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बारिश में बढ़ जाता है अस्थमा का खतरा, समझिए इसके पीछे की बड़ी वजह

मानसून में अस्थमा अटैक आने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। इसके पीछे कई कारक हो सकते हैं। इस लेख में हम इन्हीं कारणों की चर्चा करेंगेे। आइए डॉक्टर से जानते हैं मानसून में क्यों बढ़ जाता है अस्थमा अटैक का खतरा?

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 24, 2026 3:16 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Kuldeep Kumar

झमाझम बारिश भले ही आपको गर्मी से राहत दिलाती है, लेकिन अस्थमा मरीजों के लिए यह मौसम कई बार परेशानी का कारण बन जाती है। अचानक मौसम में बदलाव और मानसून के दौरान बढ़ती हुई नमी अस्थमा का काफी ज्यादा ट्रिगर करने लग जाती है। इस मौसम में फंगस धूल के कण और वायरल संक्रमण का खतरा रहता है, जिसकी वजह से अस्थमा के लक्षण जल्दी ट्रिगर होने लगते हैं। इसी कारण से बारिश के मौसम में कई लोगों को सांस लेने में परेशानी, घरघराहट, सीने में जकड़न और अस्थमा अटैक का सामना करना पड़ता है।

गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर, डॉ. कुलदीप कुमार ग्रोवर का कहना है कि अगर अस्थमा मरीज मौसम में होने वाले बदलावों और ट्रिगर्स को समझ लें, तो वे काफी हद तक अस्थमा अटैक के खतरे को कम कर सकते हैं। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि मानसून में अस्थमा का खतरा क्यों बढ़ जाता है और इससे बचने के लिए क्या-क्या उपाय अपनाएं जा सकते हैं।

क्या है अस्थमा?

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, अस्थमा एक क्रॉनिक यानी लंबे समय तक रहने वाली सांस से जुड़ी बीमारी है। इसमें फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली एयरवेज में सूजन आ जाती है और वे संकरी हो जाती हैं। इससे मरीज को सांस लेने में काफी ज्यादा तकलीफ होने लगती है।

Dr. Kuldeep

अस्थमा के सबसे कॉमन लक्षण क्या हैं?

अस्थमा के शुरुआती लक्षण काफी ज्यादा सामान्य होते हैं, इसलिए कई बार स्थिति गंभीर होने पर मरीज को अस्थमा का पता चलता है। आइए जानते हैं इसके कुछ कॉमन लक्षण

  1. सांस फूलना
  2. सीने में जकड़न
  3. बार-बार खांसी
  4. सांस लेने के दौरान घरघराहट महसूस होना।
  5. रात में खांसी या सांस लेने में परेशानी
  6. शारीरिक गतिविधियों के दौरान जल्दी थक जाना, इत्यादि।

asthma

कुछ लोगों में ये लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ मरीजों में अचानक गंभीर अस्थमा अटैक हो सकता है।

मानसून और अस्थमा के बीच क्या है कनेक्शन?

सीसीडी के मुताबिक,मानसून के दौरान वातावरण में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, जो अस्थमा मरीजों की समस्याओं को ट्रिगर करने का कारण बनता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं-

1. बढ़ी हुई नमी बन सकती है परेशानी

मानसून में हवा में ह्यूमिडिटी काफी बढ़ जाती है। अधिक नमी वाली हवा कुछ लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल बना सकती है। जब हवा में ज्यादा नमी होती है, तब एयरवेज में सूजन बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में सांस लेने में फेफड़ों को अधिक मेहनत लगती है, जिसकी वजह से फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है। इस स्थिति में अस्थमा ट्रिगर होने लगता है। कई मरीज बताते हैं कि बारिश शुरू होने से पहले ही उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगती है।

2. फफूंद अस्थमा का बड़ा ट्रिगर

बारिश के मौसम में घरों की दीवारों, बाथरूम, किचन, स्टोर रूम और नमी वाले स्थानों पर फफूंद तेजी से पनपते हैं। फफूंद से निकलने वाले सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं। जब कोई व्यक्ति इन्हें सांस के साथ अंदर लेता है, तो ये एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। अस्थमा मरीजों को फफूंद के कारण लगातार छींकें आ सकती हैं, जिसकी वजह से उन्हें आंखों में जलन हो सकती है। साथ ही सांस फूलने की परेशानी भी होती है।

Asthma and Monsoon Connection

3. मानसून के दौरान तेजी से फैलना है वायरल इंफेक्शन

इस सीजन में वायरल इन्फेक्शन का खतरा काफी ज्यादा रहता है। मुख्य रूप से इस दौरान सर्दी-जुकाम, फ्लू, गले का इंफेक्शन, ब्रोंकाइटिस और रेस्पिरेटरी सिस्टम में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। इन स्थितियों में शरीर संक्रमण से लड़ रहा होता है, ऐसे में एयरवेज में सूजन बढ़ सकती है और अस्थमा के लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

4. डस्ट माइट्स और घर के अंदर की एलर्जी

बारिश के मौसम में लोग अधिक समय घर के अंदर बिताते हैं। वहीं, नमी बढ़ने पर बिस्तरों में डस्ट माइट्स बढ़ते हैं, कालीनों में धूल जमा होने लगती है, सोफे और पर्दों में एलर्जी पैदा करने वाले कण जमा हो जाते हैं। ये सभी कारक अस्थमा के ट्रिगर माने जाते हैं।

थंडरस्टॉर्म अस्थमा क्या है?

