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भारत में इन 5 बीमारियों के कारण होती हैं सबसे ज्यादा मौत, लक्षण पहचानने में गलती कर देते हैं लोग

Jaanleva Bimari ke Naam: बहुत सी ऐसी बीमारियां जो तेजी से बढ़ रही हैं और जानलेवा भी हैं उनकी सही समय पर पहचान होना जरूरी है। इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी ही बीमारियों के बारे में खासतौर पर बताने वाले हैं।

भारत में इन 5 बीमारियों के कारण होती हैं सबसे ज्यादा मौत, लक्षण पहचानने में गलती कर देते हैं लोग

Written by Mukesh Sharma |Published : February 16, 2026 11:05 AM IST

Fatal Disease in Hindi: बीमारियां सभी अलग-अलग प्रकार की होती हैं, कोई गंभीर होती है तो कोई थोड़ा परेशान करने वाली होती है। कुछ बीमारियां ऐसी भी होती हैं जो अपने आप ठीक हो जाती हैं जबकि कुछ बीमारियां जीवनभर के लिए शरीर को लग जाती हैं। वहीं कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं, जो सबसे ज्यादा जानलेवा मानी जाती हैं और दुनियाभर में इनके कारण लोगों को बहुत जाने जा ही होती हैं। यह बात सच है कि जानलेवा बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसलिए यह पता होना जरूरी है कि कौन सी बीमारी सबसे ज्यादा जानलेवा है। शोध बताते हैं कि भारत में बीमारियों से होने वाली मौतों की स्थिति चिंताजनक है। विशेषज्ञों के अनुसार एक नहीं कई बीमारियां ऐसी हैं, जो जानलेवा साबित हो रही हैं। सबसे बड़ी गलती लोग यह कर रहे हैं कि वह इनके लक्षणों को नहीं पहचान पाते हैं। हालांकि सही जानकारी और समय पर पहचान कर इन बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। तो आइए आज इन बीमारियों को समझा जाए।

हृदय और धमनियों के रोग (Cardiovascular Disease)

हार्ट डिजीज से होने वाली मृत्यु का एक बड़ा आंकड़ा है और रिसर्च कहते हैं कि दिल की धड़कन असामान्य होना, छाती में दर्द होना या दबाव महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ होना और थकान महसूस होना कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के सामान्य लक्षण हैं। लोग अक्सर इसे हल्के तौर पर लेते हैं और डॉक्टर से संपर्क तभी करते हैं, जब स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में आपको इस परेशानी से बचने के लिए जीवनशैली सुधार करना चाहिए, संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, वहीं नियमित व्यायाम और समय पर दवाइयां लेना इस बीमारी को नियंत्रित करने में मदद करता है।

सांस से जुड़ी दीर्घकालिक बीमारियां (Breathing Related Chronic Disease)

सांस लेने की समान्य प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली बीमारियों को जानलेवा बीमारियों की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि यह शरीर के एक बेहद जरूरी प्रक्रिया को प्रभावित करती है जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी (COPD)। बढ़ते प्रदूषण में अस्थमा जैसी बीमारियां हमारे देश में आम सी हो गई हैं। लगातार खांसी, सांस फूलना, गहरी सांस लेने में कठिनाई और थकावट इसके मुख्य संकेत हैं। अध्ययन इसका कराण धूम्रपान और प्रदूषण को बताते हैं। मगर समय पर सही इलाज और जीवन-शैली को अपनाकर आप अपने जीवन को लंबा और स्वस्थ बना सकते हैं।

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टीबी (Tuberculosis)

दुनियाभर की खतरनाक और जानलेवा बीमारियों में से एक टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस भी है, लेकिन यह भी सच है कि भारत में टीबी एक आम बीमारी बनती जा रही है। लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार और रात में पसीना आने जैसी परेशानियां इसमें आमतौर पर देखी जाती है। इसके लक्षण सामान्य बीमारियों से मेल खाते हैं और इसलिए कई बार लोग नहीं पहचान पाते हैं और शुरुआती लक्षणों को सामान्य सर्दी या खांसी समझ लेते हैं, जिससे इलाज में देरी होता है।। अध्ययन और विशेषज्ञ इस बात को पुष्ट करते हैं कि जल्दी पहचान और पूर्ण इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।

बढ़ा हुआ डायबिटीज (Increased Level of Diabetes)

डायबिटीज जहां एक भारत में एक कॉमन बीमारी बनती जा रही है ऐसे में यह समझना होगा कि अगर लंबे समय से डायबिटीज कंट्रोल नहीं है तो यह शरीर के अंदर कई गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। डायबिटीज में शरीर में शुगर लेवल नियंत्रित नहीं रहता। बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, थकान और धुंधली दृष्टि इसके प्रमुख लक्षण हैं। विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि समय पर निदान और इलाज न होने पर हार्ट डिजीज, किडनी की समस्या और दृष्टि संबंधी रोग बढ़ सकते हैं और बात जान पर आ सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार का सेवन और नियमित जांच बेहद जरूरी है।

कैंसर (Cancer)

कैंसर भी अब हमारे देश की एक बड़ा परेशानी बन रहा है। चिंता की बात है कि कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआती लक्षण अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, जिन्हें समय से नहीं पहचाना जाता। ऐसे में अनियमित वजन घटना, लगातार दर्द, गांठ या खून आना चेतावनी है और कैंसर के भी। आपको यह याद रखना होगा कि प्रारंभिक पहचान और समय पर इलाज ही कैंसर से जीवन की रक्षा कर सकते हैं।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।