15 से 30 की उम्र के लोगों के सीधे डीएन पर असर डाल रही ये 1 चीज, जानें शरीर को होने वाले नुकसान

अगर आप घर पर बहुत ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो ये सीधे आपके डीएनए को प्रभावित कर रहा है। जानें शरीर को होने वाले नुकसान।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 17, 2021 4:15 PM IST

आज जब मोबाइल फोन हमारी जरूरत बन गए हैं तो हम उनसे होने वाले नुकसान के बारे में जानते हुए भी अपने आप इस नुकसान से बचा नहीं पा रहे हैं। मोबाइल रेडिएशन हमारे स्वास्थ्य पर तरह तरह से प्रभाव डालता है कुछ परेशानियां शारीरिक हैं और कुछ मानसिक। मोबाइल रेडिएशन से इंसान और पर्यावरण पर होने वाले नुकसान पर दुनिया भर में कई शोध चल रहे हैं। अभी हाल ही में जो तथ्य सामने आया है उसके मुताबिक मोबाइल फोन से घर और दफ्तर में ज्यादा नुकसान हो रहा है बनिस्पत सड़क या खुली जगहों के। ऐसा इसलिए है कि घर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल रेडिएशन मिलकर हमारे शरीर पर दोगुना नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

डीएनए पर भी पड़ रहा है असर

घरों और दफ्तरों में में इस्तेमाल किये जाने वाले कंप्यूटर, टीवी, रेडियो एफएम, हीटिंग-लाइटिंग लैंप, माइक्रोवेवओवन और आसपास से गुजर रही बिजली की लाइनें भी कई तरह की तरंगें पैदा करती हैं। जब हम ऐसी जगहों पर मोबाइल से बात करते हैं तो मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन इन तरंगों से मिलकर हमारे शरीर पर दोगुना नकारात्मक प्रभाव डालता है। बात जितनी लंबी होगी, नकारात्मक प्रभाव भी उतना ही ज्यादा होगा। इनसे होने वाले दुष्प्रभावों के कारण शरीर में ऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ जाती है। मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से 15 से 30 की उम्र के लोगों को थकावट, सिरदर्द, अनिद्रा, कानों में घंटियां बजने, जोड़ों में दर्द और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं और कई मामलों में यह आपके डीएनए पर भी असर करता है।

क्या कहता है अध्ययन

एक अध्ययन से पता चला है कि मोबाइल फोन और उसके टॉवर्स से निकलने वाला रेडिएशन पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डालने के अलावा, शरीर की कोशिकाओं के डिफेंस मैकेनिज्म को नुकसान पहुंचाता है। जो लोग मोबाइल पर लंबी बातें करते हैं उनमें ब्रेन ट्यूमर की संभावना अन्य लोगों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है। इससे निकलने वाली रेडिएशन मस्तिष्क पर गहरा असर डालती है।

क्या मानते हैं एक्सपर्ट

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. गौरव जैन, इंटरनल मेडिसिन के मुताबिक, सेल फोन विकिरण डीएनए या आनुवंशिक उत्परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। यह हेडसेट के करीब निकटता में कोशिकाओं में गर्मी पैदा होने के कारण होने वाली तंत्रिका और सेल क्षति के लिए ज़िम्मेदार है।

डॉ. गौरव कहते हैं कि वे सस्ते हैंडसेट जिनमे 0.025 से अधिक एसएआर होते है इन जोखिमों का कारण बनते हैं। इसके अलावा कम ऊर्जा 2 जी से उच्च ऊर्जा 3 जी और 4 जी यूनिट् के आंदोलन के साथ रेडियो तरंगों की तीव्रता बढ़ गई है। कैंसर उत्पादक विकिरण मोबाइल टावरों द्वारा हेडसेट से प्रेरित नहीं होते हैं।अब कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो विकिरण से क्षति के लिए अधिक प्रवृत्त हैं। गोंड्स जो कि टेस्ट्स और ओवरीज़ हैं। सेल फोन रेडियो तरंगें सेल गठन और सुधार की दर को कम कर सकती हैं। वे पहले से मौजूद आनुवंशिक दोषों को बढ़ा सकते हैं लेकिन आज तक किसी भी अध्ययन ने उन्हें नए उत्परिवर्तन के कारण दिखाया नहीं है।

मोबाइल रेडिएशन से कैसे बचें -

लंबी बातचीत के लिए कभी भी हैंडसेट का इस्तेमाल सीधे ना करें। आप इयरफोन का इस्तेमाल कर सकते सकती हैं। इसके अलावा आप ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। यह सुविधाजनक भी होते हैं। इनका इस्तेमाल करने से रेडिएशन का खतरा कम हो जाता है।

कभी भी उस समय मोबाइल फोन से बात ना करें जब नेटवर्क काफी कमजोर हो। इस दौरान आपके मोबाइल से काफी रेडिएशन निकलती है। फोन पर लंबी बातचीत करने से बचें। अगर आपको किसी से लंबी बातचीत करनी भी हो तो लैंडलाइन का इस्तेमाल करें या फिर आप उनसे मिल लें।

रात को सोते समय कभी भी अपने फोन को अपने पास ना रखें। इसे अपने से दूर ही रखने में समझदारी है। इसके अलावा सुबह के समय अलार्म के लिए अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करें। मोबाइल पर अलार्म रखना बेवकूफी के अलावा और कुछ नहीं है।

कई बार ऐसा होता है कि जब आपको कोई कॉल नहीं उठानी होती है तो ऐसे में आप फोन को ऐरोप्लेन मोड में रख लेते हैं। ऐसा करने से हम मोबाइल रेडिएशन से बच सकते हैं।

अपने जेब के बजाय मोबाइल फोन को अपने हैंडबैग में रखकर चलें, क्योंकि यह आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

मैसेज करने से बेहतर है कि आप फोन पर बात कर लें। ऐसा करने से रेडिएशन थोड़े कम होते हैं।

(इनपुटः डॉ . अरविन्द अग्रवाल, सीनियर कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिन श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट )

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