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साल 2020 के अंत के साथ ही दुनियाभर के लोगों में कोरोना वैक्सीन मिलने की उम्मीद जगने लगी है। कोरोना वायरस से लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और बहुत से लोग अभी भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। हालांकि दुनियाभर में कोरोना के खात्मे (which covid 19 vaccine is best for india) के लिए फार्मा जगत की बड़ी कंपनियों ने कोरोना वैक्सीन इजात की है, जिसमें अमेरिका की दो कंपनियां मॉडर्ना (Moderna), फाइजर (Pfizer) और रूस की स्पूतनिक (Sputnik V) शामिल है। एक तरफ जहां मॉडर्ना और फाइजर ने दावा किया है कि कोरोना के खिलाफ उनकी वैक्सीन 95 फीसदी तक कारगर है। वहीं रूस का दावा है कि स्पूतनिक, कोरोना वायरस से बचाव में 92 प्रतिशत तक प्रभावी है। बता दें कि सभी वैक्सीन के स्टेज ट्रायल पूरे हो चुके हैं और बस अब सरकार से इनकी मंजूरी मिलना ही बाकी है। इस लेख में हम आपको दुनिया की इन तीन वैक्सीन के बीच अंतर के बारे में बता रहे हैं और साथ ही ये भी बताएंगे कि इन तीनों में कौन ज्यादा (which covid 19 vaccine is best for india) प्रभावी है।
अमेरिकी दवा कंपनी मॉडर्ना (Moderna) का दावा है कि उसकी कोरोना वायरस वैक्सीन (mRNA) 94.5 प्रतिशत तक प्रभावी है। ट्रायल के आंकड़ों से ये पता चला है कि मॉडर्ना की वैक्सीन कोरोना के गंभीर मामलों में भी खासी प्रभावी साबित हुई है। इसके अलावा वैक्सीन का असर हर नस्ल के वॉलंटियर पर प्रभावी साबित हुआ है। मॉडर्ना की वैक्सीन के ट्रायल में करीब 30 हजार वॉलंटियर्स शामिल हुए थे, जिसके बाद ये नतीजे सामने आए हैं। (which covid 19 vaccine is best for india)
कैसे लेनी होगी डोज
कंपनी के मुताबिक, हर व्यक्ति को इस वैक्सीन की दो डोज चार हफ्ते के अंतराल पर लेनी होगी।
अमेरिका की ही दूसरी कंपनी फाइजर (Pfizer) का दावा है कि उसकी कोरोना वायरस वैक्सीन सभी ट्रायल में 90 प्रतिशत तक कारगर साबित हुई है। वैक्सीन के निर्माताओं का दावा है कि वैक्सीन इस महामारी को खत्म करने का माद्दा रखती है।
कैसे लेनी होगी डोज
वैक्सीन के निर्माताओं का कहना है कि ये वैक्सीन एक साल के लिए सुरक्षा प्रदान करेगी और साथ ही हर साल बूस्टर की जरूरत पड़ सकती है।
कोरोना की सबसे पहले वैक्सीन बनाने का दावा करने वाला देश रूस, स्पूतनिक के 92 फीसदी तक प्रभावी होने का दावा करता है। रूसी कोरोना वैक्सीन Sputnik V को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) भी ट्रायल की इजाजत दे चुका है। इस वैक्सीन को मॉस्को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट ने बनाया है।
कैसे ली जाती है डोज
इस वैक्सीन की खास बात ये है कि फेज 2 ट्रायल में यह वैक्सीन 21 दिन के अंदर-अंदर इम्यूनिटी डेवलप करने में सफल साबित हुई है। इसके अलावा वैज्ञानिकों का दावा है कि इस वैक्सीन का दूसरा इंजेक्शन लेने पर इम्यूनिटी डबल हो जाती है।
भारत के लिहाज से बात करें तो ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन करोड़ों लोगों की उम्मीद बनी हुई है। इसका कारण ये है कि यह वैक्सीन दूसरी वैक्सीन की तुलना में बेहद किफायती है। इस वैक्सीन से जुड़ी एक खास बात ये भी है कि भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका के साथ वैक्सीन को बनाने में हाथ मिलाया है और कंपनी 'नो प्रॉफिट' बेसिस पर ये वैक्सीन भारत में उपलब्ध कराएगी (which covid 19 vaccine is best for india) । एस्ट्राजेनेका की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के साथ 100 करोड़ वैक्सीन बनाने की डील हुई है। इस वैक्सीन को 'कोविशील्ड' नाम दिया गया है, जो जनवरी में लॉन्च हो सकती है।
इस वैक्सीन की कीमत 225 रुपये के आसपास हो सकती है। इसके साथ ही इस वैक्सीन को आप साधारण फ्रिज टेम्प्रेचर यानी 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच स्टोर कर सकते हैं।
अमेरिका और रूस के अलावा देश में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन (Covaxin) और जायडस कैडिला की ZyCov-D भी लॉन्च की तैयारी में हैं। हाल ही में चंडीगढ़ पीजीआई के डायरेक्टर जगत राम ने बताया था कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड ही भारत के लिए सबसे बेहतर कोरोना वैक्सीन साबित होगी। सरकार को भी Covaxin से खासी उम्मीदें हैं और ये कोविशील्ड की तरह ही आसानी से लोगों के बीच वितरित की जा सकती है। भारत में उपलब्धता, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से देखा जाए तो 'कोविशील्ड' और 'कौवैक्सीन' ही सबसे मुफीद वैक्सीन (which covid 19 vaccine is best for india) साबित हो सकती है। कोविशील्ड जनवरी और कोवैक्सीन फरवरी तक भारत में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो सकती है।