सावधान! बारिश में इन बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं आप, इस तरह करें बचाव

बारिश के सुहाने मौसम में हम कई सारी बीमारियों (Monsoon Diseases) और इंफेक्शन के चपेट में आ सकते हैं। बुजुर्ग और बच्चे इस मौसम में सबसे अधिक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में हमें सतर्क रहने की जरूरत होती है।

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 23, 2020 10:12 AM IST

Monsoon Diseases : चुभती और चिलचिलाती गर्मियों से बारिश राहत देती हैं। इस मौसम में चाय-कॉफी के साथ पकौड़ी और समोसे खाने का मजा ही अलग होता है। लेकिन इस सुहाने मौसम में हम कई सारी बीमारियों (Monsoon Diseases) और इंफेक्शन की भी चपेट में आ सकते हैं। बुजुर्ग और बच्चे इस मौसम में सबसे अधिक बीमार पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं मानसून के सीजन में कौन सी बीमारियां (Monsoon Diseases) देती हैं दस्तक और इससे बचने के उपाय-

जुखाम और बुखार

मानसून के दौरान सर्दी, जुकाम और बुखार का होना सबसे सामान्य बात है। किसी भी उम्र के व्‍यक्ति को बरसात में इन समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है। बुखार, गले में खराश और लगातार छींकना इस बीमारी के कुछ लक्षणों में से हैं। इससे बचने के लिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है कि खुद को भीगने से बचाएं। इस मौसम में फ्रि‍ज में रखी चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए। एयर कंडीशनर को सामान्‍य तापमान पर रखना भी सर्दी-जुकाम से बचने का आसान तरीका है।

टाइफाइड

मानसून के दौरान टाइफाइड हाने का खतरा भी रहता है। संक्रमित पानी और खाद्य पदार्थों के जरिए इस रोग के होने की संभावना सबसे अधिक होती है। इस बीमारी में तेज बुखार आता है, जो घटता बढ़ता रहता है और कई दिनों तक बना रहता है। इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि व्‍यक्ति के ठीक होने के बाद भी संक्रमण रोगी के पित्ताशय में बना रहता है, जो खतरा पैदा कर सकता है।

टाइफाइड एक संक्रामक रोग होता है। इसलिए टाइफाइड से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को परिवार के अन्‍य सदस्‍यों से दूर रहना चाहिए। मानसून के दौरान बीमारी को रोकने के लिए टीके लेना बहुत जरूरी होता है। साथ ही इस बीमारी से बचने के लिए बरसात के दिनों में लिक्‍विड डाइट भरपूर मात्रा में इस्‍तेमाल करनी चाहिए।

हैजा

बरसात में दूषित पानी की समस्‍या बढ़ जाती है। जिससे हैजा फैल सकता है। घर के अंदर और बाहर स्‍वच्‍छता की कमी रोग को फैलने में मदद करती है। इस रोग के होने पर रोगी को दस्त और उल्टियां अधिक आने लगते हैं। पेट में दर्द बढ़ने लगता है। रोगी को बैचैनी महसूस होती है और बहुत प्यास लगने लगती है। वैसे तो टीकाकरण इस रोग से बचाव का सबसे अच्‍छा उपाय है। इस टीके का असर लगभग 6 महीने तक रहता है। पर इससे पहले यह जरूरी है कि भोजन और पानी की स्‍वच्‍छता सुनिश्चित करें।

डेंगू

डेंगू मानसून में होने वाली एक और सामान्य बीमारी है। माता-पिता के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चे को मच्छर से बचाने वाली क्रीम लगाई जाए। साथ ही बच्चों को पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े भी पहनाएं। खुले हुए टैंक या घर के आसपास पानी न इकट्ठा होने दें। इससे मच्छर नहीं बढ़ेंगे।

लेप्टोपाइरोसिस

बारिश के सीजन में अक्सर बच्चे मिट्टी और पानी से खेलते हैं। ऐसे में उन्हें लेप्टोपाइरोसिस होने का खतरा अधिक हो जाता है। पानी और मिट्टी के संपर्क में आने से लेप्टोपाइरोसिस होता है। जानवरों के मूत्र से पानी और मिट्टी दूषित हो जाते हैं। यदि आपके बच्चों को पानी और मिट्टी में खेलने से किसी तरह की चोट लगी है, तो उसे लेप्टोपाइरोसिस होने का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे में बच्चों को बारिश के सीजन में मिट्टी और पानी से ना खेलने दें। चोट लगने पर उन्हें तुरंत डॉक्टर्स के पास ले जाएं।

हेपेटाइटिस ए

हेपेटाइटिस ए भी एक वायरल डिज़िज है। यह बीमारी इंफेक्‍टेड खाने, पानी और इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। पीलिया, थकावट, भूख न लगना, मितली, हल्का बुखार, पीले रंग का यूरीन और सारे शरीर में खुजली इसके आम लक्षण हैं। इस घातक बीमारी को रोकने के लिए टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही हायजनिक फूड और पानी का इस्‍तेमाल जरूरी है। हेपेटाइटिस के मरीज को पूरा आराम दिया जाना चाहिए और उसे अपने आहार में उच्च कैलोरी लेनी चाहिए।

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