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Written By: Yogita Yadav | Published : September 13, 2018 2:27 PM IST
तनाव से लेकर सिस्ट तक कई कारण होते हैं पीरियड मिस होने के! © Shutterstock
शादी के बाद पीरियड मिस होना यानी माहवारी का टलना जहां खुशी की बात हो सकती है, वहीं कई बार पीरियर मिस होना चिंता का सबब भी बन सकता है। अगर पीरियड मिस हुए सप्ताह भर से ज्यादा हो गया है तब तो चिंता और बढ़ जाती है। अमूमन यह माना जाता है कि पीरियड मिस होने के मतलब है कि घर में नन्हें मेहमान के आने की खुशखबरी है। पर कई बार कुछ और वजहें भी होती हैं पीरियड मिस होने की।
थायरॉइड के संकेत
थायरॉइड एक ऐसी बीमारी है, जिसके कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। आमतौर पर कम सक्रिय या ज्यादा सक्रिय होने के कारण शरीर में थायरॉक्सिन और अन्य हार्मोन्स का असंतुलन हो जाता है। हार्मोन्स का ये असंतुलन पीरियड्स मिस होने का कारण बन सकता है। कई बार इसके कारण आपके पीरियड्स की तारीख भी अनियमित हो सकती है। ऐसे में ब्लड टेस्ट करवाना ठीक रहता है, जिससे अनियमित माहवारी के कारणों का सही पता चल सके।
बीमारी के कारण
अस्वस्थ होने पर पीरियड मिस होना बहुत सामान्य बात है। शरीर का यह चक्र भी तभी ठीक ढंग से काम करता है जब आप स्वस्थ होती हैं। लंबी बीमारी और अधिक क्षमता वाली एंटीबायोटिक दवाएं भी माहवारी में चूक का कारण बन सकती है। यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर पर असर कर ऑव्युलेशन की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी कोई बीमारी अनियमित माहवारी का कारण बनती है, तो आपको चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
ओवरी में सिस्ट
इस स्थिति मे महिलाओं के अंडाशय या ओवरी में छोटे सिस्ट्स यानी गांठ पैदा हो जाते हैं और ये सामान्य अण्डोत्सर्ग की प्रक्रिया को जटिल बना देते हैं। आमतौर पर जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है या जिनकी जीवनशैली अनियमित होती है। इसलिए अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपने डाक्टर से संपर्क करें।
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वजन घटने-बढ़ने के कारण
वजन में उतार-चढ़ाव का असर भी माहवारी पर पड़ता है। वजन के अत्यधिक बढ़ने या वजन घटने से माहवारी चक्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और माहवारी अनियमित हो जाती है। सामान्य से अधिक वजन वाली महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का उत्पादन अधिक होने लगता है। एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर पर बदलाव आने से माहवारी अनियमित हो जाती है। यकीन मानिए आप वजन घटाकर इस समस्या पर काबू पा सकती हैं।
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ओवरबर्डन
शारीरिक या मानसिक किसी भी तरह से अगर आप ओवरबर्डन हैं तो इसका असर माहवारी पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में पीरियड जल्दी भी आ सकते हैं और बहुत लेट भी हो सकते हैं। इसलिए तनाव न लें, थोड़ा आराम करें।