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मच्छर काटने से भी इबोला होता है? क्या ये वायरस हवा में फैलता है? ये हैं इबोला से जुड़े 10 सबसे बड़े मिथ

अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण का प्रकोप बढ़ने के बाद भारत में इस वायरस को लेकर कई प्रकार की बातें कहीं जा रही हैं। कोई कह रहा है इबोला, कोरोना की तरह ही हवा में फैलने वायरस है, तो कोई और कुछ। आइए जानते हैं इबोला से जुड़े ऐसे ही मिथकों के बारे में-

Written By Ashu Kumar Das
Published : May 21, 2026 10:53 AM IST

Ebola cases

अफ्रीकी देशों में एक बार फिर इबोला वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला संक्रमण से अब तक 130 से ज्यादा लोगों की संदिग्ध मौत हो चुकी है, जबकि 500 से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में हैं। डरने की बात यह है कि अफ्रीकी देश युगांडा और कांगों में फैल रहे इबोला संक्रमण के नए स्ट्रेन से बचाव के लिए न तो कोई वैक्सीन मौजूद है और न ही इस स्ट्रेन का कोई स्थायी इलाज फिलहाल है। इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में गिना जाता है। अफ्रीका में कई बार इबोला का प्रकोप हजारों लोगों की जान ले चुका है। इबोला वायरस के कारण होने वाली मौत की दर सबसे ज्यादा है। यही कारण है कि किसी देश में इबोला का मामला सामने आता है, लोगों के बीच डर और अफवाहें फैलने लगती हैं।

अफ्रीकी देशों में जब से इबोला वायरस का प्रकोप शुरू हुआ है। भारत में सोशल मीडिया पर इबोला को लेकर कई प्रकार की बातें कहीं जा रही हैं। कोई इबोला को हवा से फैलने वाला सुपर वायरस बताता है, तो कोई दावा कर रहा है कि हर बुखार इबोला हो सकता है। दुनिया में इबोला के प्रकोप के बीच आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस संक्रमण से जुड़ी 10 मिथक और उनकी सच्चाई के बारे में-

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क्या है इबोला वायरस?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसे Ebola Virus Disease (EVD) कहा जाता है। यह वायरस इंसानों और कुछ जानवरों में संक्रमण फैलाता है। इसकी पहचान सबसे पहले 1976 में अफ्रीका में हुई थी। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित चीजों के संपर्क से फैलती है। इबोला वायरस का इलाज समय पर व्यक्ति को न मिले, तो इसका इलाज काफी मुश्किल हो जाता है और मरीज की मौत भी हो सकती है।

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इबोला से जुड़े 10 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई

मिथक 1: इबोला हवा से फैलता है।

सच्चाई: यह बात पूरी तरह से मिथक है। WHO के अनुसार, इबोला कोविड-19 की तरह एयरबोर्न वायरस नहीं माना जाता। यानी केवल किसी संक्रमित व्यक्ति के पास खड़े होने या उसके सांस लेने भर से संक्रमण नहीं फैलता है। इबोला मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। अगर किसी मरीज की देखभाल बिना सुरक्षा के की जाए, तब इबोला संक्रमण का खतरा कई गुणा ज्यादा बढ़ जाता है।

मिथक 2: हर तेज बुखार इबोला हो सकता है

सच्चाई: भारत जैसे देश में वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और फ्लू जैसी बीमारियां बहुत आम हैं। हर बुखार को इबोला समझ लेना गलत है। इबोला के मामलों में आमतौर पर मरीज का हाल ही में प्रभावित देशों की यात्रा इतिहास, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क या हाई-रिस्क एरिया से जुड़ाव देखा जाता है। सिर्फ तेज बुखार होना इबोला का लक्षण नहीं कहा जा सकता है। WHO ने अपनी एडवाइजरीमें स्पष्ट किया है कि बिना किसी ट्रैवल हिस्ट्री या संपर्क के इबोला का खतरा बेहद कम माना है। इसलिए घबराहट फैलाने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

मिथक 3: इबोला होने का मतलब है आपकी मौत होनी है।

सच्चाई: इबोला संक्रमण का यह सबसे घातक मिथक है। इबोला गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर संक्रमित व्यक्ति की मौत तय है। पहले के मुकाबले अब इलाज और मेडिकल सपोर्ट काफी बेहतर हुए हैं। अगर मरीज की समय पर पहचान हो जाए, उसे आइसोलेशन, पर्याप्त फ्लूइड्स, ऑक्सीजन सपोर्ट और मेडिकल निगरानी मिले, तो बचने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ वैक्सीन और दवाओं पर भी काम हुआ है, जिनसे हालात पहले से बेहतर हुए हैं। कई देशों में इबोला की वैक्सीन भी लगाई जाती है। हालांकि इबोला के नए स्ट्रेन की वैक्सीन फिलहाल मौजूद नहीं है।

मिथक 4: मच्छर काटने से इबोला फैल सकता है?

