
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
1 व्यक्ति के अंगदान से 8 लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है।
एक किडनी से 2 लोगों को, लिवर से 1 को, दिल से 1 को, फेफड़ों से 2 को, आंखों से 2 को और त्वचा-हड्डियों से कई और लोगों को। सुनने में किसी चमत्कार जैसा लगता है, है ना? लेकिन भारत में हर दिन सैकड़ों मरीज ऑर्गन के इंतजार में दम तोड़ देते हैं। वजह? जानकारी की कमी और उससे भी बड़ी वजह - भ्रम। अगस्त को नेशनल ऑर्गन डे मनाया जा रहा है, तब हम आपको बताने जा रहे हैं अंगदान से जुड़े मिथकों के बारे में, जिसे सच समझकर ज्यादातर लोग अंगदान नहीं करते हैं। अंगदान से जुड़े मिथकों की जानकारी दे रहे हैं हैदराबाद के एलबी नगर स्थित ग्लेनीगल्स अवेयर हॉस्पिटल के कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन डॉ. वामशी वी।
सच्चाई- ये सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक भ्रम है। डॉ. वामशी बताते हैं कि अस्पताल में 2 अलग-अलग टीमें होती हैं। एक टीम का काम सिर्फ और सिर्फ आपको बचाना है। वो ER की टीम है। दूसरी टीम ट्रांसप्लांट की है। डॉक्टर आखिरी सांस तक मरीज को बचाने के लिए लड़ते हैं। अंगदान की बात तभी शुरू होती है जब 3-4 सीनियर डॉक्टर मिलकर "ब्रेन डेथ" घोषित कर देते हैं। उसके बाद ही परिवार से बात की जाती है। इसलिए हर व्यक्ति को दिमाग से यह बात पूरी तरह से निकाल देनी चाहिए कि अगर उसने NOTO में अंगदान के लिए रजिस्टर्ड किया है तो इमरजेंसी कंडीशन में उसे बचाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं की जाएगी।
अंगदान एक निशुल्क प्रक्रिया है।
सच्चाई- बिल्कुल गलत। अंगदान किसी व्यक्ति के पैसे या VIP पर्सनल को देखकर नहीं किया जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि भारत में अंगदान का पूरा सिस्टम NOTTO - National Organ and Tissue Transplant Organization - के द्वारा चलता है। इसमें रजिस्टर्ड करने वाले लोगों की वेटिंग लिस्ट कंप्यूटर से बनती है। उसमें ना नाम देखा जाता है, ना पैसा, ना सिफारिश। इस संस्थान में प्राथमिकता तय होती है, मरीज की मेडिकल इमरजेंसी - किसकी हालत सबसे नाजुक है, ब्लड ग्रुप और टिश्यू मैच वेटिंग लिस्ट सब कुछ कड़ी निगरानी में किया जाता है। इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत है कि सिर्फ अमीर लोगों को अंगदान का फायदा मिलता है।
सच्चाई- डॉक्टर कहते हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। 70 और 80 साल के लोगों ने भी अपने अंगदान किए हैं। डोनेशन के समय डॉक्टर हर ऑर्गन की पूरी जांच करते हैं। अगर ऑर्गन स्वस्थ है, तो वो डोनेट किया जा सकता है। यहां तक कि जिन्हें कंट्रोल में शुगर या BP है, वो भी कई बार डोनर बन सकते हैं। आपके अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सकते हैं या नहीं इसका फैसला सिर्फ डॉक्टर ले सकते हैं और आप नहीं।
सच्चाई- अंग निकालने के बाद शरीर को बिल्कुल सम्मान के साथ सिल दिया जाता है। बाहर से कोई निशान नहीं दिखता है। अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आप अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार पूरी इज्जत के साथ, खुले ताबूत में भी कर सकते हैं। धर्म और संस्कार में अंगदान की प्रक्रिया किसी भी तरह से बाधा नहीं बनती है।
भारत में अंगदान को लेकर नियम काफी सख्त हैं।
सच्चाई- यह बात पूरी तरह से गलत है भारत में अंगों की खरीद-बिक्री पूरी तरह गैरकानूनी है। THO Act 1994 के तहत ये एक बड़ा अपराध है। डॉक्टर बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति का अंगदान 100% स्वैच्छिक और निशुल्क होता है। डोनर के परिवार से एक रुपया नहीं लिया जाता और ना ही डोनर के परिवार को कोई पैसा दिया जाता है। इसलिए अंगों को निकालने के बाद उसे बेचा जाता है यह ख्याल दिमाग से पूरी तरह से निकाल दें।
नेशनल ऑर्गन डोनर डे के खास मौके पर डॉक्टर कहते हैं कि मौत तो अटल है। लेकिन मौत के बाद भी अगर हम किसी के लिए उम्मीद बन सकते हैं, तो इससे बड़ा धर्म क्या होगा? अंगदान का मतलब है - मरकर भी जीना। ये दान नहीं है, ये विरासत है। एक ऐसी विरासत जो 8 घरों में खुशियां छोड़ जाती है। इसलिए अंगदान के बारे में जागरूकता लाना जरूरी है।
Disclaimer: ये लेख जानकारी के उद्देश्य से है। अंगदान से जुड़े नियम और प्रक्रिया समय-समय पर बदलते रहते हैं। अंतिम जानकारी के लिए NOTTO की आधिकारिक वेबसाइट देखें या अपने डॉक्टर से सलाह लें।