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केरल में मंकीपॉक्स के दो मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है। पिछले सप्ताह राज्य में मंकीपॉक्स के दो मामलों के पॉजिटिव पाए जाने की पुष्टि हुई थी। हालात के मद्देनजर वायरस को फैलने से रोकने के लिए केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज का कहना है कि राज्य हर मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए है और हालात की निगरानी की जा रही है। वीणा ने एसओपी के बारे में जानकारी देते हुए एक रिलीज शेयर की है, जिसका पालन सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में किया जाएगा।
1-कोई भी व्यक्ति, जो बीते 21 दिनों में भारत लौटा हो, खासकर उन देशों से जहां मंकीपॉक्स पाया गया है और उसे शरीर पर रैशेज, बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो उसे वायरल इंफ्केशन की सूचना देनी होगी।
2-जोखिम कारकों की बात करें तो एक्सपर्ट का कहना है कि वे लोग, जो करीबी संपर्क या फिर स्किन से स्किन के संपर्क में आए हैं उन्हें इंफेक्शन का ज्यादा जोखिम है। इसमें देखभाल करने वाले लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने पीपीई किट का इस्तेमाल नहीं किया था।
3-कैसे पता चलेगा कि आपको मंकीपॉक्स वायरस ने संक्रमित बना दिया है? वीणा जार्ज का कहना है कि इस वायरस की पुष्टि पीसीआर टेस्ट से की जा सकती है।
4- जिन मामलों में मंकीपॉक्स की संदिग्धता है उनमें अलग से इलाज किया जाना चाहिए और मरीज को तब तक आइसोलेशन में रहना जब तक उसकी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती। पुष्टि हुए मामलों के बारे में जिला निगरानी अधिकारी को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए।
5-संक्रमित व्यक्ति के सैंपल को प्रोटोकॉल के मुताबिक ही लेने की सलाह दी गई है और ये काम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा किया जाएगा। ये सैंपल निगरानी अधिकरी लैब को भेजेगा।
6-जिन निजी अस्पतालों में आइसोलेशन सुविधा है उन्हें मरीजों की मांग के अनुरूप ही सरकारी अस्पतालों में भेजा जाना चाहिए। जिन लोगों की तबीयत ज्यादा खराब है उन्हें सरकारी अस्पतालों के बजाए मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाना चाहिए।
7-किसी संक्रमित व्यक्ति को अस्पताल में ले जाते वक्त हेल्थ वर्कर को पीपीई किट, एन-95 मास्क ग्लब्स और चशमा लगाना चाहिए। इसके अलावा मरीज को हमेशा एन-95 मास्क पहनकर रहना होगा या फिर वो ट्रिपल लेयर मास्क भी पहन सकते हैं। इसके अलावा कोई भी घाव या रैशेज खुला हुआ नहीं होना चाहिए।
8-मंकीपॉक्स संक्रमित व्यक्ति के अस्पताल पहुंचने के बाद एंबुलेंस और उपकरणों को डिसइंफेक्टेंट से साफ करना चाहिए और मरीज के कपड़े नष्ट कर देने चाहिए।
9-हवाईअड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य है। किसी भी यात्री में लक्षण दिखाई देने पर उसकी जांच होनी चाहिए। पॉजिटिव पाए जाने पर उसे पास के ही अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए।
10-मरीज के संपर्क में आने वाला व्यक्ति को वायरस के लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए और तब तक खुद को अलग कर लेना चाहिए जब तक वायरस की टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती है।