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मानसून और सांस की बीमारियां, कैसे बढ़ता है Respiratory Infections का रिस्क

मानसून में सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा रहता है। इसके पीछे वातावरण में काफी ज्यादा नमी का होना होता है, जिसकी वजह से इंफेक्शन बढ़ने लग सकते हैं। आइए जानते हैं इस विषय को विस्तार से-

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 25, 2026 2:05 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Kuldeep Kumar

Respiratory Infections in Monsoon : मानसून का सीजन हम में से कई लोगों को पसंदीदा मौसम हो सकता है। झमाझम बारिश की बूंदें जब जमीन पर पड़ती हैं, तो  कई लोगों को सुकून दे जाती हैं। लेकिन यही मानसून कुछ लोगों के लिए घातक भी हो सकती है। मुख्य रूप से उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से सांस से जुड़ी परेशानियां हों। दरअसल, मानसून के सीजन में सांस से जुड़ी बीमारियां काफी तेजी से ट्रिगर होती हैं। इस सीजन में  हॉस्पिटल में सर्दी, खांसी, वायरल फ्लू, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सीके बिड़ला हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. कुलदीप कुमार ग्रोवर का कहना है कि मानसून में बढ़ी हुई नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव, फंगस और बैक्टीरिया की वृद्धि तथा वायु प्रदूषण में बदलाव श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में रेस्पिरेटरी इंफ्केशन का  खतरा बढ़ जाता है।

मानसून में क्यों बढ़ जाते हैं सांस से जुड़े इन्फेक्शन?

मानसून में कई ऐसे कारक होते हैं, जो सांस से जुड़े इंफेक्शन को बढ़ा सकते हैं। इन कारकों को अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं। आइए जानते हैं इन कारकों के बारे में विस्तार से-

Respiratory Infection Causes Image Credit : ChatGPT

1. हवा में बढ़ जाती है नमी

मानसून के दौरान वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। इस सीजन में अधिक नमी बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अधिक नमी वाले वातावरण में कई प्रकार के सूक्ष्मजीव लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मं कोशिश करें कि अपने आसपास नमी को कंट्रोल करके रखें।

2. फंगस और मोल्ड का बढ़ना

बारिश के मौसम में घरों की दीवारों, कालीनों, पर्दों और नम स्थानों पर फंगस तेजी से विकसित होती है। फंगस के सूक्ष्म कण  सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर एलर्जी और श्वसन संक्रमण का कारण बन सकते हैं। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के अनुसार, घरों में मौजूद मोल्ड अस्थमा के लक्षणों को गंभीर बना सकती है और फेफड़ों की समस्याओं को बढ़ा सकती है। इसलिए अस्थमा के मरीजों को इस सीजन में थोड़ा अधिस सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

मानसून में कौन-कौन सी सांस की बीमारियां बढ़ती हैं?

मानसून के सीजन में कुछ सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है, जैसे-

 Respiratory Infections

वायरल अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन : मानसून में सामान्य सर्दी-जुकाम, गले में खराश, छींक और खांसी जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इनका मुख्य कारण वायरल संक्रमण होता है।

ब्रोंकाइटिस  : इस सीजन में ब्रोंकाइटिस का खतरा भी रहता है।  यह एक  ऐसी स्थिति है, जिसमें श्वासनलियों में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से मरीजों को लगातार खांसी, बलगम और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

अस्थमा अटैक : मानसून के दौरान हवा में मौजूद एलर्जेंस, फंगस और पॉलेन अस्थमा के मरीजों में अटैक का जोखिम बढ़ा सकते हैं। American Academy of Allergy, Asthma & Immunology की स्टडी में में पाया गया कि उच्च आर्द्रता और फंगल स्पोर्स अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

निमोनिया  : कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में मानसून के दौरान बैक्टीरियल और वायरल निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है। यह फेफड़ों में संक्रमण पैदा करता है और गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड़ सकती है।

क्यों बच्चों और बुजुर्गों पर होता है मानसून का ज्यादा असर?

बच्चों की रोग इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होती, जबकि बुजुर्गों में प्रतिरक्षा क्षमता उम्र के साथ कमजोर होने लगती है। यही कारण है कि ये दोनों समूह संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी, एलर्जी या फेफड़ों की कोई पुरानी बीमारी है, उनमें संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

क्या मानसून में एयर पॉल्यूशन भी बढ़ा सकता है सांस की परेशानी?