सच्चाई: डेंगू और मलेरिया की तरह इबोला मच्छरों से फैलने वाली बीमारी नहीं है। अब तक ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं कि मच्छर इबोला वायरस फैलाते हैं।  इबोला का संक्रमण सीधे संक्रमित शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से जुड़ा होता है। इसलिए लोगों को सही जानकारी रखना जरूरी है, ताकि गलत डर न फैले कई बार सोशल मीडिया पर “मच्छरों से नया वायरस फैल रहा है” जैसे मैसेज वायरल होते हैं, लेकिन ऐसे दावों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

मिथक 5:  इबोला का कोई इलाज नहीं है।

सच्चाई: यह सही है कि इबोला का इलाज आसान नहीं है। लेकिन यह कहना बिल्कुल गलत है कि इबोला का कोई इलाज वर्तमान में मौजूद ही नहीं है। इबोला के मरीज को समय पर मेडिकल सपोर्ट, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखना, संक्रमण कंट्रोल और ICU देखभाल देने से उसकी हालत सुधर सकती है। इसके अलावा कुछ वैक्सीन और एंटीबॉडी आधारित ट्रीटमेंट भी इबोला के मरीजों को दिए जाते हैं।

मिथक 6: इबोला सिर्फ अफ्रीका की बीमारी है।

सच्चाई: इबोला के ज्यादातर मामले अफ्रीकी देशों में जरूर सामने आए हैं, लेकिन आज की दुनिया में कोई भी संक्रमण पूरी तरह सीमित नहीं माना जा सकता। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और ग्लोबल कनेक्टिविटी के कारण हर देश सतर्क रहता है।

मिथक 7: भारत की हेल्थ सिस्टम इबोला संभाल नहीं पाएगा।

सच्चाई: कोरोना महामारी के बाद भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था ने बड़े स्तर पर संक्रामक बीमारियों से निपटने का अनुभव हासिल किया है। AIIMS, ICMR और कई बड़े अस्पतालों में हाई-रिस्क संक्रमणों के लिए विशेष प्रोटोकॉल तैयार किए हैं। एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, आइसोलेशन यूनिट, PPE ट्रेनिंग और लैब नेटवर्क पहले की तुलना में काफी मजबूत हुए हैं। हालांकि चुनौतियां अभी भी हैं, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में, लेकिन यह कहना कि भारत पूरी तरह असहाय है, गलत होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला के प्रति जागरूकता को भारत में बढ़ाया जाए तो भारत का हेल्थ सिस्टम इसे संभालने में पूरी तरह से सक्षम है।

मिथक 8: इबोला छूने भर से तुरंत फैल जाता है

सच्चाई: हर तरह का सामान्य संपर्क संक्रमण नहीं फैलाता। संक्रमण का खतरा तब ज्यादा होता है जब संक्रमित शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आया जाए। यानी किसी संक्रमित सतह, खून, उल्टी या मेडिकल कचरे को बिना सुरक्षा के छूना जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन केवल किसी व्यक्ति को दूर से देखने, एक कमरे में होने या सामान्य बातचीत से संक्रमण नहीं फैलता है। डर के कारण कई बार लोग मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार करने लगते हैं, जबकि सही सावधानी और मेडिकल प्रोटोकॉल से संक्रमण का जोखिम काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

मिथक 9: सोशल मीडिया पर आने वाली हर जानकारी सही होती है

सच्चाई: इबोला जैसे विषयों पर फेक न्यूज बहुत तेजी से फैलती है। कई पुराने वीडियो, हॉलीवुड फिल्मों के दृश्य या दूसरे देशों की घटनाओं को भारत का बताकर वायरल कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में WHO, स्वास्थ्य मंत्रालय, ICMR या भरोसेमंद न्यूज स्रोतों की जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए।

मिथक 10: इबोला आने का मतलब फिर से कोविड जैसी स्थिति होगी।

सच्चाई: इबोला और कोविड-19 दोनों अलग तरह के वायरस हैं। कोविड बहुत तेजी से फैलने वाला संक्रमण था, जबकि इबोला का फैलाव तरीका अलग है और इसके लिए आमतौर पर संक्रमित शरीर के तरल पदार्थों का संपर्क जरूरी होता है। इसलिए विशेषज्ञ दोनों की तुलना सीधे तौर पर नहीं करते। हालांकि किसी भी वायरस को हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन हर संक्रमण का व्यवहार, फैलाव और जोखिम अलग होता है। कोविड के बाद लोगों में डर जल्दी बढ़ जाता है, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है कि हर वायरस “नई महामारी” नहीं बनता।

Disclaimer: इबोला एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन इससे ज्यादा खतरनाक इसके बारे में फैली गलत जानकारी और अफवाहें हो सकती हैं। डर और भ्रम लोगों को घबराहट की ओर ले जाते हैं, जबकि सही जानकारी लोगों को सुरक्षित रखती है। इसलिए इबोला या किसी भी अन्य संक्रमण से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ ICMR, AIIMS जैसी संस्थाओं के अपडेट पर ही भरोसा करें।