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भारत दुनिया की डायब्टीज़ की राजधानी है, हमारे देश में ग्लूकोस्ट्रिप्स की भारी मांग है। हर कोई एक ग्लूकोस्ट्रिप्स के लिए 25 से 30 रुपए ख़र्च नहीं कर सकता। गेज डायब्टीज़ सेंटर पर आने वाले 12 हज़ार से ज़्यादा पटीशनर्ज़ ने ग्लूकोस्ट्रिप्स का दाम करने की पटीशन पर हस्ताक्षर किए हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक 2015 में भारत में डायब्टीज़ के 69.1 मिलीयम मामले थे। आधुनिक जीवनशैली की वजह से मोटापे, अनिद्रा और दिल के रोग आदि समस्याएं पैदा हो रही हैं जिस से डायब्टीज़ का ख़तरा बढ़ रहा है।
गाडगे डायबिटीज सेंटर के डायब्टॉलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप गेज कहते हैं, ‘स्वास्थ्य की देखभाल का ख़र्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्लूकोस्ट्रिप्स की उत्पादन लागत मात्र 50 पैसे है जिसे मरीज़ को25 से 30 रुपए में बेचा जाता है। जो लोग दिन में एक से ज़्यादा बार अपने ब्लड ग्लूकोज़ का स्तर जांचने की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें प्रतिदिन 500 रुपए ख़र्च करने पड़ते हैं जो सब के लिए संभव नहीं होगा। अब वक्त आ गया है कि ग्लूकोस्ट्रिप्स के दाम की सीमा तैय की जाए।’
लाखों लोग अपनी मेहतन की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रक्त में ग्लूकोज़ की जांच पर ख़र्च करते हैं। हर रोज़ पटीशनरों की संख्या बढ़ती ही जा रही है, क्योंकि यह समय की मुख्य मांग है। वैसे तो सरकार ने ऐसी कई योजनाएं शुरू की हैं जिन से दवाओं के दाम कम होंगे, लेकिन डायबिटीज पीड़ितों को कोई राहत नहीं मिल रही है। टाइप 1 डायबीटीज के पीड़ितों को दिन में 3 से 4 बार अपनी जांच करनी होती है। इतनी महंगी कीमत होने की वजह से यह ख़र्च उठाना हर एक के लिए संभव नहीं है।
डॉ. प्रदीप गेज ने ग्लूकोस्ट्रिप्स को किफ़ायती बनाने के लिए इस मुहिंम की शुरूआत की है। देश में बढ़ते हुए डायबीटिज के मामलों पर लगाम लगाना बेहद ज़रूरी हो गया है।
प्रेस विज्ञप्ती
चित्र स्रोत: Shutterstock