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यौन संबंध बनाते वक्त इन गलतियों से बढ़ जाता है महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के टिप्स

गर्भाश्य के मुख्य द्वार को सर्विक्स कहा जाता है। सर्विक्स में सेल्स की अनियमित वृद्धि को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है। यह कैंसर सर्विक्स में हृयूमन पेपीलोमा वायरस एच पी वी के कारण होता है। आज पूरी दुनिया में 10 में से एक महिला सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित है। जानें किन गलतियों के कारण बढ़ता है कैंसर का खतरा।

यह एक चौंका देने वाला तथ्य है की पिछले 2 साल के आंकड़ों के अनुसार भारत में 74000 से अधिक महिलाओं की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर के कारण हुई है, वहीं पूरी दुनिया में 273000 महिलाओं की मृत्यु के लिए सर्वाइकल कैंसर जिम्मेदार है। और इसमें में अधिकतर मृत्यु का कारन सर्वाइकल कैंसर, उसके लक्षण, बचाव व् सही समय पर इलाज की सही जानकारी के अभाव होना है। यदि सही समय पर लक्षणो पर गौर किया जाए और सही निर्देशानुसार इलाज लिया जाए तो सर्विकल कैंसर से होने वाली मृत्यु के आकड़ो में गिरावट लाई जा सकती है। नई दिल्ली स्थित एक्शन कैंसर हॉस्पिटल की सीनियर कंसलटेंट, गायनी-ओंकोलोजिस्ट डॉ श्रुति भाटिया इस बारे में आपको जरूरी दे रही। लेख में पढ़ें सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी जरूरी बातें।

गर्भाश्य के मुख्य द्वार को सर्विक्स कहा जाता है। सर्विक्स में सेल्स की अनियमित वृद्धि को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है। यह कैंसर सर्विक्स में हृयूमन पेपीलोमा वायरस एच पी वी के कारण होता है। आज पूरी दुनिया में 10 में से एक महिला सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित है। बीमारी और इलाज संबंधी जानकारी के अभाव में भारत में यह खतरनाक बीमारी महिलाओं के लिए जानलेवा बनती जा रही है। यह बीमारी 40 साल या इससे अधिक आयु की महिलाओं में होती है।

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सर्विक्स यूट्रस के मुख द्वार के उपर स्थित होता है। इसे यूट्रस की बच्चेदानी का मुख्य द्वार भी कहा जाता है। जैसे जैसे सर्विक्स में कैंसर फैलता है तो वह उपर की तरफ यूट्रस में या फिर नीचे की तरफ योनी में नीचे फैलना शुरू हो जाता है। यह मुख्यता हृयूमन पेपीलोमा वायरस एच पी वी के कारण होता है। सामान्य तौर पर इस वायरस की दो वैराइटी नंबर 16 और 18 सर्वाइकल कैंसर करती हैं। 99.7 प्रतिशत केस में सर्वाइकल कैंसर के लिए एच पी वी वायरस रिस्पांसिबल होता है।

सर्वाइकल कैंसर फैलने के कारण

हाई रिस्क पार्टनर, हिस्ट्री आफ एसटीडी वाले व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

यह खतरनाक बीमारी मल्टीपल पार्टनर के साथ सेक्सुअल एक्टिविटी की वजह से होती है।

इम्युनो सप्रेशन या एड्स के कारण इम्यूनिटी कम हो जाती है। जिससे सर्वाइकल कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

एर्लजी यानि 20 साल की आयु से पहले सेक्सुअल एक्टिविटीज में इनवॉल्व होने के कारण भी सर्वाइकल कैंसर हो जाता है।

एल्कोहल एवं सिगरेट का अधिक इस्तेमाल करना भी सर्वाइकल कैंसर के होने के खतरे को बड़ा देता है।

इसके अलावा इस प्राइवेट भाग की साफ सफाई न करने या फिर बार बार गर्भधारण करने से भी सर्वाइकल कैंसल की आशंका बढ़ जाती है।

यह आनुवांशिक बीमारी भी हो सकती है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

सर्वाइकल कैंसर की शुरूआती चरण वाली स्थिति को डिस्प्लेसिया कहा जाता है। इस चरण में इलाज आसानी से किया जा सकता है। ध्यान न देने पर यही बीमारी अगर कैंसर में बदल जाए तो इसे कार्सिनोमा कहा जाता है। यहां कंडीशन थोडी मुश्किल हो जाती है। शुरूआती चरण में सर्वाइकल कैंसर की पहचान नहीं हो पाती है लेकिन फिर भी कुछ ऐसी शारीरिक गतिविधियां जिनके माध्यम से इसकी पहचान करने में आसानी होती है।

पेशाब के दौरान दर्द

पेशाब करते समय यदि किसी महिला को तेज दर्द का अहसास होता है तो यह सर्वाइकल कैंसर का पहला लक्षण माना जाता है।

पेट के निचले हिस्से में दर्द

आमतौर पर महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द होता है। लेकिन मासिक धर्म बंद होने के बाद भी दर्द का अहसास होता है तो इस स्थिति में डाॅक्टर को कंसल्ट करें क्योकि यह योनी में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण की पुष्टि करता है।

असामान्य ब्लीडिंग

शारीरिक संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग या फिर तेज दर्द सर्वाइकल कैंसर के लक्षण है। इसके अलावा मासिक धर्म बंद होने के बाद भी रक्तस्त्राव भी इस बीमारी की पुष्टि करता है। भूख या वजन का घटना भी इसमें शामिल हैं।

वाइट डिसचार्ज

मासिक धर्म शुरू होने से पहले थोड़ा बहुत सफेद पानी का आना सामान्य है लेकिन जरूरत से ज्यादा सफेद बदबूदार पानी का रिसाव होता है तो इसे नजरअंदाज न करें।

रोकथाम

बीमारी की स्क्रीनिंग कराएं। इसके संक्रमण से बचाव के लिए एच पी वी वैक्सीन का टीकाकरण कराएं। इन दवाइयों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। 10 से 40 साल की महिलाएं सर्विक्स कैंसर वैक्सीन का इस्तेमाल कर सकती है।

डायग्नोसिस

सर्वाइकल कैंसर का पता करने के लिए बायोप्सी, सीटी स्कैन एवं पैट स्कैन कराएं।

इसका इलाज भी इसकी स्टेज पर निर्भर करता है जिसमें कीमो थेरेपी, रेडियो थेरेपी और सर्जरी शामिल हैं

इस वायरस से बचाव के लिए पूर्व सावधानियां

कम उम्र में सेक्स एक्टिविटी में इनवॉल्व होने से बचें।

असुरक्षित यौन संबंधों से बचें। इस स्थिति से निपटने के लिए कंडोम का इस्तेमाल बेहतर होगा।

बार बार गर्भधारण होने से बचें। इसके लिए जरूरत से ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियां न लें। संभव हो सके तो प्राकृतिक रूप से सुरक्षित यौन संबंध बनायें।

महिलाएं अपने प्राइवेट पार्टस की समय समय पर अच्छे से साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें।

स्वास्थ्य की दृष्टि से एल्कोहल और स्मोकिंग बहुत खतरनाक हैं। लेकिन सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए इनसे शराब और धूम्रपान से दूर रहें।

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