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Written By: akhilesh dwivedi | Published : June 7, 2018 3:20 PM IST
दुनिया में इंसान से लेकर जानवर तक का सृजन मातृत्व के द्वारा ही हुआ है। महिला मां बनकर एक सुखद एहसास का अनुभव करती है। ऐसा नहीं है कि यह एहसास सिर्फ मां को होता है, उनके परिवार के सभी सदस्यों को भी इसकी प्रसन्नता होती ही है। मां बनने को सुखद एहसास कहकर हमें उनके हेल्थ के बारे में भूल नहीं जाना चाहिए। हाल ही में हुए एक रिसर्च में मां बनने को लेकर एक चौंकाने वाली बात आयी है। इस रिसर्च में कहा गया है कि दो से ज्यादा बच्चे होना मां के हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है।
40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा
जिन महिलाऔं को पांच से अधिक बच्चे होते हैं उनमें 40 प्रतिशत तक हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है। रिसर्च करने वालों का कहना है कि प्रेगन्नेंसी और लेबर पेन से महिलाऔं के हार्ट पर दबाव पड़ता है। पहले से अगर बच्चे हैं तो यह तनाव और बढ़ जाता है। रिसर्च करने वाले बताते हैं कि बच्चों के पालन-पोषण में उलझकर मां अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाती हैं।
बच्चों की संख्या खतरे को बढ़ाती जाती है
वैज्ञानिक रिसर्च में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि दो से ज्यादा बच्चे होने से मां की हेल्थ पर काफी बुरा असर होता है। रिसर्च करने वालों का कहना है कि जिस महिला के जितने अधिक बच्चे होते हैं, उसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल होने का खतरा भी उतना अधिक होता है। एक्सपर्ट्स ने रिसर्च में यह भी पाया कि पांद से अधिक बच्चे वाली मां को अगले 30 साल में हार्ट अटैक होने का खतरा उन महिलाऔं के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा होता है, जिनके दो बच्चे होते हैं।
प्रेगन्नेंसी और लेबर पेन से पड़ता है हार्ट पर दबाव
मुख्य रिसर्चकर्ता डॉ क्लेयर ओलिवर विलियम्स बताते हैं कि हम यह तो जानते हैं कि प्रेगन्नेंसी और लेबर पेन से हार्ट पर काफी अधिक दबाव पड़ता है और बच्चों के पालन-पोषण और भी थकान देनी वाला काम होता है। यह अध्ययन 45 से 64 साल की उम्र की 8 हजार अमेरिकी महिलाओं पर किया गया।
गर्भपात के कारण और बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन महिलाओं का पहले गर्भपात हो चुका होता है उनमें हार्ट से संबंधित बीमारियों का खतरा 60 प्रतिशत बढ़ जाता है। इनमें सबसे ज्यादा हार्ट फेल होने का खतरा होता है। हार्ट फेल का खतरा 45 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
क्या कहते हैं पूर्व के रिसर्च
इस रिसर्च से पूर्व के अध्ययनों में इस परिणाम से कुछ अलग तथ्य भी हैं। मैनचेस्टर में ब्रिटिश कार्डियोवासकुलर सोसाईटी में पब्लिश रिसर्च में कहा गया कि स्तरपान कराने से महिलाओं की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है।
रिसर्च को फंड करने वाले ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर प्रोफेसर जेरेमी पियरसन कहते हैं कि "हालांकि यह शायद आश्चर्य की बात नहीं है कि अधिक बच्चे होने का मतलब यह हो सकता है कि मां के पास अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए कम समय है, यह शोध परिवार को महत्वपूर्ण बनाता है, यह हर किसी के लिए उनके दिल के स्वास्थ्य, खासकर व्यस्त माता-पिता के लिए जरूरी है।"
चित्रस्रोत: Shutterstock.