
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 12, 2018 9:31 AM IST
स्वाइन फ्लू एच1एन1 वायरस की वजह से होनेवाली बीमारी है। यह एक गंभीर और जानलेवा समस्या है लेकिन कुछ लोगों को यह नहीं पता है कि फ्लू का सही तरह इलाज नहीं कराना कितना घातक हो सकता है। स्वाइन से पीड़ित लोगों को आम तौर पर तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में एचओडी एंड जर्नल मेडिसिन डॉक्टर प्रदीप शाह आपको बता रहे हैं कि स्वाइन फ्लू को किस आधार पर तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है और इन श्रेणियों से आप क्या समझते हैं।
1) शुरुआती लक्षण
इस श्रेणी से संबंधित रोगियों में स्वाइन फ्लू के हल्के लक्षण दिखते हैं जैसे कि बुखार, खांसी, सर्दी, शरीर में दर्द और थकान। इन प्रकार के रोगी अन्य रोगों जैसे अस्थमा, मधुमेह, फेफड़े की बीमारी से पीड़ित नहीं होते हैं। इनका उपचार आम तौर पर लक्षण पर आधारित होता है और इसलिए, दवाइयां तदनुसार दी जाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपको बुखार है, तो आपको पेरासिटामोल दी जा सकती है और यदि शरीर में दर्द हो तो दर्द निवारक दवा दी जा सकती है। हालांकि खुद से दवा की सलाह नहीं दी जाती है। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति स्वाइन फ्लू के किसी भी लक्षण का अनुभव करता है तो उसे डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। यह स्थिति मौसमी फ्लू के समान है और मरीज 3-4 दिनों में बेहतर महसूस कर सकता है। घर पर उचित देखभाल करने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए, स्वाइन फ्लू से निपटने में देखभाल और दवा के साथ बेहतर डायट भी जरूरी है। स्वाइन फ्लू से ग्रस्त लगभग 50 से 60 फीसदी रोगी इसी श्रेणी में आते हैं।
2) मध्यम लक्षणों के साथ स्वाइन फ्लू
इस श्रेणी से जुड़े मरीजों में स्वाइन फ्लू के लक्षण गंभीर होते हैं। इसके अलावा, इन लोगों में सीओपीडी, फेफड़े की बीमारी आदि के उच्च जोखिम शामिल हैं। इन रोगियों के परिवार या इलाके में एच1एन1 वायरस के जोखिम का इतिहास भी होता है। जैसे-जैसे लक्षण गंभीर होते हैं, इन रोगियों को स्वाइन फ्लू दवाओं जैसे ऑसेलटामिविर दी जाती है। इन्हें अस्पताल में भर्ती करना स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में, इस स्थिति को घरेलू देखभाल के साथ दवाओं के साथ इलाज किया जा सकता है। इस श्रेणी में स्वाइन फ्लू के 25-30 फीसदी मरीज शामिल हैं।
3) गंभीर लक्षणों के साथ स्वाइन फ्लू
इस श्रेणी के लोग स्वाइन फ्लू की जटिलताओं से पीड़ित होते हैं। इसके रोगियों के रक्त में ऑक्सीजन (ओ2) लेवल में गिरावट के कारण श्वसन समस्याएं जैसे कि एआरडीएस, एक्यूट लीवर इंजरी, सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं शामिल हैं। इस मामले में, रोगी को अनिवार्य दवाओं के साथ सख्त चिकित्सा उपचार करना पड़ता है। इस श्रेणी से संबंधित लगभग सभी रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। गंभीर मामलों में, रोगियों को अलग रखा जाता है और श्वसन समस्याओं के कारण वेंटिलेटर पर रखा जाता है। स्वाइन फ्लू के सभी प्रकार के मामलों में इस श्रेणी के मरीज पांच फीसदी होते हैं। इस श्रेणी से संबंधित मरीज़ों का समय पर उपचार कराने से उन्हें ठीक किया जा सकता है। यही कारण है कि आपको लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और जल्द से जल्द इलाज करने के लिए एक स्थानीय चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।