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Written By: Jitendra Gupta | Updated : November 7, 2020 4:03 PM IST
National Cancer Awareness Day 2020: पुरुषों और महिलाओं दोनों में आम होते हैं ये 3 तरह कैंसर, पढ़ें एक्सपर्ट की जरूरी सलाह
National Cancer Awareness Day 2020: कैंसर मौजूदा वक्त में एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज के साथ साथ सामाजिक विश्लेषण भी करते रहना जरूरी है क्योंकि भारतीय परिवेश में समाज के एक बहुत बड़े तबके में महिलाओं के लिए जिस तरह के नियम गढ़े गए हैं वे महिला केन्द्रित कैंसरों के देर से या फिर पता ही नहीं चल पाने का कारण बनते हैं। यही कारण है कि महिला से संबंधित कैंसर के आंकड़ों में लगातार इजाफा होता है, एक आंकड़े के अनुसार देश में हर आठ मिनट में सर्वाइकल कैंसर से एक महिला की मौत होती है। यह न केवल एक भयावह स्थिति है बल्कि चिंताजनक सामाजिक दृष्टिकोण की और भी इशारा करता है।
वहीं बात करें पुरुषों की तो एक अध्ययन के अनुसार, 70 वर्ष की उम्र से पहले कैंसर से होने वाली मौत का जोखिम पुरुषों में 7.34 फीसदी है।
वहीं स्त्रियों में यही दर 6.28 फीसदी है।
इसके अलावा बदलते वक्त में पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। हम ये सब आपको इसलिए बता रहे हैं क्योंकि आज राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस है और सभी को कैंसर से जुड़ी जानकारियों का पता होना चाहिए।
50 या 55 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ने से होने वाली समस्याओं का होना आम है लेकिन किसी भी तरह के लक्षणों को नजरंदाज करना सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना यह भी है इसके इस आंकड़े का एक कारण जागरूकता की कमी भी है। यह भी कहा गया कि धूम्रपान और जंक फूड का सेवन करने वाले पुरुषों में मुख्या रूप से इस कैंसर का खतरा है।
साल 2018 में स्त्री और पुरुष दोनों के नए मामलों को मिलाकर 5.9 फीसदी लंग कैंसर का हिस्सा था। लेकिन इस कैंसर के पुरुषों के कुल नए मामलों में 8.5 फीसदी हिस्सा था।
इसी साल पुरुषों में कैंसर के कुल नए मामलों में इस कैंसर का 6.4 फीसदी हिस्सा था जो कि स्त्रियों के कैंसरों के कुल मामलों में 3.4 फीसदी था।
कैंसर के जोखिम से बचने के उपाय बता रहे हैं डॉक्टर अजय शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एक्शन कैंसर अस्पताल।
कैंसर जल्दी डायग्नोज़ न होने के बहुत से कारण होते हैं, लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि कैंसर के ही अधिकतर केसेस में डायग्नोज़ न होने के कारण बहुत व्यापक होते हैं, चाहे वह सामाजिक दृष्टिकोण की वजह से हिचकिचाहट हो या लापरवाही की वजह से बीमारी का बढ़ता जाना हो। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कैंसर में इलाज प्रक्रिया में इसका समय से डाईग्नोज़ होना इसके इलाज के कामयाबी की कहानी लिखता है। ध्यान रखें, जितना जल्दी डाईग्नोज़ किया जाएगा आगे आने वाला जोखिम उतना ही कम होगा।
कैंसर के ही दायरे में यदि देखें तो बहुत से कैंसरों की जड़ें बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री में होतीं हैं, और हालाँकि यह बात अन्य बहुत सी बीमारियों पर भी लागू होती है। बहुत ज़रूरी है कि अपने परिवार में किसी भी बीमारी की फैमिली हिस्ट्री की पर नज़र रखें और उसी अनुसार अपनी भी जांच करवाएं। यह सावधानी कैंसर के केस में ख़ास तौर पर बरतें।
इसमे कोई दोराय नहीं कि समाज में व्याप्त पुरुषों की सख्त छवि इस समस्या का इजाफा होने के कारणों में से एक रही है। ऐसे में उनको हमेशा मज़बूत रहना और अपनी कमजोरियां ज़ाहिर न करने की नसीहत बचपन से आम होती है। जिसके परिणाम स्वरुप वे अपनी दिक्कते अक्सर ज़ाहिर नहीं करते। ऐसे में उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। इस बदलाव को लाने के लिए सामाजिक स्तर पर प्रयास करने होंगे।
सबसे बड़ी बात है कि कैंसर को केवल बीमारी के ही रूप में देखने की प्रवृति में इजाफा हो, ताकि एक तरफ मरीज़ अपनी बीमारी को लेकर छोटा न महसूस करे और इसके इलाज के तरीकों में भी लगतार आधुनिकता आए।