कोरोना से संक्रमित होने के चासेंज रहते हैं। ऐसे में हम अच्छी तरह से फिट होने वाले गॉगल्स पहनते हैं।

3 फेस शील्ड का यूज करना भी जरूरी होता है, क्योंकि इससे ड्रॉपलेट्स, फ्लूइड चेहरे पर डायरेक्ट नहीं पड़ता है। फेस शील्ड डॉक्टर्स को सुरक्षित रखता है। मरीजों को इन्क्यूबेटिंग के दौरान इसकी जरूरत पड़ती है। (National Doctor's Day 2020)

4 हेयर कैप के जरिए भी हम खुद को प्रोटेक्ट करते हैं, क्योंकि बालों में भी ड्रॉपलेट्स लगने का रिस्क रहता है।

5 पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विप्मेंट (PPE) कोविड-19 मरीजों को देखने वाले डॉक्टर्स के लिए सबसे अहम होता है। इसे पहने बिना कोई भी कोविड-19 मरीज के पास नहीं जा सकता है। पीपीई एक डॉक्टर के लिए सुरक्षा कवच (Armor) की तरह होता है। इसमें मुख्य रूप से पूरा शरीर कवर हो जाता है।

6 दो ग्लव्स भी पहनते हैं। पहले इनर ग्लव्स और फिर दूसरा ग्लव्स पहनते हैं। पहले ग्लव्स को मरीज को छूने, इलाज के बाद उतार दिया जाता है। ग्लव्स को 70 प्रतिशत एल्कोहल बेस्ट सैनिटाइजर से सैनिटाइज किया जाता है, ताकि डिसइंफेक्ट हो जाए। हैंड हाइजीन का पूरा ख्याल रखते हैं, इसके लिए 20 सेकेंड हैंड वॉशिंग प्रोसीजर अपनाते हैं।

पीपीई के लिए डॉनिंग-डॉफिंग (Sequence for donning-doffing for PPE)

पीपीई को पहनने की प्रक्रिया को डॉनिंग (Donning) कहते हैं और बिना किसी की मदद के इसे पहनना आसान नहीं होता है। जब पीपीई को उतारते हैं, तो उसे डॉफिंग (Doffing) कहते हैं। पीपीई के सारे फ्रंट सरफेस पर वायरस होते हैं। जब एक डॉक्टर अपनी ड्यूटी समाप्त करता है, तो वह वायरस लोडेड होता है। ऐसे में पीपीई को इस तरीके से उतारना होता है, ताकि आप किसी भी आउटर सरफेस को ना छू पाएं और अंत में उसे सुरक्षित तरीके से निकाल दें।

Doctor’s Day 2020: जब मिलें डॉक्टर से तो इस तरह पूछें अपनी सेहत और बीमारी से जुड़े सवाल

डॉफिंग और डॉनिंग दोनों के लिए ही एक खास जगह तय रहती है। जब आप आईसीयू से बाहर आते हैं, तो डॉफिंग रूम में जाते हैं और साइंटिफिक तरीके से इक्विप्मेंट को डॉफ करते हैं। उन्हें प्रॉपली डिस्पोज करते हैं। और फिर ड्यूटी पूरी हो जाने के बाद डॉक्टर्स तुरंत स्नान करते हैं। इसके बाद डॉक्टर्स हॉस्पिटल के किसी भी ग्रीन जोन में नहीं जाते हैं, जहां नॉन-कोविड पेशेंट होते हैं। डॉक्टर्स को सिर्फ कोविड-एरिया में ही रहना होता है, जब तक कि ड्यूटी पूरी ना हो जाए। जब एक डॉक्टर ड्यूटी पर आता है, तो अपने नॉर्मल कपड़े उतार कर पहले स्क्रब सूट और फिर पीपीई पहनता है। हर दिन डॉक्टर्स के ड्यूटी पर आने पर बॉडी टेम्परेचर ली जाती है। तापमान अधिक आने पर उन्हें घर पर रहने की सलाह दी जाती है।

डॉक्टर्स घर पर किन बातों का रखें ख्याल

डॉक्टर्स घर जाते हैं, तो काफी सावधानी बरतनी चाहिए। जो हेल्थ केयर वर्कर घर पर सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन नहीं कर सकते, उनके लिए हॉस्पिटल में ही व्यवस्था होनी चाहिए। घर पर रहते भी हैं, तो एक अलग कमरे में रहें। उस कमरे में किसी और को ना आने दें। अपना सामान जैसे गिलास, तौलिया, पानी का बोतल आदि अलग रखें। घर में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखें। हॉस्पिटल से आने के बाद जूते बाहर खोल दें। सबसे पहले कपड़े बदलें। स्नान कर लें।

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