डॉक्टर कहते हैं कि आमतौर पर माना जाता है कि बारिश से प्रदूषण कम हो जाता है, लेकिन कई शहरों में मानसून के दौरान नमी बढ़ने से हवा में मौजूद प्रदूषक कण  और एलर्जेंस लंबे समय तक बने रह सकते हैं। यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी के मुताबिक, वातावरण में काफी ज्यादा नमी के  कारण ये कण श्वसन तंत्र में अधिक आसानी से प्रवेश कर सकते हैं, जिससे खांसी, घरघराहट और सांस लेने में दिक्कत बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या COPD है, उनमें इसके लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं।

Air Pollution

ऑफिस और स्कूल जाने वालों को क्यों रहना चाहिए सतर्क?

मानसून में बंद कमरों, एयर-कंडीशनर वाले ऑफिस और भीड़भाड़ वाली जगहों पर वायरस तेजी से फैल सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी या फ्लू है, तो उसके छींकने या खांसने से निकलने वाली बूंदों के जरिए संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। इसी वजह है कि स्कूलों और ऑफिसों में वायरल संक्रमण के मामले मानसून के दौरान बढ़ जाते हैं।

क्या बारिश के बाद बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

NIH के अध्ययनों में पाया गया है कि बारिश के बाद वातावरण में मौजूद कुछ एलर्जेंस और फंगल स्पोर्स की मात्रा बढ़ सकती है। बारिश के कारण गीली सतहों पर सूक्ष्मजीव तेजी से विकसित होते हैं।इसके अलावा, कई लोग बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहते हैं, जिससे शरीर का तापमान प्रभावित हो सकता है और संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।

रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के सामान्य लक्षण क्या हैं?

मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन होने पर कुछ सामान्य लक्षण नजर आते हैं, जिसे नजरअंदाज न करें।

respiratory infection signs Image Credit : ChatGPT

  • लगातार खांसी होना।
  • गले मं खराश की समस्या
  •  नाक बहना या बंद होना
  •  बुखार होना।
  • सांस फूलना
  • सीने में जकड़न
  • सांस लेते समय घरघराहट जैसा महसूस होना।
  • काफी ज्यादा थकान होना।

अगर सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही हो या ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मानसून में खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

मानसून में अगर आप खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो कुछ बातों पर ध्यान दे सकते हैं, जैसे-

Dr Kuldeep

घरों में नमी न बढ़ने दें  : नमी और फंगस को बढ़ने से रोकने के लिए घर में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें। दीवारों और नमएरिया को कंट्रोल करें और सफाई का ध्यान रखें।

हाथों की सफाई का ध्यान रखें  : बार-बार हाथ धोने से वायरल संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है। WHO के अनुसार, हाथ धोना कई संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

भीड़भाड़ वाली जगहों में सावधानी  : अगर आसपास वायरल संक्रमण फैल रहा हो, तो भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मास्क पहनना मददगार हो सकता है।

पर्याप्त पानी पिएं : शरीर को हाइड्रेट रखने से श्वसन तंत्र की म्यूकोसल बैरियर (Mucosal Barrier) स्वस्थ रहती है, जो संक्रमण से बचाने में मदद करती है।

पौष्टिक आहार लें : इस सीजन में अपने आहार में पौष्टिक चीजों को शामिल जरूर करें। इसके लिए विटामिन C, विटामिन D, जिंक और प्रोटीन युक्त भोजन डाइट में शामिल करें। ये प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

अस्थमा और COPD मरीज विशेष सावधानी बरतें

अगर आपको पहले से ही सीओपीडी या फिर अस्थमा की दिक्कत है, तो मानसून में कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

  • अपना इनहेलर समय पर लें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित सेवन करें।
  • फंगल और धूल वाले वातावरण से बचें
  • लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर की मदद जरूर लें।
  • क्या क्लाइमेट चेंज भी जिम्मेदार है?

डॉक्टर बताते हैं कि हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि क्लाइमेट चेंज के कारण मौसम के पैटर्न बदल रहे हैं। बढ़ती नमी, काफी ज्यादा बारिश वर्षा और लंबे मानसून सीजन कई प्रकार के इंफेक्शन के प्रसार को प्रभावित कर सकते हैं। लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित शोध के अनुसार, बदलती जलवायु श्वसन रोगों और एलर्जी संबंधी समस्याओं की आवृत्ति बढ़ा सकती है।

Disclaimer : मानसून का मौसम अपने साथ ताजगी और राहत लेकर आता है, लेकिन यह श्वसन संक्रमणों के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी पैदा करता है। बढ़ी हुई नमी, फंगस, वायरल संक्रमण और एलर्जेंस के कारण सर्दी-जुकाम से लेकर अस्थमा और निमोनिया तक का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।