हाल ही में दुनियाभर के वैज्ञानिकों द्वारा अस्थमा की एक खास तरह की स्थिति की पहचान की गई है, जिसे थंडरस्टॉर्म अस्थमा कहा जाता है। एनवायरमेंटल रिसर्च जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, तूफान और बारिश के दौरान पॉलेन यानि परागकण छोटे-छोटे कणों में टूट जाते हैं। ये सूक्ष्म कण आसानी से फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं।

इससे मरीजों की एलर्जी बढ़ सकती है। साथ ही अचानक सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, जिसी वजह से अस्थमा अटैक कर सकता है। हालांकि, यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन एलर्जी और अस्थमा वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक माना जाता है।

किन लोगों को मानसून में अस्थमा ट्रिगर होने का ज्यादा रहता है खतरा?

कुछ लोगों में मानसून के दौरान अस्थमा अटैक का खतरा अधिक हो सकता है, जैसे-

  • बच्चे और बुजुर्ग
  • एलर्जी वाले लोग
  • धूम्रपान करने वाले
  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
  • पहले से अस्थमा के मरीज, इत्यादि।

बच्चों में क्यों बढ़ जाती है समस्या?

बच्चों की सांस की नलियां बड़ों की तुलना में छोटी होती हैं। इसलिए हल्की सूजन भी सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती है। इसके साथ ही बच्चों को बड़ों की तुलना में इंफेक्शन जल्दी असर कर सकता है। वहीं, उन्हें एलर्जी की शिकायत ज्यादा होती है। ऐसे में माता-पिता को अपने बच्चों को बारिश के मौसम में अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है।

Child Asthma Child Asthma

बुजुर्गों को क्यों बरतनी चाहिए अतिरिक्त सावधानी?

बुजुर्गों में अक्सर फेफड़ों की क्षमता कम होती है। इसके साथ ही उन्हें कई तरह की समस्याएं जैसे- हार्ट डिजीज, कमजोर इम्यून होता है। ऐसे में अस्थमा अटैक गंभीर रूप ले सकता है।

मानसून में अस्थमा मरीज क्या करें?

अगर आपको अस्थमा की शिकायत है, तो मानसून में कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें, जैसे-

इनहेलर हमेशा साथ रखें : रेस्क्यू इनहेलर अचानक अटैक की स्थिति में जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

डॉक्टर की दवा नियमित लें : कई मरीज लक्षण कम होने पर दवा बंद कर देते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।

घर को नमी से बचाकर रखें : नमी की वजह से अस्थमा जल्दी ट्रिगर जल्दी होता है। ऐसे घर का वेंटिलेशन बेहतर रखें, लीक पाइप ठीक कराएं और नमी जमा न होने दें।

फफूंद को तुरंत हटाएं : दीवारों और कोनों में फफूंद दिखने पर तुरंत सफाई करें।

मास्क का इस्तेमाल करें : मास्क धूल, प्रदूषण और एलर्जी वाले कणों से बचाने में मदद कर सकता है।

balance diet

मानसून में अस्थाम मरीज क्या खाएं?

मानसून में अगर आप अस्थमा के गंभीर लक्षणों को बचना चाहते हैं, तो अपने लाइफस्टइल पर ध्यान दें। साथ ही खानपान पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है। जानते हैं इस दौरान कैसे रखें अपना डाइट ?

विटामिन C युक्त आहर लें  : मानसून में आपको विटामिन सी युक्त आहार लेने की जरूरत होती है। मुख्य रूप से आंवला, अमरूद, संतरा और नींबू का सेवन करें। ये इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड : अस्थमा मरीजों के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए अखरोट, अलसी के बीज और फैटी फिश का सेवन करें। इनमें सूजन कम करने वाले गुण पाए होते हैं, जो एयरवेज में होने वाली सूजन को कम करने में असरदार साबित हो सकते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन : इस सीजन में आपको अपने आहार में पालक, गाजर, टमाटर और चुकंदर जैसी चीजों को शामिल करना चाहिए। ये फेफड़ों की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

अस्थमा में किन चीजों से बचना चाहिए?

अगर आपको अस्थमा की परेशानी है, तो कुछ चीजों को लेने से बचना चाहिए, जैसे-

  • धूम्रपान
  • सेकेंड हैंड स्मोक
  • अगरबत्ती का धुआं
  • तेज परफ्यूम
  • नमी युक्त कमरे
  • धूल भरे स्थान, इत्यादि।

Disclaimer : मानसून का मौसम अस्थमा मरीजों के लिए काफी चुनौती भरा मौसम होता है। बढ़ी हुई नमी, फफूंद, परागकण, डस्ट माइट्स और वायरल संक्रमण मिलकर अस्थमा अटैक के खतरे को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, सही सावधानियां, नियमित उपचार, हेल्दी लाइफस्टाइल और डॉक्टर की सलाह का पालन करके इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।