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Written By: Jitendra Gupta | Updated : March 24, 2023 5:06 PM IST
TB से जुड़े इन 4 मिथ पर बिल्कुल भी न करें भरोसा! 90 फीसदी लोग सच मानकर पूरे शरीर में फैला लेते हैं टीबी
ट्युबरकुलोसिस (टीबी) एक संक्रामक मायकोबैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन इसका असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता हैं। नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. ग्यानेंद्र अग्रवाल का कहना है कि यह एक गंभीर बीमारी है, जिसके कारण हर साल दुनिया भर में एक मिलियन से अधिक मौतें होती हैं। टीबी की रोकथाम एवं उपचार के प्रयासों के बावजूद इस रोग के बारे में कई गलत अवधारणाएं फैली हैं। आइए आपको बताते हैं टीबी से जुड़ी कुछ आम गलत अवधारणाओं के बारे में, जिनपर लोग बहुत जल्दी विश्वास कर लेते हैं।
टीबी दुनिया भर में मौतों के दस मुख्य कारणों में से एक है और एक ही संक्रामक कारक की वजह से मौतों का मुख्य कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 10.6 मिलियन लोग टीबी से संक्रमित हुए, इनमें से 6 मिलियन पुरूष, 3.4 मिलियन महिलाएं और 1.2 मिलियन बच्चे थे। हालांकि टीबी सभी देशों में हर उम्र के लोगों में पाया जाता है, लेकिन इसका उपचार एवं रोकथाम संभव है।
हालांकि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन इसका असर शरीर के लगभग हर अन्य अंग पर पड़ता है। यह लिम्फ नोड्स, पेट, गुर्दों, रीढ़ की हड्डी और दिमाग आदि सभी हिस्सों को प्रभावित करता है।
टीकाकरण, स्क्रीनिंग के द्वारा टीबी की रोकथाम संभव है। जल्दी निदान होने पर टीबी के सक्रिय मामलों में उपचार की सफलता बढ़ती है।
टीबी एक प्रकार के बैक्टीरिया- मायकोबैक्टीरियम ट्युबरकुलोसिस की वजह से होता है। यह बैक्टीरिया हवा से फैलता है, जब एक संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या किसी से बात करता है। टीबी का इलाज किया जा सकता है। डॉ. ग्यानेंद्र अग्रवाल का कहना है कि उचित उपचार से टीबी का इलाज किया जा सकता है, टीबी के इलाज के लिए छह से नौ महीने तक एंटीबायोटिक दवाओं का विशेष संयोजन दिया जाता है। इन्फेक्शन को पूरी तरह से खत्म करने के लिए जरूरी है कि मरीज इलाज का कोर्स पूरा करे।
सचः टीबी सिर्फ उन्हीं लोगों को हो सकता है जिनका इम्यून सिस्टम (बीमारियों से लड़ने की ताकत) कमजोर होता है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, जैसे एचआईवी/एड्स के मरीज़ों में टीबी की संभावना अधिक होती है। लेकिन सामान्य व्यक्ति भी अगर बैक्टीरिया के संपर्क में आए तो उसे टीबी का इन्फेक्शन हो सकता है।
सचः हालांकि पहले टीबी के मामले अधिक पाए जाते थे, लेकिन आज भी यह स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। वास्तव में दुनिया के कुछ हिस्सों में टीबी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें उप-सहारा अफ्रीका और एशिया के कुछ भाग शामिल हैं।
टीबी का निदान हमेशा आसान और सरल होता है।
हालांकि यह सच है कि ज़्यादातर मरीज़ों में बलगम की जांच और छाती के एक्स-रे द्वारा टीबी का निदान किया जा सकता है। लेकिन कभी कभी टीबी का निदान मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण कई अन्य बीमारियों से भी मेल खाते हैं। आमतौर पर टीबी के निदान के लिए नैदानिक जांच, लैब में जांच और इमेजिंग अध्ययन किए जाते हैं।
सचः टीबी के सभी मामले संक्रामक नहीं होते। जिन लोगों के फेफड़ों में टीबी का सक्रिय संक्रमण होता है, सिर्फ वहीं लोग बैक्टीरिया को फैला सकते हैं। जिन लोगों में टीबी का लेटेंट इन्फेक्शन (यानि जिनमें लक्षण सक्रिय रूप से नहीं दिखते) होता है वे संक्रामक नहीं होते।
सचः इस बात को कोई प्रमाण नहीं कि टीबी का उपचार प्राकृतिक तरीकों से किया जा सकता है। टीबी के उपचार का एकमात्र प्रभावी तरीका यही है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं का उचित संयोजन लिया जाए।
कुल मिलाकर, टीबी दुनिया भर में पाई जाने वाली गंभीर समस्या है, जिसके बारे में उचित जानकारी और समझ होना ज़रूरी है। टीबी मायकोबैक्टीरिया के कारण होता है, उचित उपचार द्वारा जिसका इलाज संभव है। टीबी शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है और इसकी रोकथाम संभव है। हालांकि टीबी से जुड़ी कई गलत अवधारणाएं भी हैं जैसे टीबी सिर्फ उन्हीं लोगों को होता है, जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो, टीबी अब अतीत की बात हो चुकी है और टीबी का इलाज प्राकृतिक तरीकों से संभव है। टीबी की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए ज़रूरी है कि मरीज़ों को सही जानकारी मिले और वे चिकित्सा पेशेवर की मदद लें।