
... Read More
Written By: Anshumala | Updated : August 22, 2020 1:15 PM IST
वेस्ट नील वायरस से स्पेन में साल की पहली मौत, जानिए क्या है वेस्ट नील वायरस। © Shutterstock.
Mosquito Borne Infection: दुनिया भर में कोरोनावायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा और हर दिन किसी ना किसी खतरनाक वायरस के कारण हो रही मौत की खबर सामने आती रहती है। स्पेन से एक खबर सामने आई है कि यहां मच्छर जनित संक्रमण (Mosquito borne infection in hindi) वेस्ट नील वायरस (West Nile virus) के कारण इस साल की पहली मौत हुई है। वहां के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, स्पैनिश टीवी नेटवर्क टेल्सिनको ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा कि ला पुएब्ला डेल रियो शहर के 77 वर्षीय व्यक्ति की गुरुवार रात वेस्ट नील वायरस के कारण मौत हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, रोगी शहर के पास एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर में था और वह कई दिनों से वहां ट्रीटमेंट करा रहा था। एल पैस अखबार के अनुसार, स्पेन देश (mosquito borne infections in Spain) के दक्षिणी क्षेत्र एंडालूसिया (Andalusia) में अब तक का सबसे बड़ा वेस्ट नील प्रकोप देखा गया, जहां अब तक कुल 35 लोग संक्रमित हो चुके हैं। प्रकोप से संक्रमित लोगों की औसत आयु 60 है, जिनमें से और 71 प्रतिशत पुरुष हैं।
इस क्षेत्र के दो सबसे अधिक प्रभावित शहर नदी के किनारे बसे हैं। चूंकि, वायरस (West Nile virus) मच्छरों द्वारा फैलता है और यहां नदी से निकटता के चलते मच्छर अधिक हैं। क्यूलेक्स मच्छर (Culex Mosquito borne illness) द्वारा प्रेषित इस वायरस से संक्रमित लोगों में मृत्यु दर 0.1 प्रतिशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत संक्रमितों में इसके लक्षण नहीं दिखते।
वेस्ट नील वायरस एक मच्छर जनित रोग है, जो क्यूलेक्स मच्छर से फैलाता है। यह मच्छर गर्मी में अधिक सक्रिय रहता है। गर्मियों में वेस्ट नील बुखार से मच्छर-जनित संक्रमणों या रोगों के होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है, इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए। इस वायरस से जानलेवा न्यूरोलॉजिकल बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है। इंसान संक्रमित मच्छरों के काटने से वेस्ट नील वायरस से होने वाले संक्रमण का शिकार हो सकता है। साथ ही वायरस अन्य संक्रमित जानवरों, उनके खून या अन्य ऊतकों के संपर्क के माध्यम से भी फैल सकता है। इसकी पहचान वर्ष 1953 में नील डेल्टा क्षेत्र में हुई थी, तभी इसका नाम वेस्ट नील वायरस पड़ा। कहा जाता है कि यह वायरस सबसे पहले घोड़ों में पाया गया था और घोड़ों के जरिए यह मच्छरों में जाते हैं और फिर इंसान इससे संक्रमित होते हैं।
ऐसा माना जाता है कि वेस्ट नील वायरस से पुरुष अधिक संक्रमित होते हैं। और जो भी इससे संक्रमित होता है, उनमें लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं। बच्चे भी इस वायरस के शिकार हो सकते हैं। इसका इलाज घर में संभव नहीं है। ऐसे में समय रहते वेस्ट नील वायरस का इलाज करवाना जरूरी होता है। हालांकि, यह बहुत ही रेयर डिसऑर्डर है, जो 150 लोगों में से किसी 1 को ही बुरी तरह से प्रभावित करता है।
वेस्ट नील वायरस मच्छरों के जरिए इंसानों में प्रवेश करता है। जब आपके शरीर में यह वायरस प्रवेश कर जाता है, तो आपको सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द, चक्कर, उल्टी आना, त्वचा पर निशान पड़ने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसके अलावा निम्न लक्षणों पर भी गौर करना चाहिए-
स्किन पर चकत्ते उभर आना
लिम्फ नोड्स में सूजन होना
गर्दन में अकड़न हो जाना
ध्यान केंद्रित करने में समस्या, कोमा
दौरे पड़ना
मांसपेशियों में कमजोरी महसूस करना
याद्दाश्त चले जाना, भ्रम
चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन
बहुत गुस्सा आना आदि शामिल हैं।
मच्छरों से रहें बचकर वरना हो सकती हैं ये बीमारियां