खाने-पीने की गलत आदतों से होने वाले मुंह के छाले बन सकते हैं बड़ी परेशानी का सबब
अत्यधिक मिर्च-मसालों का सेवन भी इसके लिए जिम्मेदार होता है, क्योंकि यदि पेट की क्रिया सही नहीं है, तो उसकी प्रतिक्रिया मुंह के छालों के रूप में प्रकट हो सकती है।
Written by Yogita Yadav|Published : February 25, 2019 11:37 AM IST
इन दिनों मौसम बदल गया है। इसके बावजूद कुछ लोगों ने अपने खानपान की आदतों में बदलाव नहीं किया है, जिससे शरीर में गर्मी बढ़ने लगती है। मुंह में होने वाले छाले शरीर की इसी गर्मी के संकेत हैं। अगर आपने इस संकेत को नजरंदाज किया तो ये आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है। इससे कैंसर होने का भी खतरा रहता है।
अत्यधिक मिर्च-मसालों का सेवन भी इसके लिए जिम्मेदार होता है, क्योंकि यदि पेट की क्रिया सही नहीं है, तो उसकी प्रतिक्रिया मुंह के छालों के रूप में प्रकट हो सकती है।
कई बार कोई चीज खाते समय दांतों के बीच जीभ या गाल का हिस्सा आ जाता है, जिसकी वजह से छाले उत्पन्न हो जाते हैं। ऐसे छाले आमतौर पर मुंह की लार से खुद ही ठीक हो जाते हैं।
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एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव से भी मुंह में छाले हो सकते हैं, विशेषकर लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से। अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करने से हमारी आंतों में अच्छे जीवाणुओं की संख्या घट जाती है। नतीजतन मुंह में छाले पैदा हो जाते हैं।
दांतों की गलत संरचना की वजह से मुंह में छाले होना आम बात है। यदि दांत आड़े-तिरछे, नुकीले या आधे टूटे हुए हैं और इसकी वजह से वे जीभ या मुंह में चुभते हैं या उनसे लगातार रगड़ लगती रहती है, वहां छाले उत्पन्न हो जाते हैं। यदि कोई तीखा दांत लंबे समय तक जीभ या गाल से घर्षण करता रहे या चुभता रहे, तो यह आगे चलकर कैंसर का कारण भी बन सकता है। यानी इसकी पूरी जांच और उपचार जरूरी हो जाता है।
सुपारी आदि खाने के बाद बिना कुल्ला किए रात को सो जाने से भी छाले हो जाते हैं। इसके अलावा तंबाकू, पान-मसाला और धूम्रपान भी मुंह के छालों का कारण बनते हैं।
मानसिक तनाव भी एक वजह है मुंह के छालों की। यह तनाव चाहे परीक्षा का हो या नौकरी में काम के दबाव का या अन्य किसी अन्य बात का।
यदि छाले सामान्य हैं, तो विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स तथा फॉलिक एसिड की गोलियां दो तीन दिन तक लेने से ठीक हो जाते हैं।
छालों पर लगने वाले दर्द निवारक लोशन भी बाजार में मिलते हैं। इनके प्रयोग से तुरंत राहत मिलती है। इसके अलावा बोरो ग्लिसरीन भी लगाई जा सकती है या पोटैशियम परमैग्नेट के घोल से कुल्ले करना चाहिए।
यदि छालों की वजह से कब्ज हो, तो ईसबगोल की एक चम्मच भूसी रात को लेनी चाहिए।
यदि दांतों के तीखेपन की वजह से छाले होते हों, तो उन्हें घिसवा लेना चाहिए। यदि डॉक्टर उस दांत को निकालने का परामर्श दे, तो निकलवाने में कोई हर्ज नहीं है।
आड़े-तिरछे दांतों को ठीक करने के लिए बांधे गए तारों की वजह से भी मुंह में छाले हो सकते हैं, क्योंकि ये बार-बार मसूढ़ों से टकराते हैं।
छाले होने पर गर्म चाय-कॉफी तथा मिर्च-मसालों का सेवन न करें, क्योंकि इनसे तकलीफ बढ़ सकती है।
अधिक कठोर टूथब्रश के इस्तेमाल से भी मसूढ़े छिल जाते हैं या उनमें घाव हो जाते हैं। इसलिए हमेशा मुलायम ब्रश का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
याद रखें, यदि कोई भी छाला सप्ताह भर में ठीक न हो, तो उसे गंभीरता से लें तथा डॉक्टर से मिलें।
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छालों से बचने के लिए मुंह और पेट की स्वच्छता का ध्यान रखें। मौसम के प्रभाव से भी मुंह में छाले हो जाते हैं, जैसे बहुत अधिक गर्मी।
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