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सर्दियों के मौसम में बदलता तापमान अक्सर अस्थमा के रोगियों को डराता है और वह ठंडे मौसम में मॉर्निंग वॉक पर जाते हुए डरते हैं। क्योंकि अस्थमा ठंडे मौसम से प्रभावित होता हैं। जब तापमान कम हो जाता है, तो बाहर जाने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। और ठंड में व्यायाम करने से खाँसी और घरघराहट जैसे लक्षण और भी तेज़ी से हो सकते हैं।
असल में अस्थमा होने पर वायुमार्ग (ब्रोन्कियल ट्यूब) सूज जाते हैं और सूजे हुए वायुमार्ग संकरे होते हैं और उनमें अधिक वायु नहीं होती है। इसलिए अस्थमा से पीड़ित लोगों को अक्सर सांस लेने में परेशानी होती है।जब आप बाहर निकलते हैं, तो अस्थमा के रोगी को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, इसलिए उसकी साँस लेने की गति बढ़ जाती है। अधिक हवा में लेने के लिए अक्सर वह अपने मुंह से सांस लेता हैं। मुंह से सीधे आने वाली हवा ठंडी और शुष्क रहती है। जो अस्थमा अटैक का कारण बनती है।
लेकिन आपको ठंड के मौसम में अपनी फिटनेस दिनचर्या में बदलाव की जरूरत नहीं। बस जरूरत है तो अपनी सेहत को लेकर और भी अधिक चौकन्ना हो जाने की।
आप हर रोज सुबह बाहर जाने से पहले यह चैक करें कि मौसम कैसा है? कहीं कल बहुत अधिक ठंडा तो नहीं? या कहीं बहुत ठंडी हवा तो नहीं चल रही? यदि ऐसा है तो आप पहले ही इस ठंड से बचने के लिए कुछ एक्स्ट्रा कपड़ों का प्रबन्ध कर सकते हैं और साथ में गर्म पानी की बॉटल भी ले सकते हैं। मौसम के हिसाब से सावधानियां बरतें।
इस बात का ध्यान रखें कि क्या कहीं आप के शरीर का तापमान अचानक से कम तो नहीं हो जाता? यदि ऐसा है तो आपको हाइपोथर्मिया है। इसमें आप का शरीर गरमी पैदा करने से अधिक ठंडा होने लग जाता है। अतः यदि आप को यह स्थिति है तो आप को इसके लक्षणों के बारे में पता कर लेना चाहिए। इन लक्षणों के कारण भी अस्थमा अटैक जल्दी ट्रिगर होता है।
हम अक्सर यह गलती करते हैं कि केवल अपने शरीर के मुख्य हिस्सों जैसे छाती, पेट आदि को तो गर्म कपड़ों से ढंक लेते हैं परंतु सिर व कानो को भूल जाते हैं।इन रास्तों से सर्दी बहुत जल्दी शरीर के अंदर प्रवेश करती है। इसलिए अस्थमा के रोगी को खासकर हमेशा अपने हाथों, कानो व सिर को ढंक कर रखना चाहिए।
वॉक पर जाने से 15 से 30 मिनट पहले अपने इन्हेलर का उपयोग करें। यह आपके वायुमार्ग को खोलता है ताकि आप आसानी से सांस ले सकें। साथ ही अस्थमा का दौरा पड़ने की स्थिति में अपने साथ एक इनहेलर ले जाएं।
सर्दियों में अतिरिक्त तरल पदार्थों का सेवन करें। ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो। ताकि फेफड़ों में बलगम ना जमने पाए और आसानी से शरीर से बाहर आए। अस्थमा के रोगियों में सर्द हवाओं के कारण जल्दी बलगम बनता है। जो कि सामान्य से अधिक मोटा और चिपचिपा होता है। अतिरिक्त बलगम के कारण अस्थमा अटैक की ज्यादा संभावना रहती है।